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चौपला अंडरपास का संघर्ष बन गया जन आंदोलन, सपा नेता राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में बढ़ने लगा कारवां, कार्यक्रम करने गए थे पाल कॉलोनी में, नेकपुर गौटिया में भी उमड़ गया जनसैलाब, लोकप्रियता के नए शिखर पर चमके ‘आंदोलन वाले नेताजी’

नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की राजनीति में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है- राजेश अग्रवाल। समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और बरेली कैंट विधानसभा सीट से पार्टी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे आंदोलन वाले नेताजी राजेश अग्रवाल ने चौपला-बदायूं रोड अंडरपास का मुद्दा उठाकर खुद को आम जनता की आवाज के रूप में स्थापित कर दिया है। शुरुआत में यह सिर्फ एक स्थानीय समस्या को लेकर शुरू हुआ संघर्ष था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं और राजेश अग्रवाल को अपने संघर्ष का चेहरा मान रहे हैं। साथ ही इस आंदोलन ने राजेश अग्रवाल को लोकप्रियता के नए शिखर पर पहुंचा दिया है।


हाल ही में इसका सबसे भावुक दृश्य नेकपुर पाल कॉलोनी में देखने को मिला। राजेश अग्रवाल यहां चौपला अंडरपास बनाओ संघर्ष समिति के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही आसपास के लोगों को उनके आने की जानकारी मिली, वैसे ही स्थानीय लोगों की भीड़ जमा होने लगी। बताया जाता है कि प्रथम सागर नाम के एक स्थानीय निवासी ने राजेश अग्रवाल को नेकपुर गौटिया आने का निमंत्रण दिया। इसके बाद जब राजेश अग्रवाल वहां पहुंचे तो बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के सैकड़ों लोग उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
लोगों ने फूलमालाओं से उनका स्वागत किया। कई बुजुर्ग महिलाएं और युवा उनसे मिलने के लिए आगे आए। माहौल पूरी तरह भावनात्मक हो गया। ऐसा लग रहा था मानो लोग किसी राजनेता नहीं बल्कि अपने परिवार के सदस्य से मिल रहे हों। स्वागत के बाद जब बातचीत शुरू हुई तो स्थानीय लोगों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं उनके सामने रखनी शुरू कर दीं। किसी ने सड़क की समस्या बताई, किसी ने जलभराव की परेशानी रखी तो किसी ने अंडरपास न बनने को लेकर नाराजगी जताई।


दरअसल, पिछले कुछ समय में राजेश अग्रवाल की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है जो केवल राजनीति नहीं करते, बल्कि सड़क पर उतरकर संघर्ष भी करते हैं। यही वजह है कि आम लोग अब उन्हें उम्मीद की नजर से देखने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजेश अग्रवाल जब किसी मुद्दे को उठाते हैं तो उसे बीच रास्ते में नहीं छोड़ते। यही भरोसा उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाता है।
चौपला-बदायूं रोड अंडरपास का मुद्दा लंबे समय से इलाके की बड़ी समस्या बना हुआ है। यहां आए दिन जाम की स्थिति बनती है। घंटों तक वाहनों की लंबी लाइन लग जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चे, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और मरीज तक इस समस्या से परेशान रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से अंडरपास की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
इसी मुद्दे को लेकर राजेश अग्रवाल ने संघर्ष शुरू किया। उन्होंने बरेली से मुरादाबाद तक संघर्ष किया। लोगों से सीधे संवाद स्थापित किया। यही वजह है कि अब यह आंदोलन केवल एक सड़क या अंडरपास की मांग तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जनता की आवाज बनता जा रहा है।


बताया जा रहा है कि इस अंडरपास से लगभग डेढ़ लाख की आबादी सीधे जुड़ी हुई है। इसमें नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाके भी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि अगर अंडरपास बन जाता है तो रोजाना की परेशानी से बड़ी राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो राजेश अग्रवाल इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम की तरह नहीं बल्कि जनसंघर्ष की तरह चला रहे हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में आम लोग भी उनसे जुड़ते जा रहे हैं। बरेली कैंट विधानसभा सीट पर उनकी सक्रियता ने उन्हें पार्टी का मजबूत दावेदार बना दिया है।
राजेश अग्रवाल लगातार अलग-अलग इलाकों में पहुंच रहे हैं। वे लोगों से सीधे मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचाने की बात करते हैं। आज के दौर में जब ज्यादातर नेता बड़े काफिलों और सुरक्षा घेरे में नजर आते हैं, लेकिन राजेश अग्रवाल ऐसा कोई दिखावा नहीं करते जो लोगों को अलग संदेश देता है। यही कारण है कि युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।


नेकपुर गौटिया में भी लोगों ने खुलकर कहा कि वे चौपला अंडरपास आंदोलन में राजेश अग्रवाल के साथ खड़े हैं। कई लोगों ने हर स्तर पर आंदोलन को मजबूत करने का भरोसा दिया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याओं को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाया जाता रहा, लेकिन पहली बार कोई नेता लगातार उनके बीच आकर संघर्ष कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी अब यह चर्चा तेज हो गई है कि राजेश अग्रवाल की बढ़ती सक्रियता आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा असर डाल सकती है। खास बात यह है कि उनकी छवि अब केवल एक राजनीतिक नेता की नहीं, बल्कि संघर्षशील जननेता की बनती जा रही है। यही वजह है कि आम जनता उनसे खुलकर जुड़ रही है।
समाजवादी पार्टी के अंदर भी राजेश अग्रवाल की मेहनत और जनसंपर्क की चर्चा हो रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिस तरह वे लगातार जनता के बीच रहकर स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं, उससे पार्टी को भी मजबूती मिल रही है। बरेली कैंट सीट पर अगर कोई नेता इतने आक्रामक तरीके से जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर दिखाई देता है तो वह एकमात्र राजेश अग्रवाल ही हैं। सपा का कोई भी अन्य टिकट का दावेदार स्थानीय मुद्दों की मुखर आवाज बनने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।
राजेश अग्रवाल की साफ-सुथरी छवि भी उनकी लोकप्रियता की बड़ी वजह मानी जा रही है। राजनीतिक विरोधी भी यह मानते हैं कि वे लगातार मेहनत कर रहे हैं और जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुके हैं। यही कारण है कि चौपला अंडरपास आंदोलन अब धीरे-धीरे एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक अभियान का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल बरेली की जनता की नजरें इस आंदोलन पर टिकी हुई हैं। लोग देखना चाहते हैं कि चौपला-बदायूं रोड अंडरपास का सपना कब पूरा होगा। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस मुद्दे ने राजेश अग्रवाल को बरेली की राजनीति में नई पहचान जरूर दे दी है।

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