नीरज सिसौदिया, लखनऊ
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वीरवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों के साथ बड़ी बैठक की। इस बैठक के जरिए उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया। पार्टी के सभी नेताओं को पहले से ही निर्देश दिया गया था कि वे पूरी तैयारी और जरूरी दस्तावेजों के साथ बैठक में पहुंचें, ताकि चुनाव को लेकर कोई ढिलाई न रह जाए। दादरी रैली की शानदार सफलता के बाद यह प्रदेश भर से स्थानीय पदाधिकारियों की यह पहली बैठक थी जिसमें आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया गया।
बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने एक बड़ा फैसला भी सुनाया। उन्होंने साफ कहा कि इस बार किसी भी विधानसभा सीट के लिए पार्टी की टिकट मांगने के लिए कोई आवेदन नहीं लिया जाएगा। इतना ही नहीं, आवेदन के नाम पर लिया जाने वाला कोई शुल्क या बुलेटिन के लिए आर्थिक सहयोग भी नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब आगे की प्रक्रिया पूरी तरह संगठन के स्तर पर तय होगी। पहले सभी पदाधिकारियों के साथ सामूहिक बैठक की गई है, अब जल्द ही जिलेवार बैठकें होंगी। इन बैठकों के बाद हर विधानसभा सीट के लिए प्रभारी घोषित किए जाएंगे और वही प्रभारी आगे चलकर उस सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे।
इस बैठक में बरेली से भी कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इनमें महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, शहर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष हसीव खान, कैंट विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष हरिओम प्रजापति और निवर्तमान जिला महासचिव संजीव यादव जैसे नेता मौजूद रहे। हालांकि जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर अखिलेश यादव ने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने एक बात जरूर साफ कर दी कि जिला अध्यक्ष की घोषणा पार्टी करेगी, लेकिन वह पदाधिकारियों की पसंद के अनुसार नहीं होगी।

बैठक के बाद शहर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष हसीव खान ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी नेताओं को चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक ने पार्टी नेताओं में नई ऊर्जा भर दी है। हसीव खान ने कहा कि सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे और आने वाले चुनाव में जीत हासिल कर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का लक्ष्य पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद पार्टी पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल से भी मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद शानदार और उत्साहवर्धक बताया।
अखिलेश यादव ने पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात के बाद एक प्रेस वार्ता भी की। इस दौरान उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच मिलीभगत है और उनकी पार्टी ऐसी साजिशों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में “पीडीए सरकार” बनाना चाहती है, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ लेकर सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि 2024 के चुनाव में इन वर्गों ने मिलकर पीडीए की आवाज बुलंद की थी और अब आने वाले समय में भी यही ताकत सरकार बनाने का आधार बनेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी और राज्य में सामाजिक न्याय स्थापित करेगी।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जैसे ही दूसरे राज्यों के चुनाव खत्म होंगे, भाजपा की पूरी ताकत उत्तर प्रदेश पर केंद्रित हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने और जमीन पर मजबूत पकड़ बनाने की अपील की।
अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के ‘अच्छे दिन’ के वादे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है, लेकिन अब जनता को यह समझ में आ गया है और जल्द ही हालात बदलेंगे।
पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने चुनाव के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब चुनाव की घोषणा होती है, तो अधिकारियों से निष्पक्ष तरीके से काम करने की उम्मीद की जाती है। लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे बड़े अधिकारियों को हटा दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों में समाजवादी पार्टी की शिकायतों के बावजूद इतने अधिकारियों को हटाया गया था?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कई अधिकारी भाजपा के एजेंट की तरह काम करते रहे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है, जिससे कई अधिकारी भी असंतुष्ट हैं और दबाव में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कानपुर में हाल ही में सामने आए किडनी से जुड़े एक मामले का भी जिक्र किया और इशारों-इशारों में भाजपा से उसके संबंध होने की बात कही, हालांकि उन्होंने इस पर ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं बताया।
किसानों के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ है। डीजल, पेट्रोल, खाद और बीज की बढ़ती कीमतों के कारण किसान परेशान हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे भाजपा से कोई उम्मीद न रखें, क्योंकि समाजवादी पार्टी ही उन्हें बेहतर दाम और मुआवजा दिला सकती है।
दादरी में हाल ही में हुई पार्टी की रैली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां मिले समर्थन के बाद सरकार की भाषा बदल गई है। उन्होंने दावा किया कि उस रैली ने भाजपा को हिलाकर रख दिया है।

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में शुरू हुई योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अब भाजपा यह दावा कर रही है कि मेट्रो परियोजना उसने शुरू की, जबकि सच्चाई जनता जानती है।
अंत में उन्होंने राज्य में बढ़ती अवैध गतिविधियों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से ऐसी गतिविधियां बढ़ गई हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब तो इतना ‘धुआं’ है कि इस पर ओटीटी प्लेटफॉर्म भी सीरीज बनाने लगेंगे।
इस तरह लखनऊ में हुई यह बैठक और उसके बाद की प्रेस वार्ता साफ संकेत देती है कि समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है और आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।





