नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय और अनुशासित नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में बरेली कैंट विधानसभा सीट से पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार संजीव कुमार सक्सेना को प्रदेश नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन चुनिंदा नेताओं में शामिल किया है, जिन्हें बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक एमएलसी निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद दानिश अख्तर के चुनाव अभियान को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न जिलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल द्वारा जारी इस सूची में संजीव सक्सेना को बरेली जनपद का प्रभारी बनाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल एक चुनावी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संगठन की ओर से संजीव सक्सेना की कार्यशैली, संगठन क्षमता और नेतृत्व कौशल पर दोबारा जताया गया भरोसा भी है। शिक्षक एमएलसी चुनाव में संगठन के लिए जिलेवार प्रभारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे प्रभारी को कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने, चुनावी रणनीति को धरातल पर लागू कराने, स्थानीय नेताओं को साथ लेकर चलने और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में बरेली जैसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी संजीव सक्सेना को मिलना उनके बढ़ते संगठनात्मक कद का संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, यह पहला अवसर नहीं है जब समाजवादी पार्टी ने संजीव सक्सेना पर भरोसा जताया हो। नगर निगम चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें बरेली मेयर पद का अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदलने के कारण पार्टी ने निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर का समर्थन करने का फैसला लिया, जिसके चलते संजीव सक्सेना चुनाव मैदान में नहीं उतर सके। उस समय राजनीतिक हलकों में माना जा रहा था कि इतनी बड़ी राजनीतिक घटना के बाद संजीव सक्सेना संगठन से दूरी बना सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसके विपरीत पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और अनुशासन का परिचय दिया। उन्होंने न केवल पार्टी के फैसले का सम्मान किया बल्कि उसके बाद भी पूरी सक्रियता के साथ संगठन के कार्यक्रमों, आंदोलनों और जनसंपर्क अभियानों में भाग लेते रहे।
यही कारण है कि प्रदेश नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी दल में नेतृत्व उन्हीं नेताओं को लगातार जिम्मेदारियां देता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं। संजीव सक्सेना ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को ऐसे ही नेता के रूप में स्थापित किया है।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के कई नेता टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर लगातार जिम्मेदारियां मिलना संजीव सक्सेना के पक्ष को मजबूत करता दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर भी यह माना जाता है कि विधानसभा टिकट केवल जनाधार के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन के प्रति निष्ठा, सक्रियता, अनुशासन और नेतृत्व के विश्वास को ध्यान में रखकर भी तय किए जाते हैं। ऐसे में एमएलसी चुनाव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना भविष्य की राजनीति के लिहाज से संजीव सक्सेना के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि समाजवादी पार्टी इस बार 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर काफी पहले से संगठनात्मक तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे में जिन नेताओं को लगातार जिम्मेदारियां मिल रही हैं, उन्हें भविष्य की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा भी माना जा सकता है। यदि आने वाले महीनों में संजीव सक्सेना इसी तरह संगठन की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं और पार्टी नेतृत्व का विश्वास बनाए रखते हैं, तो बरेली कैंट विधानसभा सीट से उनकी दावेदारी और मजबूत हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल द्वारा जारी सूची में अमरोहा, संभल, बरेली और शाहजहांपुर के लिए कुल आठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। बरेली जनपद के लिए संजीव कुमार सक्सेना के साथ प्रमोद बिष्ट और कदीर अहमद को भी प्रभारी बनाया गया है। यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर शिक्षक एमएलसी चुनाव में पार्टी प्रत्याशी मोहम्मद दानिश अख्तर की जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सौंपी गई है।
संगठन में लगातार सक्रियता, नेतृत्व का दोबारा मिला विश्वास और अहम चुनावी जिम्मेदारी—इन तीनों घटनाक्रमों ने बरेली की राजनीति में संजीव सक्सेना की भूमिका को नई मजबूती दी है। हालांकि विधानसभा चुनाव का टिकट तय करने का अंतिम अधिकार पार्टी नेतृत्व के पास होगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह नियुक्ति निश्चित रूप से इस बात का संकेत मानी जा रही है कि समाजवादी पार्टी संजीव सक्सेना को अपने भरोसेमंद नेताओं की श्रेणी में रखती है। यदि यही विश्वास आगे भी कायम रहता है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में बरेली कैंट सीट से उनके नाम पर गंभीरता से विचार होना स्वाभाविक माना जाएगा।




