बरेली शहर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इस बीच बरेली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष गौरव सक्सेना अपने होर्डिंग और वॉल पेंटिंग को लेकर पूरे शहर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्होंने शहर विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों होर्डिंग लगवाए हैं और दर्जनों स्थानों पर वॉल पेंटिंग भी कराई है। वैसे तो उनके होर्डिंग पर जनता को दीपावली, भैया दूज और गंगा स्नान जैसे पर्वों की शुभकामनाएं दी गई हैं, लेकिन इनके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है। उनके होर्डिंग पर स्पष्ट रूप से 124 बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र लिखा हुआ है। इससे उनकी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी और टिकट के लिए दावेदारी के संकेत मिल रहे हैं।

गौरव सक्सेना बरेली शहर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदारों में सबसे बड़े कायस्थ चेहरे के साथ ही पार्टी के सबसे बड़े हिन्दू चेहरों में भी शामिल हैं। हिन्दू बहुल वार्ड से लगातार तीन बार पार्षद का चुनाव जीतना उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण है। छात्र जीवन से ही समाजवादी पार्टी का झंडा थामने वाले गौरव सक्सेना ने एक सामान्य कार्यकर्ता से नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष तक का सफर अपनी मेहनत और सक्रियता के दम पर तय किया है। वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते हैं, लेकिन अपनी स्पष्टवादिता और जनहित के मुद्दों पर मुखर रहने के कारण आज शहर की राजनीति में अलग पहचान बना चुके हैं।

बरेली शहर विधानसभा सीट पर गौरव सक्सेना की दावेदारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका कायस्थ होना है। इस विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार मानी जाती है। वर्ष 2022 के चुनावी समीकरणों पर आधारित कुछ राजनीतिक आकलनों में यह संख्या 30 हजार से 42 हजार तक बताई गई है। हालांकि ये अनुमानित आंकड़े हैं और निर्वाचन आयोग जातिवार मतदाता संख्या जारी नहीं करता। इसके बावजूद कायस्थ मतदाताओं की संख्या इतनी महत्वपूर्ण मानी जाती है कि किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राजनीति में कायस्थ समाज की लंबे समय से मजबूत भूमिका रही है। भाजपा इस सीट पर कायस्थ नेताओं को प्राथमिकता देती रही है और इस समाज का बड़ा हिस्सा पार्टी के साथ जुड़ा माना जाता है।

यही वह राजनीतिक समीकरण है जिसमें गौरव सक्सेना समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अगर वह अपनी बिरादरी के मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाकर उन्हें सपा के पक्ष में लामबंद करने में सफल होते हैं तो भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। कायस्थ मतदाताओं का समर्थन मिलने के साथ ही अगर वह अपने पार्षद वार्ड के मतदाताओं और दूसरे हिन्दू समुदायों का भरोसा भी हासिल कर लेते हैं तो सपा की चुनावी संभावनाओं को मजबूती मिल सकती है। हालांकि बिरादरी का नेता होने मात्र से पूरे समाज का वोट मिलना तय नहीं है। इसके लिए उन्हें अपनी व्यक्तिगत स्वीकार्यता को व्यापक राजनीतिक समर्थन में बदलना होगा।
गौरव सक्सेना की दूसरी बड़ी ताकत हिन्दू बहुल वार्ड से लगातार तीन बार पार्षद चुना जाना है। बरेली शहर सीट पर समाजवादी पार्टी के सामने लंबे समय से हिन्दू मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की चुनौती रही है। ऐसे में गौरव सक्सेना पार्टी के लिए एक मजबूत हिन्दू चेहरे के रूप में सामने आते हैं। वह सिर्फ अपनी बिरादरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष होने के कारण पूरे महानगर के विभिन्न वर्गों से उनका संपर्क रहता है। नगर निगम की बैठकों में भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं के मुद्दे पर वह सत्ता पक्ष को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते। जनहित के मुद्दों पर उनकी मुखरता ने उन्हें शहर की राजनीति में अलग पहचान दिलाई है।
कायस्थ समाज के कई बड़े संगठनों में भी गौरव सक्सेना महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इससे उन्हें अपनी बिरादरी के बीच संगठनात्मक आधार और संपर्क मजबूत करने का अवसर मिलता है। उनकी सक्रियता सिर्फ उनके अपने वार्ड तक सीमित नहीं है। महानगर के अलग-अलग इलाकों में उनकी राजनीतिक और सामाजिक मौजूदगी नजर आती है। यही वजह है कि बरेली शहर विधानसभा सीट से सपा के हिन्दू दावेदारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। अन्य दावेदारों के मुकाबले नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का पद भी उन्हें एक अलग राजनीतिक हैसियत देता है।

बरेली शहर विधानसभा सीट के पिछले चुनावी नतीजे भी गौरव सक्सेना की दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. अरुण कुमार को 1,29,014 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार अग्रवाल को 96,694 मत प्राप्त हुए थे। भाजपा ने यह चुनाव 32,320 मतों के अंतर से जीता था। सपा को इस सीट पर मजबूत मुस्लिम समर्थन मिलने के बावजूद हिन्दू मतदाताओं के बीच अपना आधार बढ़ाने की जरूरत है। यहां एसआईआर के बाद मुस्लिम मतदाताओं का आंकड़ा 40% से भी अधिक हो चुका है जो सपा का आधार वोट है। ऐसे में गौरव सक्सेना जैसे हिन्दू चेहरे को मैदान में उतारना पार्टी के लिए एक अलग सामाजिक समीकरण तैयार करने का अवसर हो सकता है।
बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या में भी बड़ा बदलाव आया है। अप्रैल 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक यहां कुल 3,51,057 मतदाता हैं। ऐसे में पुराने जातिगत आंकड़ों के आधार पर चुनावी गणित बनाना आसान नहीं होगा। गौरव सक्सेना के सामने अपनी बिरादरी के साथ-साथ अन्य हिन्दू और गैर मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी मजबूत पकड़ बनाने की चुनौती होगी।

गौरव सक्सेना ने अपनी विधानसभा दावेदारी को जिस तरह पूरे शहर में प्रचारित करना शुरू किया है, उससे साफ है कि वह टिकट की दौड़ में खुद को मजबूती से स्थापित करना चाहते हैं। उनके होर्डिंग और वॉल पेंटिंग मिनी बाईपास, गांधीपुरम, कर्मचारीनगर, बसंत विहार, किला, हवाई अड्डा, डेलापीर, संजयनगर, धर्मकांटा, कोहाड़ापीर, भूड़, गुद्दरबाग, चाहबाई, सुरेश शर्मा नगर, राजेंद्र नगर और डीडीपुरम सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में दिखाई दे रहे हैं। इन स्थानों पर प्रचार के जरिए वह विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

बहरहाल, गौरव सक्सेना ने अपनी दावेदारी में दम तो पूरा भर दिया है। उनके पास तीन बार पार्षद चुने जाने का अनुभव, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का महत्वपूर्ण पद, कायस्थ समाज में संगठनात्मक पकड़ और एक सक्रिय हिन्दू नेता की पहचान है। अगर वह इन सभी राजनीतिक आधारों को एकजुट करने में सफल होते हैं तो समाजवादी पार्टी के लिए बरेली शहर सीट पर एक नया चुनावी समीकरण तैयार हो सकता है। लेकिन पार्टी उन्हें टिकट देकर इस समीकरण को कितना मजबूत मानती है, इसका फैसला तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ही करना है।




