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जिन विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव में हारी थी भाजपा, उनके विधायकों के टिकट काटने की है तैयारी, जानिये बरेली जिले में किन विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायकों पर मंडरा रहा है खतरा?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव कई मायनों में अहम होने जा रहे हैं। इन चुनावों में कुछ भाजपा नेताओं का सियासी भविष्य भी दांव पर लगने जा रहा है। पार्टी 100 से 115 सीटों पर मौजूदा विधायकों की जगह नए चेहरे उतारने की तैयारी कर रही है। इसके दो प्रमुख कारण हैं। पहला यह कि भाजपा उन विधानसभा सीटों पर बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहती जहां वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था या हार-जीत का अंतर 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी कम रह गया था। दूसरा यह कि भाजपा को समाजवादी पार्टी के
बागी उम्मीदवारों को भी भाजपा एडजस्ट करना चाहती है जिससे कुछ मौजूदा विधायकों की किस्मत दांव पर लगी हुई है।
बात अगर बरेली जिले की करें तो यहां नवाबगंज, भोजीपुरा, बिथरी चैनपुर, बहेड़ी और फरीदपुर विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इनमें भोजीपुरा और बहेड़ी विधानसभा सीटों पर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को हार का ही सामना करना पड़ा था लेकिन नवाबगंज, बिथरी चैनपुर और फरीदपुर विधानसभा सीटों पर उसे 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हुई थी। इनमें नवाबगंज में डॉक्टर एमपी आर्य, बिथरी चैनपुर से डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा और फरीदपुर से प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल विधायक हैं।

वहीं, बहेड़ी से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले छत्रपाल गंगवार अब बरेली लोकसभा सीट से सांसद बन चुके हैं जबकि भोजीपुरा से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले बहोरन लाल मौर्य अब विधान परिषद सदस्य बन चुके हैं। ऐसे में इन पांचों ही सीटों पर आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर नए चेहरे मैदान में उतारे जा सकते हैं। खास तौर पर राघवेंद्र शर्मा और एमपी आर्य की स्थिति क्षेत्र में भी काफी खराब बताई जा रही है।

श्रुति गंगवार

वहीं, भोजीपुरा और नवाबगंज में से एक सीट पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की पुत्री श्रुति गंगवार को उतारे जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं जबकि बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल की वापसी की उम्मीद जताई जा रही है।

राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल

हालांकि, मेयर उमेश गौतम भी इस सीट से विधानसभा टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन उनकी नजर कैंट विधानसभा सीट पर भी बताई जा रही है। कुछ माह पूर्व ही में उमेश गौतम के पुत्र पार्थ गौतम ने बिथरी सीट पर एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसके बाद माना जा रहा है कि इस सीट पर मेयर परिवार का कोई भी सदस्य दावा ठोक सकता है।

डा. उमेश गौतम.

इसके अलावा शहर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और वन राज्य मंत्री डॉक्टर अरुण कुमार सक्सेना 75 वर्ष की आयु सीमा को पार कर चुके हैं। ऐसे में उनकी जगह भी नए चेहरे का उतारा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

अतुल कपूर
सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा

इस सीट पर नगर निगम के पूर्व उपसभापति और खत्री समाज के उभरते हुए नेता अतुल कपूर और नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य, वरिष्ठ पार्षद और डॉक्टर अरुण कुमार के ही कायस्थ समाज से ताल्लुक रखने वाले नेता सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा का नाम टिकट के दावेदारों में जोर-शोर से चल रहा है। बहरहाल, बरेली जिले की 6 विधानसभा सीटों पर इस बार भाजपा से नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं।

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