नीरज सिसौदिया, बरेली
सावन का महीना आते ही हर ओर भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है। सड़कें “बोल बम” के जयकारों से गूंज उठती हैं। कांवड़िए दूर-दूर से पैदल यात्रा कर गंगाजल लेकर लौटते हैं और शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस बार बरेली की कैंट विधानसभा में सावन की इस पवित्रता को और भी खास बना दिया डॉ. अनीस बेग और समाजवादी पार्टी के पीडीए अभियान ने।
सोमवार को सरन हॉस्पिटल के पास का नजारा ऐसा था जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। आसमान से गिरते फूलों की बौछार के बीच कांवड़ यात्रा पर निकले शिवभक्तों का भव्य स्वागत हो रहा था। चारों ओर “हर हर महादेव” और “जय भोले” के जयकारों के बीच जब डॉ. अनीस बेग ने स्वयं शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा की, तो वहाँ मौजूद हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और दिल में भावुकता का सैलाब उमड़ पड़ा।

यह केवल स्वागत नहीं था, यह भाईचारे और मोहब्बत का संदेश था। डॉ. अनीस बेग और उनके साथियों ने कांवड़ियों को फल, पानी और जलपान उपलब्ध कराते हुए कहा कि सावन का महीना हमें न केवल भक्ति, बल्कि समाज में मोहब्बत और सौहार्द्र का पैगाम देता है।
उन्होंने हाथ जोड़कर कहा,
“हिंदुस्तान जिंदाबाद, हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद, नफरतें हारेंगी और मोहब्बतें जीतेंगी।”

डॉ. अनीस बेग ने शिवभक्तों से भी संवाद किया और उन्हें यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा में सेवा करना भी पुण्य का काम है और यह सेवा किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि इंसानियत की है।

इस मौके पर अनीस बेग के साथियों का उत्साह देखते ही बनता था। हर कोई श्रद्धा और जोश के साथ शिवभक्तों की सेवा में लगा था। कार्यक्रम में परवेज यार खान, सलमान शम्सी, अब्दुल जब्बार, ईशरफुल खान, आदित्य कश्यप, गौरव, सनी, नसीर अहमद, नितिन बाल्मीकि, डालचंद्र बाल्मीकि, निषाद अहमद, रजा, खुर्शीद आलम, नवीन सिंह, दानिश नूरी, डॉ. सुदीप सरन, सकूर, अरमान खान और रश्मी खान समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

डॉ. अनीस बेग पहले भी सावन माह की शुरुआत में शिवभक्तों का इस तरह स्वागत कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब समाज के लोग एक-दूसरे के त्यौहारों और आस्थाओं का सम्मान करते हैं, तभी देश मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वालों को इस तरह के कार्यों से जवाब देना चाहिए कि मोहब्बत ही जीत सकती है।

बरेली कैंट में यह दृश्य उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बन गया, जो मानते हैं कि धर्म सिर्फ जोड़ता है, बांटता नहीं। फूलों की बौछार और कांवड़ियों के चेहरे की खुशी ने यह साबित कर दिया कि अगर समाज में ऐसे प्रयास लगातार होते रहें तो सचमुच एक दिन नफरतें हार जाएंगी और मोहब्बत जीत जाएगी।





