नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी में फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र की कमान संभाल रहे बलराम यादव ने एक ही सम्भावित सपा के प्रत्याशी के पक्ष में आयोजित कथित कार्यकर्ता सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को फोन करके बुलाया, मिठाई बांटी गई और उपहार वितरित किए गए, लेकिन टिकट के दूसरे दावेदारों को इस आयोजन से दूर रखा गया। इस घटनाक्रम से टिकट के दूसरे दावेदारों में जबरदस्त नाराजगी है। पार्टी के मजबूत दावेदार चंद्रसेन सागर ने तो बलराम यादव को खुला खत लिखकर उनकी भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या फरीदपुर में सपा का संगठन किसी एक दावेदार की निजी जागीर बन गया है और क्या पार्टी नेतृत्व इस कथित गुटबाजी पर कोई कार्रवाई करेगा?
विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन फरीदपुर में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति ने अभी से चुनावी रंग दिखाना शुरू कर दिया है। टिकट के दावेदार अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, लेकिन संगठन की निष्पक्षता पर उठे सवालों ने पूरी स्थिति को विवादित बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, दीपावली के मौके पर आयोजित कार्यक्रम इसकी बड़ी बानगी बनकर सामने आया। कार्यक्रम का नाम कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया, केवल एक सम्भावित प्रत्याशी आयोजन कर्ता को छोड़कर टिकट के दूसरे प्रमुख दावेदार इसमें नजर नहीं आए। यही वजह है कि इस आयोजन को सामान्य दीपावली मिलन समारोह के बजाय एक संभावित प्रत्याशी के पक्ष में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
सवाल यह भी है कि अगर कार्यक्रम वास्तव में समाजवादी पार्टी के संगठन की ओर से आयोजित किया गया था तो उसमें सभी संभावित प्रत्याशियों को क्यों नहीं बुलाया गया? विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष का दायित्व किसी एक दावेदार के लिए माहौल बनाना नहीं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को साथ लेकर चलना है। क्या बलराम यादव इस जिम्मेदारी को भूल गए? क्या उन्हें यह अधिकार है कि वह संगठन के मंच का इस्तेमाल किसी एक प्रत्याशी की दावेदारी मजबूत करने के लिए करें? अगर एक सम्भावित प्रत्याशी का निजी कार्यक्रम था तो उसे संगठनात्मक कार्यकर्ता सम्मेलन का रूप देने की जरूरत क्यों पड़ी?
इस पूरे विवाद में सबसे मुखर विरोध चंद्रसेन सागर की ओर से सामने आया है। फरीदपुर विधानसभा सीट से सपा के मजबूत दावेदार माने जाने वाले चंद्रसेन सागर ने बलराम यादव के नाम खुला खत लिखकर उनके रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सवाल किया है कि यदि किसी एक संभावित प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए बैठक बुलाई गई थी तो उसमें मिठाई बांटने और कार्यकर्ताओं को फोन करके बुलाने का क्या औचित्य था? अगर दीपावली की खुशी साझा करना ही मकसद था तो पार्टी के सभी संभावित प्रत्याशियों को बुलाकर मिठाई खिलाई जाती और उन्हें भी सम्मान दिया जाता।
चंद्रसेन सागर ने अपने पत्र में फरीदपुर की राजनीतिक और सामाजिक परंपरा का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि वह वर्ष 1977 से फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता को जानते हैं। यहां की जनता ईमानदार है और लालची नहीं है। उन्होंने अपने भाई के चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके भाई पांच बार विधायक चुने गए और चुनाव प्रचार का खर्च तक जनता उठाती थी। कई बार उनके भाई के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं होते थे, लेकिन जनता स्वयं आगे आकर प्रचार में सहयोग करती थी। चंद्रसेन सागर का यह उदाहरण केवल पुराने चुनावों की याद दिलाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके जरिए उन्होंने वर्तमान राजनीति में धनबल के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल खड़ा किया है।
उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि बलराम यादव के इस कदम से आयोजन कर्ता को छोड़कर बाकी सभी संभावित प्रत्याशियों के दिलों में अंतर पैदा हो गया है। उनका कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष पूरे क्षेत्र के संगठन का अध्यक्ष होता है और उसे सभी दावेदारों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे दलों के नेताओं ने भी दीपावली पर मिठाई खिलाई, लेकिन सपा के अपने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका ने फरीदपुर की जनता के बीच तरह-तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरीदपुर में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका को लेकर उठा विवाद समाजवादी पार्टी के लिए चुनाव से पहले बड़ी मुश्किल बन सकता है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी संभावित प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को एकजुट रखने की है। टिकट तो किसी एक व्यक्ति को ही मिलेगा, लेकिन उस प्रत्याशी को चुनाव जिताने के लिए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताकत चाहिए होगी।
पार्टी के जिला अध्यक्ष, आला नेताओं के सामने यह बात कही जाएगी। क्या विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष को पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और संभावित प्रत्याशियों के साथ समान व्यवहार रखना चाहिये। चन्द्रसेन सागर ने विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष को लिखा है कि जब पार्टी के आदेश पर बूथ एजेंट बनाए गये थे तब भी उन्होंने 410 बूथों के बूथ एजेंट नियुक्त कर दिए थे। उस लिस्ट पर विधान सभा अध्यक्ष के हस्ताक्षर भी हैं जो उनके पास मौजूद है।
उनको यह भी जानकारी है कि किस किस सम्भावित प्रत्याशी ने कितने बूथ एजेंट बनाए और कितनी पी डी ए सभायें / पंचायत की तथा एस आई आर में किस किस सम्भावित प्रत्याशी ने वोट बनवाए और चन्द्र सेन सागर ने पूछा है कि समीक्षा बैठक में आप भी शामिल थे सब कुछ आपकी जानकारी में है तो आप ऐसा क्यों कर रहे हैं।
2027 में हम सबको राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष उसको टिकट देंगे जिन्होंने पार्टी में अच्छा काम किया हो, कोई धन बल पर टिकट नही ले सकता।
फरीदपुर में फिलहाल विवाद एक दीपावली कार्यक्रम से शुरू हुआ है, लेकिन इसके राजनीतिक परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद सभी दावेदारों और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने का होता है, न कि किसी एक संभावित प्रत्याशी के पक्ष में संगठन को खड़ा करने का। बलराम यादव पर लगे आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन चंद्रसेन सागर के खुले खत ने पार्टी नेतृत्व के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है। सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी इस विवाद को समय रहते सुलझाकर संगठन की एकजुटता बचा पाएगी या फिर टिकट की लड़ाई चुनाव से पहले ही फरीदपुर में पार्टी की चुनावी जमीन कमजोर कर देगी?




