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भंडारे से PDA पंचायत तक, आंवला में डॉ. जीराज सिंह यादव की बढ़ती ताकत, हर समाज से मिल रहा समर्थन, पढ़ें कैसे गांव-गांव में उमड़ रहा जनसैलाब?

नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के संभावित दावेदारों में डॉ. जीराज सिंह यादव का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। पिछले दो दिनों में आंवला विधानसभा क्षेत्र में हुए अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों ने उनकी दावेदारी को और मजबूती देने का काम किया है। गांवों और कस्बों में जिस तरह विभिन्न समाजों के लोगों ने खुलकर उनके समर्थन में आवाज उठाई, उससे यह संदेश गया कि डॉ. जीराज सिंह यादव केवल एक जातीय नेता नहीं बल्कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण को साधने वाले नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं।


27 मई को आंवला विधानसभा की ग्राम पंचायत मंडोरा में आयोजित पीडीए पंचायत कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कश्यप समाज, पाल समाज, मौर्य समाज, दिवाकर समाज, मुस्लिम समाज और सक्सेना समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में पहुंचे डॉ. जीराज सिंह यादव का पारंपरिक तरीके से पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। गांव में हुए इस आयोजन को केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने समाजवादी पार्टी की नीतियों और अखिलेश यादव के नेतृत्व पर भरोसा जताया।


सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जीराज सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान किए गए विकास कार्यों और सामाजिक न्याय की नीतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा गरीबों, किसानों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज रही है। उन्होंने युवाओं को रोजगार, किसानों को सम्मान और समाज के कमजोर वर्गों को राजनीतिक हिस्सेदारी देने की जरूरत पर जोर दिया। मिशन 2027 को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई का चुनाव होगा।


मंडोरा की इस पंचायत में सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई जब बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने हाथ उठाकर डॉ. जीराज सिंह यादव को समाजवादी पार्टी से टिकट दिए जाने की मांग का समर्थन किया। स्थानीय लोगों का कहना था कि क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाले नेताओं को ही पार्टी को प्राथमिकता देनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि चुनाव केवल जातीय समीकरण से नहीं बल्कि जमीन पर काम करने वाले चेहरों से जीता जाता है और डॉ. जीराज सिंह यादव लगातार गांव-गांव जाकर लोगों के सुख-दुख में शामिल हो रहे हैं।
इसके अगले दिन यानी 28 मई को आंवला नगर पालिका क्षेत्र के मोहल्ला बजरिया के साथियों के आमंत्रण पर डॉ. जीराज सिंह यादव ग्राम पंचायत दलुयापुर, चकरपुर और भीमपुर के बीच स्थित ब्रह्मदेव महाराज के थान पर आयोजित भंडारे में पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी को स्थानीय स्तर पर खास महत्व दिया गया, क्योंकि हाल के वर्षों में राजनीतिक दलों ने सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के जरिए गांवों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।

भंडारे में मौजूद लोगों ने डॉ. जीराज सिंह यादव के समर्थन में नारे लगाए और समाजवादी पार्टी नेतृत्व से उन्हें 2027 में टिकट देने की मांग की। खास बात यह रही कि यहां महिलाओं की बड़ी भागीदारी दिखाई दी। कई स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉ. जीराज सिंह यादव केवल चुनावी मौसम में नहीं बल्कि सालभर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। ग्रामीणों ने ब्रह्मदेव महाराज के थान पर हाथ उठाकर उनके टिकट की कामना की। कार्यक्रम में “जय समाजवाद” और “अखिलेश यादव जिंदाबाद” के नारों के बीच राजनीतिक माहौल पूरी तरह समाजवादी रंग में दिखाई दिया।


आंवला विधानसभा सीट का राजनीतिक गणित हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां यादव, कश्यप, पाल, मौर्य, दलित और मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में प्रभाव रखते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, उसके लिए सामाजिक संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। डॉ. जीराज सिंह यादव पिछले कुछ समय से जिस तरह अलग-अलग समाजों के बीच लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं, उससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि वह खुद को केवल यादव वोट तक सीमित नहीं रखना चाहते। पीडीए की राजनीति को जमीन पर उतारने की कोशिश में वह गैर-यादव पिछड़ी जातियों और मुस्लिम समाज के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में जुटे हैं।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव में ऐसे चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है जिनकी सामाजिक पकड़ मजबूत हो और जो संगठन के साथ-साथ जनता के बीच भी सक्रिय हों। डॉ. जीराज सिंह यादव का लगातार गांवों में पहुंचना, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना और अलग-अलग समुदायों को साथ जोड़ने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यही वजह है कि उनकी दावेदारी को लेकर क्षेत्र में चर्चा लगातार तेज हो रही है।


आंवला क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक मौजूद रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में सपा नेतृत्व ऐसे उम्मीदवार की तलाश में रहेगा जो संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण भी तैयार कर सके। डॉ. जीराज सिंह यादव की सक्रियता को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। खास तौर पर पीडीए पंचायतों में उनकी मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि वह अखिलेश यादव की नई सामाजिक रणनीति को आंवला में मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि अभी टिकट की आधिकारिक घोषणा भले दूर हो, लेकिन दावेदारों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। गांवों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां और लगातार हो रहे सामाजिक कार्यक्रम इसी का हिस्सा हैं। डॉ. जीराज सिंह यादव जिस तरह लगातार जनता के बीच पहुंच रहे हैं, उससे उनकी दावेदारी को बल मिल रहा है। समर्थकों का मानना है कि अगर समाजवादी पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह आंवला सीट पर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना सकते हैं।


फिलहाल आंवला विधानसभा में राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे चुनावी रंग में रंगता दिखाई दे रहा है। पीडीए पंचायतों से लेकर धार्मिक आयोजनों तक, हर मंच पर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश हो रही है। इन कार्यक्रमों में मिल रहे समर्थन ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि डॉ. जीराज सिंह यादव अब आंवला विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख दावेदारों में मजबूती से अपनी जगह बना चुके हैं।

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