नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कॉलेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के युवा नेता अनुराग सिंह नीटू ने 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। नीटू का लक्ष्य है कि कैंट विधानसभा सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी को जीत दिलाई जाए। इंडिया टाइम 24 से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी पूरी चुनावी रणनीति का खुलासा किया और साफ किया कि उनका फोकस उन पोलिंग बूथों पर है जहां पार्टी पिछली बार पिछड़ गई थी।
हार को जीत में बदलने की रणनीति
अनुराग सिंह नीटू ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कैंट सीट पर हार का मुख्य कारण हिंदू मतदाताओं वाले बूथों पर पार्टी का कमजोर प्रदर्शन रहा। यही वजह है कि उन्होंने 2027 के चुनाव की तैयारी में सबसे पहले इन्हीं बूथों पर ध्यान केंद्रित किया है।
उन्होंने कहा, “मैंने फैसला किया कि पार्टी की कमजोर कड़ी को मजबूत करना ही सबसे पहला कदम होगा। इसी सोच के साथ मैंने उन बूथों पर व्यक्तिगत स्तर पर टीम तैयार करनी शुरू कर दी है। हर बूथ पर चार युवाओं की टीम बनाई है, जो घर-घर जाकर पार्टी और हमारे नेता माननीय अखिलेश यादव जी की नीतियों का प्रचार कर रही है।”
150 से ज्यादा हिन्दू बहुल बूथों पर नजर
कैंट विधानसभा क्षेत्र में ऐसे करीब डेढ़ सौ से ज्यादा बूथ हैं जहां हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक है। इनमें मणिनाथ, सुभाष नगर, कालीबाड़ी, रामपुर गार्डन और बदायूं रोड जैसे इलाके प्रमुख हैं। नीटू ने अब तक 87 बूथों पर चार-चार युवाओं की टीम तैयार कर ली है। ये टीमें जनता तक पहुंचकर भाजपा सरकार की नीतियों से होने वाली दिक्कतों को उजागर कर रही हैं और साथ ही समाजवादी पार्टी के कामों व दृष्टिकोण से लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
वाल्मीकि और दलित समाज को साथ जोड़ने का दावा
नीटू ने इस बातचीत में एक और महत्वपूर्ण पहलू पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कैंट विधानसभा सीट पर वाल्मीकि समाज को अपने साथ जोड़ा है। नीटू के मुताबिक, आज इस क्षेत्र का वाल्मीकि समाज उनके साथ दिल से जुड़ चुका है और अगर अभी चुनाव हो जाएं तो पूरा दलित समाज समाजवादी पार्टी को वोट देगा।
उन्होंने कहा, “2027 का चुनाव पूरी ताकत से लड़ा जाएगा। अगर अखिलेश यादव जी ने मुझे कैंट विधानसभा सीट से टिकट दिया तो यह सीट जीतकर हम उनकी झोली में डालेंगे और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएंगे।”
जीत-हार का अंतर घटा
अनुराग सिंह नीटू का दावा है कि कैंट विधानसभा सीट पर जीत-हार का अंतर अब लोकसभा चुनाव में केवल 3200 वोटों का रह गया है। यह अंतर नीटू की रणनीति और बूथ स्तर की मेहनत से पाटा जा सकता है। वे मानते हैं कि बूथ स्तर पर मजबूत पकड़ और समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनाकर इस अंतर को आसानी से पलटा जा सकता है।
पिछली बार टिकट से चूक, इस बार कोई कसर नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब अनुराग सिंह नीटू ने कैंट सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की हो। पिछली बार 2022 के चुनाव में भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी। उनकी दावेदारी को उस समय भी काफी मजबूत माना जा रहा था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें टिकट नहीं मिल सका।
इसके बावजूद नीटू ने हार नहीं मानी और अब उन्होंने 2027 की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा कि इस बार पूरी तरह से जमीनी स्तर पर मेहनत की जा रही है ताकि पार्टी नेतृत्व भी देख सके कि वे कितने गंभीर और मजबूत प्रत्याशी हैं।
भाजपा सरकार पर हमला
बातचीत में नीटू ने भाजपा सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में आम लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे महंगाई हो, बेरोजगारी हो या कानून-व्यवस्था का मुद्दा—हर जगह जनता त्रस्त है।
नीटू का कहना है कि उनकी टीमें जब जनता के बीच जाती हैं तो लोग खुलकर भाजपा सरकार की नाकामियों के बारे में बताते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी ही एकमात्र विकल्प है जो लोगों को राहत दिला सकती है।
युवाओं को नेतृत्व में लाने पर जोर
अनुराग सिंह नीटू खुद एक युवा नेता हैं और उनका मानना है कि चुनावी राजनीति में युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। यही कारण है कि उन्होंने हर बूथ पर चार युवाओं की टीम बनाई है। ये युवा अपने-अपने इलाकों में लोगों को जोड़ने और जनसंपर्क का काम कर रहे हैं।
उनका कहना है कि आज के युवा सोशल मीडिया से लेकर जमीनी प्रचार तक हर स्तर पर पार्टी का संदेश जनता तक पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया है।
अखिलेश यादव से उम्मीद
नीटू का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उन्हें टिकट का अवसर देते हैं तो वे कैंट सीट जीतकर प्रदेश में सपा की सरकार बनाने में योगदान देंगे।
चुनाव से पहले समीकरण बदलने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैंट विधानसभा सीट हमेशा से ही भाजपा का गढ़ रही है, लेकिन अब समीकरण धीरे-धीरे बदल रहे हैं। नीटू की मेहनत और बूथ स्तर पर पकड़ से भाजपा को चुनौती मिल सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वाल्मीकि समाज और दलित मतदाता नीटू के साथ खड़े हो जाते हैं तो चुनाव में बड़ा उलटफेर संभव है। वहीं हिंदू बहुल बूथों पर टीम बनाकर प्रचार करना भी उनकी रणनीति का अहम हिस्सा है।
नीटू की सियासी छवि
अनुराग सिंह नीटू का छात्र राजनीति से लेकर अब तक का सफर हमेशा चर्चा में रहा है। वे बरेली कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और वहीं से उनकी पहचान एक जुझारू युवा नेता के तौर पर बनी। अब वे धीरे-धीरे मुख्यधारा की राजनीति में मजबूत जगह बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
उनकी छवि एक संघर्षशील और मेहनती नेता की है जो जनता से सीधे जुड़कर काम करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता स्थानीय स्तर पर लगातार बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, अनुराग सिंह नीटू ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कैंट सीट को टारगेट करते हुए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। बूथ स्तर पर मजबूत टीम, वाल्मीकि समाज का समर्थन, भाजपा सरकार की नाकामियों को उजागर करना और युवाओं को नेतृत्व में शामिल करना—ये उनकी रणनीति के अहम पहलू हैं।
बहरहाल, अब देखना होगा कि आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व उन्हें टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारता है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि नीटू ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी है और कैंट विधानसभा सीट पर सियासी जंग बेहद दिलचस्प होने वाली है।





