देश

कल खत्म हो रहा है संसद का बजट सत्र, संगठन विस्तार या संतुलन करेगी सपा? बरेली में लोधी फैक्टर पर होगा साइकिल का इम्तिहान, जानिये क्या कहते हैं सियासी समीकरण?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली
13 फरवरी को संसद के बजट सत्र का पहला चरण समाप्त होने जा रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी में हाल ही में खाली हुए बरेली जिला अध्यक्ष पद पर चयन को लेकर चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र के पहले चरण के खत्म होते ही समाजवादी पार्टी बरेली के नए जिला अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है।
इस दौड़ में सबसे मजबूत नाम के तौर पर समाजवादी पार्टी के महानगर सचिव और लोधी समाज के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह लोधी राजपूत उभरकर सामने आए हैं। महेंद्र सिंह ने जिला अध्यक्ष बनने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीते कुछ महीनों में वह बरेली से लेकर लखनऊ, आगरा और अन्य प्रमुख शहरों तक लगातार दौरे कर चुके हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात, संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों से संवाद और समाज के लोगों को एकजुट करने की कोशिशें तेज़ी से की गई हैं।
पार्टी के अंदरखाने की बात करें तो समाजवादी पार्टी के कुछ दिग्गज नेता महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में माने जा रहे हैं। इन नेताओं का मानना है कि बरेली जैसे राजनीतिक रूप से अहम जिले में संगठन को मजबूत करने के लिए ऐसे युवा चेहरे की जरूरत है, जो गुटबाजी से ऊपर उठकर सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके। महेंद्र सिंह लोधी को एक ऐसा नेता बताया जा रहा है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़ा रहा है और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ रखता है।
इस पूरे घटनाक्रम में लोधी समाज की भूमिका बेहद अहम हो गई है। दरअसल, समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद से अब तक बरेली में लोधी समाज से कोई भी नेता जिला अध्यक्ष नहीं बन पाया है। वर्षों से यह समाज पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस करता रहा है। अब पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि लोधी समाज खुलकर और संगठित रूप से अपने नेता के समर्थन में सामने आया है। लोधी समाज के कई संगठन और सामाजिक मंच महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाए जाने की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं।
लोधी समाज के नेताओं का कहना है कि बरेली जिले में उनकी आबादी अच्छी खासी है और चुनावों में भाजपा को हमेशा उनका समर्थन मिलता रहा है, लेकिन समाजवादी संगठन में उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। ऐसे में अगर महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह न सिर्फ सामाजिक संतुलन की दिशा में बड़ा कदम होगा, बल्कि पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
पार्टी के जानकारों का कहना है कि बरेली में संगठन लंबे समय से गुटबाजी और आपसी खींचतान से जूझ रहा है। जिला अध्यक्ष का पद खाली या कमजोर रहने का सीधा असर पार्टी की चुनावी तैयारियों और जनाधार पर पड़ा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी अब किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, जो संगठन को एकजुट कर सके और आगामी चुनावों के लिए मजबूत ढांचा खड़ा कर सके। महेंद्र सिंह लोधी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
महेंद्र सिंह लोधी राजपूत की सक्रियता भी इस बात की गवाही देती है कि वह इस जिम्मेदारी को लेकर गंभीर हैं। बरेली से बाहर जाकर उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है। लखनऊ में संगठन के बड़े नेताओं से मुलाकात हो या आगरा जैसे शहरों में पार्टी नेताओं से संवाद, हर स्तर पर उन्होंने अपनी दावेदारी मजबूती से रखी है। इसके साथ ही बरेली में भी वह लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस बार लोधी समाज का नेता जिला अध्यक्ष बनता है, तो यह समाजवादी पार्टी के लिए एक नया सामाजिक समीकरण तैयार कर सकता है। इससे न केवल लोधी समाज का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच भी पार्टी का संदेश जाएगा कि संगठन में सभी वर्गों को बराबरी का मौका दिया जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को ही लेना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर काफी सोच-समझकर निर्णय लेते हैं। बरेली जिला अध्यक्ष का चयन भी उसी रणनीति का हिस्सा होगा, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
अब सबकी निगाहें 13 फरवरी के बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार वाकई लोधी समाज का लंबा इंतजार खत्म होता है और महेंद्र सिंह लोधी राजपूत को समाजवादी पार्टी बरेली का जिला अध्यक्ष बनने का मौका मिलता है, या पार्टी नेतृत्व किसी और समीकरण पर दांव लगाता है। फिलहाल, बरेली की सियासत में जिला अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *