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अखिलेश यादव ने बुलाई प्रदेश भर के महानगर और जिला अध्यक्षों की बैठक, शमीम खां सुल्तानी और शुभलेश यादव को मंच पर दी जगह, संगठन की मजबूती पर फोकस, 15 जून से पहले होगी बरेली के दोनों अध्यक्षों के साथ बैठक

नीरज सिसौदिया, लखनऊ
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में सभी जिला एवं महानगर अध्यक्षों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में बरेली के जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव और महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी को विशेष तरजीह देते हुए मंच पर भी जगह दी गई। अखिलेश यादव का पूरा फोकस संगठन की मजबूती पर रहा। माना जा रहा है कि इस बार विधानसभा के टिकट बंटवारे में संगठन की राय भी अहम होगी क्योंकि सर्वे एजेंसियों की स्थिति पहले ही डांवाडोल हो चुकी है। ऐसे में संगठन के बड़े पदाधिकारियों और इलाके के दिग्गजों की अलग-अलग राय लेने के बाद ही उम्मीदवार का चयन होगा। बताया जाता है कि इस पर मंथन के लिए अखिलेश यादव आगामी 15 जून से पहले बरेली के महानगर और जिला अध्यक्षों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। बताया यह भी जाता है कि आगामी सितम्बर माह में पार्टी अपना चुनाव अभियान शुरू कर देगी। बैठक के दौरान सभी अध्यक्षों को कई दिशा-निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बीएलए अपने बूथ पर पांच नए सदस्यों को जोड़े।
बैठक के बाद अखिलेश यादव ने एक प्रेस वार्ता को भी संबोधित किया। उन्होंने भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद किसी एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि ‘पीडीए’ की सरकार बनेगी। यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कथित ‘आरक्षण की लूट’ से संबंधित ‘पीडीए ऑडिट’ नामक एक दस्तावेज जारी किया और कहा कि रिपोर्ट को अधिक डेटा और तथ्यों के साथ अद्यतन किया जाता रहेगा।
उन्होंने कहा, ”पीडीए ऑडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा।” यादव ने जून 2023 में ‘पीडीए’ का नारा दिया था जिसका मतलब पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के गठजोड़ से है। सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो “यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है।”

उन्होंने आरोप लगाया, ”अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका मतलब है कि सरकार पक्षपाती है। पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है।” सपा अध्यक्ष ने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताया। उन्होंने कहा, ”आरक्षण सुरक्षा है। आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है।” भाजपा सरकार की बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ”अगर भाजपा सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है, तो उन्हें असमानता की असमान जमीन को समतल करने और सभी को उनका उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए उसका उपयोग करना चाहिए।” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ‘लेटरल एंट्री’ के जरिये होने वाली नियुक्तियों के माध्यम से आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, ”लेटरल एंट्री के जरिए अपनी पसंद के लोगों की पिछले दरवाजे से नियुक्तियां की जा रही हैं ताकि आरक्षण धीरे-धीरे कमजोर हो जाए।” ‘लेटरल एंट्री’ से तात्पर्य सरकार के बाहर से व्यक्तियों को सीधे मध्य-स्तर और वरिष्ठ स्तर के पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया से है। यादव ने भाजपा पर संवैधानिक आरक्षण को लेकर ‘बेईमानी’ में लिप्त होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल समाज के वंचित वर्गों के लिए समान अवसर नहीं चाहता। सपा प्रमुख ने कहा, ”आरक्षण दान नहीं है, यह एक अधिकार है।” उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरक्षण आवश्यक है। ‘ऑडिट रिपोर्ट’ को ”पीडीए ऑडिट भाग-1” शीर्षक से एक पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पीडीए श्रेणियों के लिए 11,500 से अधिक आरक्षित पद उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं में प्रभावित हुए हैं। पुस्तिका में 69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण मानदंडों के कार्यान्वयन में अनियमितताओं को स्वीकार किया था और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने का निर्देश दिया था।
ऑडिट के अनुसार राज्य सरकार ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले स्वीकार किया था कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया था, लेकिन अब तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। पुस्तिका में बांदा कृषि विश्वविद्यालय में 2022 में की गई भर्ती का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 15 विज्ञापित पदों में से सात ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे, लेकिन इन श्रेणियों के केवल दो उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पांच आरक्षित पदों का ”नुकसान” हुआ। सपा प्रमुख ने ‘एक्स’ पर कहा कि 2027 में ‘पीडीए सरकार’ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं को पूरी तरह मुस्तैद रहने के लिए तैयार किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारे साथ गठबंधन के तहत जो भी चुनाव लड़े, उसे चुनाव जीतने के लिए, हमारी बूथ स्तर तक की मजबूत संगठनात्मक शक्ति का पूरा फ़ायदा मिले क्योंकि हमने हमेशा कहा है : बात ‘सीट’ की नहीं; ‘जीत’ की है!” यादव ने कहा, “इस बार किसी दल की नहीं बल्कि एक ‘समुदाय’ की सरकार बनेगी, ये बात हम पहले ही कह चुके हैं… और उस समुदाय का नाम है पीडीए।” उन्होंने कहा कि पीडीए का आंदोलन वर्चस्ववाद और भेदभाव के ख़िलाफ़ ‘नई आज़ादी का आंदोलन’ है जिससे कि संविधान और आरक्षण बचा रहे। उन्होंने कहा, “इसीलिए पीडीए देशभक्ति का नया उद्घोष है, हमारी सब देशभक्तों से अपील है, आइए पीडीए आंदोलन’ से जुड़ें और देश को एक नई दिशा दें।”

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