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नए साल से पहले जरूरतमंदों को मिला ‘न्यू ईयर गिफ्ट’, डॉक्टर अनीस बेग बने उम्मीद की किरण जहां एक दिन में खत्म हो जाती है सेवा, वहां दस दिन तक डटे रहे अनीस बेग, कंबल से ज्यादा भरोसा बांटा

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नीरज सिसौदिया, बरेली

नए साल की खुशियों से पहले जहां अधिकतर लोग अपने घरों और परिवार के साथ जश्न की तैयारियों में जुटे रहते हैं, वहीं कैंट विधानसभा क्षेत्र में एक शख्स ऐसा भी रहा जिसने गरीब और जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया। समाजवादी पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष और कैंट विधानसभा सीट से सपा के प्रबल दावेदार डॉक्टर अनीस बेग ने नए साल से पहले जरूरतमंदों को ऐसा तोहफा दिया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

भीषण ठंड के इस मौसम में डॉक्टर अनीस बेग ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को सर्दी के सितम से बचाने के लिए लगातार दस दिनों तक एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत उन्होंने जैकेट और कंबल वितरित किए। यह सिर्फ एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पूरे दस दिनों तक अलग-अलग इलाकों में जाकर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई गई। इसी वजह से लोग इसे ‘न्यू ईयर गिफ्ट’ के तौर पर देख रहे हैं।

डॉक्टर अनीस बेग का यह अभियान सुभाष नगर-मढ़ीनाथ, एजाज नगर गौटिया, बिहारीपुर, कटरा चांद खां सहित उन इलाकों में चलाया गया, जहां बड़ी संख्या में दलित, मजदूर और बेहद गरीब परिवार रहते हैं। इन बस्तियों में सर्दी का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। खुले या कच्चे मकानों में रहने वाले लोग ठंड से सबसे अधिक परेशान होते हैं। डॉक्टर अनीस बेग ने इन्हीं इलाकों को प्राथमिकता दी और खुद मौके पर पहुंचकर लोगों को जैकेट और कंबल बांटे।

इस पूरे अभियान की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की भागीदारी और प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक रही। खास तौर पर महिलाओं ने डॉक्टर अनीस बेग की इस पहल की जमकर सराहना की। कई महिलाओं ने कहा कि सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे समय में जब कोई खुद चलकर मदद करता है तो लगता है कि समाज में इंसानियत अभी जिंदा है।

आमतौर पर देखने में आता है कि कई समाजसेवी संगठन या नेता सर्दी के मौसम में सिर्फ एक दिन कंबल बांटकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। फोटो खिंचवाए जाते हैं, खबरें छप जाती हैं और उसके बाद जरूरतमंदों की हालत फिर वही रह जाती है। लेकिन डॉक्टर अनीस बेग ने इस सोच को गलत साबित किया। उन्होंने लगातार दस दिनों तक अभियान चलाकर यह साफ कर दिया कि उनका मकसद समाजसेवा के नाम पर सिर्फ सुर्खियां बटोरना नहीं है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना है।

डॉक्टर अनीस बेग का कहना है कि सर्दी के मौसम में एक कंबल या जैकेट किसी के लिए मामूली चीज हो सकती है, लेकिन गरीब के लिए यही चीज उसकी जान बचाने का साधन बन जाती है। उनका लक्ष्य यही था कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में रहने वाला कोई भी जरूरतमंद ठंड की वजह से ठिठुरने को मजबूर न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने पूरे दस दिन तक बिना थके यह अभियान चलाया।

यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टर अनीस बेग ने जरूरतमंदों के लिए ऐसा काम किया हो। पिछले कई वर्षों से वह लगातार समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय रहे हैं। चाहे इलाज में मदद हो, दवाइयों का वितरण हो या फिर आपदा के समय लोगों के साथ खड़े रहने की बात हो, डॉक्टर अनीस बेग हमेशा आगे नजर आते हैं। उनकी पहचान एक ऐसे समाजसेवी नेता के रूप में बन चुकी है जो धर्म देखकर मदद नहीं करता।

डॉक्टर अनीस बेग अक्सर कहते हैं कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। यही वजह है कि उनके अभियानों में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं होता। वह सभी जरूरतमंदों की एक समान मदद करते हैं और भाईचारे का संदेश देते हैं। उनके इस अभियान के दौरान भी सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और एक-दूसरे के साथ मिलकर मदद का काम किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टर अनीस बेग सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि हर समय जनता के बीच रहते हैं। कई लोगों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर वह रात में भी फोन उठाते हैं और जहां संभव हो, वहां मदद जरूर करते हैं। इसकी झलक उनके कंबल एवं जैकेट वितरण अभियान में उस वक्त देखने को मिली जब अनीस बेग ने युगवीणा के पास रात में ठंड से ठिठुरते लोगों को कंबल और जैकेट वितरित कीं। यही वजह है कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

नए साल से पहले चलाए गए इस दस दिवसीय अभियान को लोग वर्ष 2025 में जनसेवा की एक मिसाल के तौर पर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब कोई नेता या समाजसेवी बिना किसी दिखावे के, लगातार मेहनत करके गरीबों के लिए काम करता है, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। इससे दूसरे लोग भी प्रेरित होते हैं।

डॉक्टर अनीस बेग के इस अभियान ने यह भी साबित किया कि राजनीति और समाजसेवा अगर ईमानदारी से की जाए तो जनता का भरोसा अपने-आप बनता है। उन्होंने जिस तरह से खुद गलियों और बस्तियों में जाकर लोगों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और जरूरत के अनुसार मदद पहुंचाई, वह काबिले-तारीफ है।

अभियान के आखिरी दिन लोगों ने डॉक्टर अनीस बेग का धन्यवाद किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कई बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में खुशी के आंसू भी देखने को मिले। उनके लिए यह सिर्फ एक कंबल या जैकेट नहीं था, बल्कि यह एहसास था कि कोई उनकी चिंता करने वाला भी है।

कुल मिलाकर नए साल से पहले डॉक्टर अनीस बेग की यह पहल न सिर्फ जरूरतमंदों के लिए राहत लेकर आई, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी छोड़ गई। यह संदेश यही है कि अगर इरादे नेक हों तो समाजसेवा सिर्फ एक दिन का काम नहीं, बल्कि लगातार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी होती है। वर्ष 2025 की शुरुआत से पहले डॉक्टर अनीस बेग ने जनसेवा की जो मिसाल पेश की है, वह लंबे समय तक लोगों के दिलों में याद रखी जाएगी।

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