नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली
धोबी समाज को पहली बार पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। सर्वजन आम पार्टी (एसएपी) ने घोषणा की है कि वह उत्तर प्रदेश के आगामी पंचायत चुनावों में पूरे प्रदेश में प्रत्याशी उतारेगी और इसमें धोबी समाज के लोकप्रिय एवं जुझारू नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि अब तक मुख्यधारा की राजनीति ने धोबी समाज को दरकिनार रखा, लेकिन अब बदलाव का समय आ गया है।
सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने एक विशेष बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी की तैयारी पंचायत स्तर पर तीन साल से जारी है और अब संगठन पूरी मजबूती के साथ खड़ा हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमने प्रदेश के 56 जिलों में संगठन खड़ा कर लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, मुरादाबाद, आगरा, एटा, कासगंज और अलीगढ़ जैसे जिलों में हमारी स्थिति बेहद मजबूत है। पंचायत चुनाव में हर सीट पर हमारा प्रत्याशी खड़ा होगा। खासकर धोबी समाज के ऐसे नेताओं को टिकट दिया जाएगा, जिन्हें अब तक केवल उनकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण बड़े दलों ने नजरअंदाज किया था।” खास तौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित नेताओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है।
सर्वजन आम पार्टी (एसएपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने एक विशेष बातचीत में बताया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अगले साल होने जा रहे पंचायत चुनाव में प्रदेश भर में उम्मीदवार उतारने जा रही है। इसमें धोबी समाज के उन नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं, इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं और जीतने में सक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल पहले जब पार्टी का गठन किया गया था तभी से हमारा पहला लक्ष्य उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव ही थे।
पंचायत चुनाव से विधानसभा चुनाव की ओर
जयप्रकाश भास्कर ने कहा कि पंचायत चुनाव पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल होंगे। उनका दावा है कि पंचायत चुनाव में समाज के नेताओं को मौका देने से एसएपी न केवल धोबी समाज बल्कि पूरे दलित वर्ग का भरोसा जीतने में सफल होगी।
उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी उस राजनीतिक शून्य को भर रही है जिसे वर्षों से तमाम दलों ने धोबी समाज की उपेक्षा करके पैदा किया था। इस बार कोई भी नेता वंचित नहीं रहेगा। पंचायत चुनाव से विधानसभा चुनाव तक हम अपने समाज को निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।”
हमारी जिला ईकाई पूरी मजबूती से काम कर रही है। बरेली, मुरादाबाद, आगरा, एटा, कासगंज, अलीगढ़ सहित लगभग पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हमारी स्थिति बेहद मजबूत है। हमने अपने धोबी समाज को एकजुट करने का काम किया है जिसका परिणाम आगामी पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगा। इसे लेकर हम अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितम्बर के पहले सप्ताह में पूरे प्रदेश के जिला अध्यक्षों सहित प्रदेश एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में संगठन के विस्तार और पंचायत चुनाव पर विस्तार से मंथन किया किया जाएगा। इस बार धोबी समाज का कोई भी नेता वंचित नहीं रहेगा। सभी को मौका दिया जाएगा। पंचायत चुनाव के नतीजों के आधार पर ही आगामी विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
धोबी समाज का प्रतिनिधित्व क्यों अहम?
धोबी समाज उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जातियों में आता है और राज्य की सामाजिक संरचना में इनकी संख्या उल्लेखनीय है।
2011 की जनगणना के अनुसार, यूपी की कुल अनुसूचित जाति (SC) आबादी लगभग 21% है।
धोबी समाज इस SC आबादी का करीब 5–6% हिस्सा माना जाता है। जिनमें से सर्वाधिक आबादी पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में पाई जाती है। बरेली, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, कासगंज, एटा और बदायूं जैसे जिलों में धोबी समाज की संख्या प्रभावी है और पंचायत स्तर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
राजनीति में धोबी समाज अब तक उपेक्षित रहा है। बड़े दलों ने प्रायः उन्हें टिकट नहीं दिए, जिसके कारण समाज के नेता स्थानीय स्तर तक सीमित रह गए। भास्कर मानते हैं कि यही वजह है कि धोबी समाज का एकजुट राजनीतिक चेहरा अब तक सामने नहीं आ सका।
इतिहास में धोबी समाज का योगदान
धोबी समाज केवल सामाजिक संरचना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश के स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधारों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: कई धोबी नेताओं ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया। स्थानीय स्तर पर उनके घर आंदोलनकारियों के ठिकाने बने।
सामाजिक सुधार: धोबी समाज ने सदियों से स्वच्छता और समाज सेवा को अपना दायित्व माना है। यह समुदाय महात्मा गांधी के “स्वच्छता आंदोलन” से भी सीधे तौर पर जुड़ा रहा।
शिक्षा और जागरूकता: स्वतंत्रता के बाद धोबी समाज ने शिक्षा की दिशा में संघर्ष किया और धीरे-धीरे राजनीति, समाज सेवा व सरकारी नौकरियों में अपनी पहचान बनाई।
जयप्रकाश भास्कर मानते हैं कि यह ऐतिहासिक योगदान राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हकदार है। उन्होंने कहा, “धोबी समाज को हमेशा मेहनतकश और ईमानदार समुदाय माना गया है। आज जब पंचायत से लेकर विधानसभा तक लोकतंत्र मजबूत हो रहा है, तो यह जरूरी है कि हमारे समाज के लोगों को भी बराबरी का हक मिले।”





