Share nowनीरज सिसौदिया, बरेली किसी शायर ने कभी कहा था कि “दुश्मनी करो मगर याद रहे कि दोस्ती हो जाए तो शर्मिंदा न होना पड़े.” निश्चित तौर पर आज के सियासी परिवेश में यह सीख बेहद कारगर साबित हो सकती है. खासतौर पर तब जब दो दोस्त दुश्मन बने हों. ऐसे दुश्मनों के बीच दोस्ती […]
Share nowनीरज सिसौदिया, बरेली बिजली संकट के कारण व्यापारियों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है. आए दिन अघोषित बिजली कटौती होने के कारण बिजली आधारित कारोबार तो पूरी तरह से चौपट हो जाते हैं. दिन में कभी भी किसी भी इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है. ऐसे में पहले से ही कोरोना […]
Share nowनीरज सिसौदिया, नई दिल्ली लखनऊ के विशाल सभा स्थल में गुरुवार को जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती मंच पर पहुंचीं, तो उनके चेहरे पर वही सधी हुई दृढ़ता थी जिसके लिए वे जानी जाती हैं। लेकिन उनके भाषण के बीच-बीच में जो शब्द झलक रहे थे, वे किसी आत्मविश्वासी नेता के […]