नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम इन दिनों भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। समाजवादी पार्टी के शहर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी और वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल ने इस बार करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया है। यह भ्रष्टाचार आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर किया जा रहा है। हर साल 30 लाख रुपए एक निजी कंपनी को दिए जा रहे हैं। पिछले दस वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है। राजेश अग्रवाल ने मामले की जांच कर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की है। उन्होंने शहर वासियों के साथ नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य को इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा है।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम सिर्फ कागजों में आवारा पशुओं को पकड़ रहा है जबकि पूरे शहर के लोग इनके आतंक से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों से प्रतिवर्ष 30 लाख रुपये आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं।

पिछले दस वर्षों से इस मद में भुगतान किया जा रहा है लेकिन शहर में कुत्तों का आतंक कम नहीं हो रहा है। पिछले दस वर्षों में नगर निगम आधिकारिक तौर पर कुत्तों की नसबंदी पर तीन करोड़ रुपये खर्च कर चुका है इसके बावजूद कुत्तों का आतंक खत्म नहीं हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह भ्रष्टाचार है। यह भुगतान सोसाइटी फॉर ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर को किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से इस काले खेल को अंजाम दिया गया है। इस फर्म को दिए गए भुगतान की जांच होनी चाहिए। इसकी शिकायत मंडलायुक्त और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी की जा रही है। नगर निगम के अधिकारी सिर्फ भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
ज्ञापन देने वालों में राजेश अग्रवाल के अलावा ट्रेड यूनियन के संजीव मल्होत्रा, अरुण शर्मा, शिवनाथ चौबे, राम राजीव मोहन, अरविंद सैमुअल, संजय कंडारी, गुलशन नंदा, मुकेश खटवानी, जीएस भिंडर, राज नारायण, मोहम्मद शकील, सुधीर गुप्ता, सचिन यादव, अशोक, अमृतपाल सिंह, नंदन मनराल, अजीत अग्रवाल और मोहम्मद फैजल शामिल थे।





