नीरज सिसौदिया, बरेली
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली। पार्टी की हालिया गतिविधियां इसका संकेत दे रही हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। इस अभियान के बहाने पार्टी को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का एक मौका मिल गया है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी ने संगठन की तैयारियों और वास्तविक स्थिति को परखने के लिए कई स्तरीय व्यवस्था की। इसमें सौ-सौ बूथों के प्रभारी, ब्लॉक प्रभारी, विधानसभा क्षेत्र प्रभारी, जिला प्रभारी और दो-दो जिलों के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।

संगठन के वरिष्ठ नेताओं को ही दो जिलों का प्रभार सौंपा गया है। इन नेताओं को न सिर्फ बीएलए और एसआईआर का प्रभार सौंपा गया है बल्कि पार्टी की जमीनी तैयारी को दावेदारों की ताकत को भी परखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी क्रम में बरेली और पीलीभीत जिले का प्रभार पूर्व जिला अध्यक्ष, पूर्व सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह यादव को सौंपा गया है।

बता दें कि बरेली जिले में 9 और पीलीभीत जिले में 4 विधानसभा सीटें पड़ती हैं। इनमें बरेली जिले में बहेड़ी, मीरगंज, भोजीपुरा, नवाबगंज, फ़रीदपुर, बिथरी चैनपुर, बरेली, बरेली कैंट और आंवला शामिल हैं। वहीं, पीलीभीत जिले में पीलीभीत, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर विधानसभा सीटें आती हैं। संगठन की सियासत के अनुभवी और दिग्गज नेता वीरपाल सिंह यादव ने जिम्मेदारी मिलने के अगले ही दिन से काम शुरू कर दिया। उन्होंने बरेली और पीलीभीत दोनों जिलों की सभी 13 विधानसभा सीटों पर पहले कई बार एसआईआर को लेकर समीक्षा बैठकें कीं और फिर बीएलए सम्मेलन में मुख्य रूप से शिरकत की। इन समीक्षा बैठकों और बीएलए सम्मेलनों की पूरी रिपोर्ट लेकर पिछले दिनों वीरपाल सिंह यादव लखनऊ पहुंचे। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को उक्त सीटों की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और पूरी रिपोर्ट सौंपी।
सूत्र बताते हैं कि ये रिपोर्ट विधानसभा वार पूरी स्थिति को दर्शाती है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। हालांकि, वीरपाल सिंह यादव में इस संबंध सिर्फ इतना ही कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में क्या है इस संबंध में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया।
सूत्र बताते हैं कि वीरपाल सिंह ने दोनों जिलों की 13 विधानसभा सीटों पर कई बार जो दौरे किए हैं उन सभी दौरों का सार इस रिपोर्ट के माध्यम से आलाकमान को सौंपा गया है।

सियासी जानकारों का मानना है कि वीरपाल यादव को इन जिलों की नब्ज टटोलने की जिम्मेदारी यूं ही नहीं दी गई है। वह संगठन की सियासत के महारथी हैं और समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को सत्ता में वापसी के अंतिम अवसर के तौर पर देख रही है। इसलिए पुराने दिग्गजों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं ताकि उनके अनुभव का लाभ आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को मिल सके। इन दिग्गजों की रिपोर्ट संगठन में सुधार से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक में अहम भूमिका निभाएगी। बहरहाल, वीरपाल सिंह यादव के पिछले लगभग दो महीने के दौरान ताबड़तोड़ बैठकों और सम्मेलनों के दौर ने स्थानीय स्तर पर पनप रहे छोटे नेताओं की गुटबाजी पर पूर्ण विराम लगा दिया है। खुद को क्षेत्रीय क्षत्रप के तौर पर पेश करने वाले छुटभैये नेता अब खामोश नजर आ रहे हैं। इससे पार्टी के वोटों के बिखराव की संभावनाओं पर भी पूर्ण विराम लगता नजर आ रहा है।





