नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट की दावेदारी भले ही कई नेताओं के बीच हो, लेकिन संगठन खड़ा करने के मामले में दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके चंद्रसेन सागर ने बाकी दावेदारों से अलग अपनी मजबूत जमीन तैयार कर ली है। चंद्रसेन सागर ने चुनाव से काफी पहले ही व्यक्तिगत स्तर पर ऐसा जमीनी ढांचा खड़ा कर लिया है, जिसे उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जा रहा है। दावा है कि उन्होंने फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के 410 बूथों में से 300 बूथों पर बूथ कमेटियां गठित कर दी हैं और इन कमेटियों के जरिए 3300 से अधिक लोगों को सीधे संगठनात्मक जिम्मेदारी से जोड़ा है।
चंद्रसेन सागर की तैयारियों की खास बात यह है कि उन्होंने इसे महज चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बूथ से लेकर जोन और सेक्टर स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। प्रत्येक बूथ कमेटी में एक प्रभारी, एक सह प्रभारी और नौ सदस्यों को शामिल किया गया है। इस तरह प्रत्येक बूथ पर 11 लोगों की टीम तैयार की गई है। 300 बूथों पर गठित कमेटियों में कुल 3300 लोग शामिल हैं। यानी चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही चंद्रसेन सागर ने फरीदपुर के बड़े हिस्से में अपना व्यक्तिगत संगठनात्मक नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 12 जोन बनाए गए हैं और चंद्रसेन सागर ने सभी जोनों के लिए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। भुता में रवि कुमार गंगवार, अठाना में मुकेश कुमार जाटव, बुधौली में मुनेंद्र पाल मौर्य, मेहतरपुर करोड़ में विजय सागर, बाहनपुर में कप्तान सिंह यादव, लौंगपुर में रतनपाल, भगवंतापुर में अंसार हुसैन, टिशुआ में फहीम खान, पचौमी में अखिलेश कुमार शर्मा, शिवपुरी में जबर सिंह यादव, फरीदपुर नगर प्रथम में समीर वर्मा और फरीदपुर नगर द्वितीय में लाल सिंह यादव को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 25 सेक्टर प्रभारी भी बनाए गए हैं।
पीडीए समीकरण के साथ संगठन की बुनियाद
चंद्रसेन सागर की संगठनात्मक रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक समीकरण है। बूथ कमेटियों से लेकर जोन और सेक्टर स्तर तक जिम्मेदारियां तय करते समय पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए समीकरण को ध्यान में रखा गया है। यही वजह है कि उनकी टीम में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है।
12 जोन प्रभारियों में कुर्मी, मौर्य, जाटव, ब्राह्मण, मुस्लिम अंसारी, मुस्लिम पठान, सुनार और यादव समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इनमें तीन यादव, दो जाटव और अन्य प्रमुख सामाजिक समूहों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसी तरह 25 सेक्टर प्रभारियों की सूची में जाटव, कुर्मी, यादव, मुराव-मौर्य, कश्यप, कुम्हार, पाल-गड़रिया, गूजर, नाई, तेली, अग्रवाल और मुस्लिम समाज के लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन में सामाजिक विविधता को इस तरह जगह देना महज प्रतिनिधित्व का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे चुनावी रणनीति भी दिखाई देती है। फरीदपुर जैसी विधानसभा सीट पर अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच सीधा संपर्क बनाए रखने के लिए बूथ स्तर पर स्थानीय चेहरों को जिम्मेदारी देना किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रसेन सागर ने इसी रणनीति को व्यक्तिगत स्तर पर लागू करने का प्रयास किया है।
टिकट के दावेदारों में संगठनात्मक बढ़त
समाजवादी पार्टी के टिकट के लिए फरीदपुर में कई नेता सक्रिय हैं और सभी अपने-अपने स्तर पर जनसंपर्क तथा राजनीतिक गतिविधियों के जरिए पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचने में जुटे हैं। लेकिन चंद्रसेन सागर की रणनीति उन्हें इस मामले में अलग खड़ा करती है कि उन्होंने टिकट मिलने का इंतजार किए बिना संगठनात्मक तैयारी शुरू कर दी।
उनकी तैयारियों से यह संदेश जाता है कि वह केवल टिकट के दावेदार के रूप में नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं। 300 बूथों पर 3300 लोगों को जिम्मेदारी देना किसी सामान्य जनसंपर्क अभियान से अलग है। इसका सीधा मतलब है कि चंद्रसेन सागर अपने समर्थकों का ऐसा ढांचा तैयार कर रहे हैं जो चुनाव के दौरान मतदाताओं तक लगातार संपर्क बनाए रखने में भूमिका निभा सके।
राजनीतिक तौर पर यह तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में बड़े नेताओं की सभाओं और प्रचार अभियानों के साथ-साथ बूथ स्तर का संगठन ही चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारता है। जिस उम्मीदवार के पास प्रत्येक बूथ पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम होती है, उसके लिए मतदाताओं तक पहुंच बनाना और चुनावी संदेश को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
भाजपा की ताकत को उसी के मैदान में चुनौती देने की तैयारी
फरीदपुर में चंद्रसेन सागर की रणनीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने उस क्षेत्र में संगठन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने की कोशिश की है, जहां भाजपा की चुनावी ताकत लंबे समय से उसके मजबूत संगठन को माना जाता है। भाजपा की बूथ समितियों और जमीनी नेटवर्क को उसकी चुनावी मशीनरी का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में चंद्रसेन सागर ने व्यक्तिगत स्तर पर बूथ, सेक्टर और जोन का जो ढांचा तैयार किया है, वह सीधे तौर पर भाजपा की इसी ताकत का मुकाबला करने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है।
चंद्रसेन सागर के समर्थकों का मानना है कि उनका करीब पांच दशक का राजनीतिक अनुभव इस संगठन निर्माण में काम आ रहा है। लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उन्हें गांवों, स्थानीय नेताओं और सामाजिक समूहों की राजनीतिक भूमिका की समझ है। यही वजह है कि उन्होंने संगठन में ऊपर से नीचे तक जिम्मेदारियां बांटने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले लोगों को साथ जोड़ने पर जोर दिया है।
टिकट से पहले ही चुनावी तैयारी पूरी करने का संदेश
चंद्रसेन सागर की मौजूदा गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि वह फरीदपुर विधानसभा सीट पर टिकट की घोषणा से पहले ही अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। 410 बूथों में से 300 बूथों पर कमेटियों का गठन उनकी तैयारी के बड़े दायरे को दर्शाता है। यदि शेष बूथों पर भी इसी तरह कमेटियां गठित होती हैं तो विधानसभा क्षेत्र का लगभग पूरा चुनावी ढांचा उनके नेटवर्क से जुड़ सकता है।
हालांकि अंतिम टिकट का फैसला समाजवादी पार्टी नेतृत्व को करना है और चुनाव में संगठन के साथ-साथ उम्मीदवार की स्वीकार्यता, पार्टी की रणनीति, स्थानीय समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। लेकिन फिलहाल संगठनात्मक तैयारी के मोर्चे पर चंद्रसेन सागर ने अपने लिए एक मजबूत आधार तैयार कर लिया है।
फरीदपुर के चुनावी रण में अभी काफी समय बाकी है, लेकिन चंद्रसेन सागर की बूथ से लेकर जोन और सेक्टर तक की तैयारी ने यह साफ कर दिया है कि वह सिर्फ टिकट मांगने वाले दावेदार नहीं रहना चाहते। वह खुद को ऐसे उम्मीदवार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसके पास चुनाव लड़ने के लिए पहले से तैयार जमीनी ढांचा मौजूद हो। आने वाले समय में समाजवादी पार्टी नेतृत्व टिकट के दावेदारों का आकलन करते समय इस संगठनात्मक ताकत को किस नजर से देखता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि फरीदपुर में चंद्रसेन सागर ने संगठन को ही अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बना लिया है।




