नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और जसवंत नगर विधानसभा सीट से विधायक शिवपाल सिंह यादव का मंगलवार को बरेली जिले के आंवला विधानसभा क्षेत्र में हुआ दौरा स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया। आधिकारिक तौर पर यह दौरा एक शैक्षिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बताया गया, लेकिन जिस तरह से यहां राजनीतिक माहौल बना और बड़ी संख्या में समर्थक जुटे, उससे साफ संकेत मिला कि इस यात्रा के राजनीतिक मायने भी काफी गहरे हैं।

दरअसल, शिवपाल सिंह यादव आंवला क्षेत्र में एक हेरिटेज स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम देखने में भले ही एक सामान्य शैक्षिक आयोजन था, लेकिन वहां का माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ नजर आया। समाजवादी पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे। अलग-अलग गांवों और कस्बों से लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे हुए थे।
इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की रही, वह था आंवला विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार माने जाने वाले डॉ. जीराज सिंह यादव का शक्ति प्रदर्शन। उन्होंने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचकर शिवपाल सिंह यादव का जोरदार स्वागत किया। समर्थकों की भीड़ और उनके उत्साह ने यह साफ कर दिया कि क्षेत्र में डॉ. जीराज सिंह यादव की पकड़ मजबूत है।

कार्यक्रम स्थल पर जिस तरह से उनके समर्थक नारे लगाते और उनका स्वागत करते दिखाई दिए, उसने पूरे माहौल को राजनीतिक संदेश में बदल दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी बड़े नेता के सामने इस तरह समर्थकों की भारी भीड़ जुटाना केवल स्वागत का हिस्सा नहीं होता, बल्कि इसके जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का भी संकेत दिया जाता है।
डॉ. जीराज सिंह यादव को शिवपाल सिंह यादव का करीबी माना जाता है और यह बात कार्यक्रम के दौरान भी साफ नजर आई। शिवपाल सिंह यादव ने उन्हें पूरी तवज्जो दी और उनके साथ काफी देर तक बातचीत भी की। यही वजह है कि इस दौरे को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
आंवला विधानसभा सीट का पिछला चुनाव भी इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने के लिए कई नेताओं ने मेहनत की थी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे।

उस समय डॉ. जीराज सिंह यादव ने भी क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की थी। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क किया और समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी। लेकिन जब उम्मीदवार घोषित करने की बारी आई तो पार्टी ने बिल्सी के पूर्व विधायक आर. के. शर्मा को उम्मीदवार बना दिया।
यह फैसला उस समय काफी चर्चा में रहा था। कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना था कि अगर उस समय क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय और मजबूत जनसंपर्क रखने वाले नेता को मौका दिया जाता तो परिणाम अलग हो सकते थे। चुनाव परिणाम आने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि टिकट चयन में हुई रणनीतिक चूक का असर पार्टी को झेलना पड़ा।
अब हालात काफी बदल चुके हैं। पिछले चुनाव में उम्मीदवार रहे आरके शर्मा फिलहाल क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर भी नए विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

इसी बीच डॉ. जीराज सिंह यादव ने एक बार फिर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय से वह लगातार क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। लोगों के बीच उनकी मौजूदगी लगातार बनी हुई है और यही वजह है कि उनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है।
मंगलवार को हुए कार्यक्रम में यह साफ दिखाई भी दिया। कार्यक्रम स्थल पर अलग-अलग गांवों से आए लोगों की भीड़ इस बात का संकेत दे रही थी कि डॉ. जीराज सिंह यादव का जनसंपर्क व्यापक है। खास बात यह रही कि वहां केवल एक ही वर्ग के लोग नहीं थे, बल्कि अलग-अलग जातियों और समुदायों के लोग भी मौजूद थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी पहचान केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता की नहीं है, बल्कि एक समाजसेवी के रूप में भी बनी है। कई सामाजिक और जनहित से जुड़े कार्यों के कारण उनकी छवि साफ-सुथरी और जमीन से जुड़े नेता की मानी जाती है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत दावेदार मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस बार पार्टी नेतृत्व पिछले चुनाव की गलती दोहराना नहीं चाहेगा। संगठन ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहेगा जिसकी जमीनी पकड़ मजबूत हो और जो सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चल सके।
मंगलवार को हुए शक्ति प्रदर्शन ने यह जरूर दिखा दिया कि आंवला विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में डॉ. जीराज सिंह यादव की मौजूदगी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। जिस तरह से उनके समर्थकों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, उससे यह संकेत मिल गया कि वह चुनावी तैयारी में अभी से पूरी ताकत के साथ जुट चुके हैं।

दिलचस्प बात यह भी है कि उनके समर्थकों के बीच केवल विधानसभा टिकट की चर्चा ही नहीं हो रही, बल्कि कुछ लोग उन्हें संगठन में भी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की मांग कर रहे हैं। समर्थकों का मानना है कि अगर उन्हें जिले में संगठन की कमान मिलती है तो समाजवादी पार्टी को और मजबूती मिल सकती है।
कुल मिलाकर आंवला में हुआ यह दौरा केवल एक उद्घाटन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए क्षेत्र की राजनीति में कई संकेत सामने आए हैं। एक ओर शिवपाल सिंह यादव ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर क्षेत्र की सियासी नब्ज टटोलने की कोशिश की, तो दूसरी ओर डॉ. जीराज सिंह यादव ने अपने समर्थकों की भीड़ के जरिए यह दिखा दिया कि आंवला की राजनीति में उनकी दावेदारी कितनी मजबूत होती जा रही है।
ऐसे में आने वाले समय में आंवला विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और भी दिलचस्प होने की संभावना है, क्योंकि चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां और दावेदारी की लड़ाई अभी से तेज होती दिखाई दे रही है।





