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फिल्म ‘धुरंधर 2’ पर बवाल: ‘बरेली के पॉकेटमार’ पर भड़का आक्रोश, सपा के वरिष्ठ पार्षद और कैंट विधानसभा सीट से टिकट के दावेदार राजेश अग्रवाल ने निर्माता-निर्देशक आदित्य धर, लोकेश धर को भेजा लीगल नोटिस

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नीरज सिसौदिया, बरेली

शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के पार्षद राजेश अग्रवाल ने फिल्म ‘धुरंधर 2’ के निर्माताओं आदित्य धर, लोकेश धर और ज्योति देशपांडे को कानूनी नोटिस भेजते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म में बरेली को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे शहर की छवि धूमिल हुई है।

पार्षद राजेश अग्रवाल के अनुसार, फिल्म के एक दृश्य में बरेली को पॉकेटमारी (जेबकटी) जैसी आपराधिक गतिविधियों से जोड़कर दिखाया गया है। उन्होंने इसे पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक बताया है। अग्रवाल का कहना है कि बरेली एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी है, जिसे ‘पांचाल नगरी’, ‘आला हजरत की नगरी’ और ‘नाथ नगरी’ के रूप में जाना जाता है। ऐसे में फिल्म में इस तरह का चित्रण शहर के गौरव और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।

उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी शहर या समाज की छवि को खराब नहीं कर सकते। “बरेली की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक सौहार्द और ऐतिहासिक महत्व से है। इसे अपराध से जोड़कर दिखाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है,” अग्रवाल ने कहा।

पार्षद ने नोटिस के माध्यम से फिल्म निर्माताओं से मांग की है कि वे तुरंत फिल्म से बरेली का नाम हटाएं या संबंधित दृश्य को संशोधित करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वह फिल्म निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे और आगे कानूनी कदम उठाएंगे।

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने पार्षद के इस कदम का समर्थन किया है और फिल्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी भी शहर की पहचान को इस तरह गलत तरीके से प्रस्तुत करना ठीक नहीं है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

वहीं, अभी तक फिल्म ‘धुरंधर 2’ के निर्माताओं की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद फिल्म से जुड़े लोगों पर दबाव जरूर बढ़ गया है कि वे इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्मों में किसी स्थान विशेष का चित्रण करते समय निर्माताओं को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इससे उस जगह की सामाजिक और सांस्कृतिक छवि प्रभावित होती है। यदि किसी समुदाय या क्षेत्र की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो ऐसे मामलों में विवाद होना स्वाभाविक है।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माता इस नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे बरेली से जुड़े विवादित दृश्य में कोई बदलाव करते हैं या नहीं। वहीं, पार्षद राजेश अग्रवाल अपने रुख पर कायम हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि बरेली के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

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