नीरज सिसौदिया, बरेली
मार्बल का कारोबार करने वाले एक व्यक्ति ने समाजवादी पार्टी के एक नेता और उसके साथी पर रंगदारी मांगने, धमकी देने और दुकान पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि उसने दोनों से लिया गया कर्ज ब्याज सहित पूरा चुका दिया, फिर भी उससे लगातार पैसे मांगे जा रहे हैं। मामले में अब एसएसपी के आदेश पर थाना बारादरी पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
राजस्थान के नागौर जिले के मकराना निवासी रिजवान अहमद वर्तमान में बरेली के पुराना शहर क्षेत्र के कटिकुइंया इलाके में रहते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 13 साल पहले उन्होंने मिनी बाइपास पर मार्बल पत्थर की दुकान खोली थी। छह साल पहले लॉकडाउन के समय व्यापार में नुकसान हुआ और उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी। इसी दौरान सपा नेता मोहम्मद साजिद और इकबाल रजा उनकी दुकान पर आए और व्यापार में मदद करने की बात कही।
आरोप है कि दोनों ने उन्हें 20 लाख रुपये उधार दिए और इसके बदले हर महीने दो प्रतिशत ब्याज देने की शर्त रखी। रिजवान अहमद का कहना है कि वह हर महीने लगभग सवा लाख रुपये दोनों को देते रहे और बाद में मूल रकम और ब्याज समेत पूरी रकम वापस कर दी।
इसके बावजूद आरोपी अब भी उनसे हर महीने सवा लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। रिजवान का आरोप है कि दोनों दुकान पर आकर धमकी देते हैं कि अगर पैसे नहीं दिए तो दुकान पर कब्जा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों के पास हथियार रहते हैं और वे डराने-धमकाने का काम करते हैं।
पीड़ित के अनुसार, 22 जनवरी की रात इकबाल रजा ने उन्हें स्वालेनगर स्थित अपने घर बुलाया। वहां से उन्हें सपा नेता मोहम्मद साजिद के घर जागृति नगर ले जाया गया। आरोप है कि वहां दोनों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह वह वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
इसके बाद रिजवान अहमद ने किला थाना पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर थाना बारादरी पुलिस ने मोहम्मद साजिद और इकबाल रजा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
इस मामले को लेकर यह बात भी सामने आई है कि इस्लाम धर्म में सूदखोरी (ब्याज पर पैसा देना) को हराम माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूदखोरी करने वाले व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत तक किया जा सकता है और समुदाय के लोग उसके घर पानी तक पीना पसंद नहीं करते। इस कारण यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी चर्चा में है।
हालांकि, मोहम्मद साजिद और इकबाल रजा वास्तव में इस आरोप के दोषी हैं या नहीं, इसका फैसला अदालत करेगी। पुलिस जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





