नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी में बरेली कैंट सीट पर टिकट की दावेदारी के बीच मंगलवार को लखनऊ में हुई एक मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कैंट सीट से टिकट के प्रबल दावेदार डॉ. अनीस बेग ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। खास बात यह रही कि यह मुलाकात पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की मौजूदगी में हुई। धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कार्यक्रम के दौरान हुई इस मुलाकात को कैंट सीट की सियासत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

लखनऊ में धर्मेंद्र कश्यप और कीर्ति कश्यप के सपा में शामिल होने के कार्यक्रम में बरेली के कई नेता पहुंचे थे, लेकिन सभी को अखिलेश यादव से व्यक्तिगत मुलाकात का अवसर नहीं मिला। ऐसे में डॉ. अनीस बेग की पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है। इससे यह संदेश गया है कि अनीस बेग पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखने और उसे मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हैं। हालांकि, इस मुलाकात को टिकट की सहमति या उम्मीदवारी तय होने का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।

डॉ. अनीस बेग लंबे समय से बरेली कैंट सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। सपा के चिकित्सा प्रकोष्ठ से जुड़े रहने के साथ ही वह स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। पीडीए की राजनीति को आगे बढ़ाने की उनकी कोशिशें भी उनकी दावेदारी का हिस्सा हैं। अब अखिलेश यादव से सीधी मुलाकात ने उनके समर्थकों को नया राजनीतिक संकेत दिया है और टिकट की दौड़ में उनकी सक्रियता फिर चर्चा में आ गई है।
इस घटनाक्रम में धर्मेंद्र कश्यप की मौजूदगी के भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का बरेली और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके साथ अखिलेश यादव से मुलाकात होना अनीस बेग के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। धर्मेंद्र कश्यप का सपा में आना पार्टी के स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उनकी मौजूदगी को अनीस बेग की उम्मीदवारी के समर्थन के रूप में देखना अभी अटकल ही होगा। यह स्पष्ट नहीं है कि धर्मेंद्र कश्यप ने कैंट सीट पर अनीस बेग के नाम की पैरवी की या नहीं।

कैंट सीट पर सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा उम्मीदवार चुनने की है जो पार्टी के परंपरागत वोट बैंक के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों में भी स्वीकार्यता बना सके। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या और पीडीए के सामाजिक समीकरण टिकट चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अनीस बेग अपनी राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक संपर्कों के जरिए इसी समीकरण में अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
लखनऊ की मुलाकात ने टिकट के दूसरे दावेदारों के बीच भी हलचल बढ़ाने की जमीन तैयार कर दी है। सपा में टिकट की दावेदारी केवल स्थानीय संगठन में सक्रियता या समर्थकों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि पार्टी नेतृत्व तक पहुंच, राजनीतिक समीकरण और चुनाव जिताने की संभावित क्षमता भी अहम होती है। ऐसे में अखिलेश यादव से व्यक्तिगत मुलाकात का अवसर मिलना अनीस बेग के लिए अपनी बात सीधे नेतृत्व तक पहुंचाने का मौका था।

फिलहाल, इस मुलाकात से इतना जरूर स्पष्ट हुआ है कि डॉ. अनीस बेग कैंट सीट की दावेदारी को लेकर गंभीर हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। धर्मेंद्र कश्यप की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि लखनऊ की यह मुलाकात आने वाले दिनों में कैंट सीट के टिकट समीकरणों पर कितना असर डालती है और क्या अनीस बेग की सक्रियता उन्हें दावेदारों की कतार में और आगे ले जाती है।




