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बागपत के लाल और बरेली जिले की फरीदपुर तहसील के वरिष्ठ सपा नेता चंद्रसेन सागर के दामाद आईपीएस सुधांशु धामा नवाजे गए राष्ट्रपति वीरता पदक से, फरीदपुर और बागपत में खुशी की लहर, कैसे एक शिक्षक का बेटा छा गया बुलंदियों के आसमान पर

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नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली

बागपत की माटी में पले-बढ़े और वरिष्ठ समाजवादी नेता चंद्रसेन सागर के दामाद आईपीएस अधिकारी सुधांशु धामा के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश ने सलाम किया है। जम्मू-कश्मीर के गांदेरबल जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर तैनात सुधांशु धामा को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित वीरता पदक (Medal for Gallantry) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें अरुणाचल प्रदेश में पुलिस सेवा के दौरान असाधारण साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए दिया गया है।

सुधांशु धामा की इस उपलब्धि की खबर सामने आते ही बागपत से लेकर बरेली के फरीदपुर तक खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और समर्थकों ने उन्हें बधाई दी। फरीदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर ने भी अपने दामाद सुधांशु धामा को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए शुभकामनाएं दीं और इसे पूरे परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया।

2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं सुधांशु धामा

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सांकरौद गांव के रहने वाले सुधांशु धामा 2016 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और एजीएमयूटी कैडर से संबंधित हैं। उनके पिता राजपाल सिंह सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। शिक्षक परिवार से आने वाले सुधांशु ने कड़ी मेहनत के दम पर देश की प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस सेवा में स्थान बनाया और इसके बाद विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपनी कार्यशैली और साहस से अलग पहचान बनाई।

सुधांशु धामा ने दिल्ली पुलिस और अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। दिल्ली में वह बाहरी दिल्ली के **अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Additional DCP) के पद पर तैनात रहे। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के मुख्यालय बोमडिला में पुलिस अधीक्षक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के दौरान किए गए उल्लेखनीय कार्यों और असाधारण साहस के लिए ही उन्हें अब वीरता पदक के लिए चुना गया है।

वर्तमान में सुधांशु धामा जम्मू-कश्मीर के गांदेरबल जिले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं। संवेदनशील क्षेत्र में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नवजात को सात घंटे में किडनैपर के चंगुल से कराया था मुक्त

सुधांशु धामा की कार्यशैली का अंदाजा उनके दिल्ली पुलिस में कार्यकाल के दौरान किए गए कई उल्लेखनीय कार्यों से लगाया जा सकता है। बाहरी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने एक नवजात बच्चे को अपहरणकर्ता के चंगुल से महज सात घंटे के भीतर सुरक्षित मुक्त कराया था।
नवजात बच्चे के अपहरण की घटना बेहद संवेदनशील थी। पुलिस के सामने बच्चे को सुरक्षित बरामद करने और आरोपी तक पहुंचने की चुनौती थी। धामा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई की और महज सात घंटे में नवजात को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस कार्रवाई ने उन्हें चर्चा में ला दिया था।
उनके कार्यकाल से जुड़ा एक और मानवीय पहलू भी सामने आया था। कोरोना संक्रमण के कठिन दौर में दिल्ली के एक अस्पताल में मरीजों के सामने ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया था। उस समय सुधांशु धामा ने पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी से आगे बढ़कर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया और ऐसे अस्पताल में 40 ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने में मदद की, जहां मरीज जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस पहल की भी काफी सराहना हुई थी।

अरुणाचल प्रदेश में दिखाई बहादुरी, अब मिला राष्ट्रीय सम्मान

सुधांशु धामा को मिला वीरता पदक उनके अरुणाचल प्रदेश में सेवा के दौरान दिखाए गए असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है। वीरता पदक पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं के उन कर्मियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने जीवन और संपत्ति की रक्षा, अपराध को रोकने या अपराधियों को पकड़ने के दौरान उल्लेखनीय साहस का प्रदर्शन किया हो।

 


स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर केंद्र सरकार ने पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा और सुधार सेवाओं से जुड़े कर्मियों के लिए विभिन्न पदकों की घोषणा की। इस वर्ष कुल 301 वीरता पदक प्रदान किए गए हैं। इनमें 272 पदक पुलिसकर्मियों और 29 पदक अग्निशमन सेवा के कर्मियों को दिए गए हैं।
सुधांशु धामा का नाम वीरता पदक पाने वाले अधिकारियों में शामिल होना उनके अब तक के सेवा रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खास तौर पर अरुणाचल प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक और रणनीतिक क्षेत्र में उनके कार्यकाल को देखते हुए इस सम्मान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने दी बधाई

सुधांशु धामा को वीरता पदक मिलने पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उपमुख्यमंत्री चाउना मीन ने भी उन्हें बधाई दी।

पेमा खांडू, मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश

चाउना मीन ने सोशल मीडिया पर सुधांशु धामा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके असाधारण साहस, समर्पण और कर्तव्य के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की पहचान है।
अरुणाचल प्रदेश में उनके कार्यकाल को याद करते हुए वहां के लोगों और पुलिस विभाग से जुड़े लोगों ने भी इस सम्मान पर प्रसन्नता जताई। धामा का नाम उन अधिकारियों में शामिल है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी कार्यक्षमता और साहस का परिचय दिया।

आकृति सागर और सुधांशु धामा।

आईएएस अधिकारी आकृति सागर से हुआ है विवाह

सुधांशु धामा का संबंध बरेली के फरीदपुर क्षेत्र से भी बेहद खास है। उनका विवाह वरिष्ठ समाजवादी नेता और फरीदपुर विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार चंद्रसेन सागर की पुत्री आकृति सागर से हुआ है। आकृति सागर भी 2016 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं।
इस तरह एक ही परिवार में आईपीएस और आईएएस जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों की मौजूदगी भी क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। सुधांशु धामा और आकृति सागर दोनों ही प्रशासनिक सेवा के माध्यम से देश की सेवा कर रहे हैं।

चंद्रसेन सागर

फरीदपुर और बागपत में समर्थकों ने जताई खुशी

सुधांशु धामा को वीरता पदक मिलने की खबर के बाद बागपत और फरीदपुर में उनके परिचितों और शुभचिंतकों में उत्साह है। बागपत के सांकरौद गांव के लोगों के लिए यह उपलब्धि खास मायने रखती है, क्योंकि गांव के एक बेटे ने देश की प्रतिष्ठित पुलिस सेवा में अपनी पहचान बनाने के बाद वीरता के लिए राष्ट्रीय सम्मान हासिल किया है।
फरीदपुर में भी इस उपलब्धि को चंद्रसेन सागर के परिवार के लिए गौरव के रूप में देखा जा रहा है। चंद्रसेन सागर ने अपने दामाद को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सुधांशु धामा की उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करेगी।
बागपत की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा तक पहुंचे सुधांशु धामा की कहानी केवल एक अधिकारी को मिले सम्मान की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस मेहनत, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल भी है, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। स्वतंत्रता दिवस पर मिला वीरता पदक उनके सेवा जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है और उनके गृह क्षेत्र बागपत से लेकर ससुराल पक्ष के क्षेत्र फरीदपुर तक लोग इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

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