दिल्ली

रेलवे की वजह से भीख मांगने पर मजबूर हुए ये ग्रेजुएट विकलांग, दिल्ली की सड़कों पर भीख मांगते आए नजर, पढ़ें क्या है पूरा मामला

नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली 

मोदी सरकार के राज में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट विकलांग स्टूडेंट भीख मांगने पर मजबूर हो गए| विभिन्न राज्यों से आए यह विकलांग विद्यार्थी आज दिल्ली की सड़कों पर भीख मांगते हुए नजर आए| दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में बीच सड़क पर बैठकर भीख मांगने वाले विद्यार्थी विकलांग हैं और देश के विभिन्न राज्यों से यहां पहुंचे हैं| इनकी भीख मांगने के पीछे मजबूरी का सबसे बड़ा कारण इंडियन रेलवे है. जिसने भर्ती के नाम पर इन लोगों के साथ मजाक किया है| यही वजह है कि अब यह स्टूडेंट विकलांग होने के बावजूद अपने घरों से दिल्ली पहुंचे और यहां की सड़क पर बैठकर ही मांगने पर मजबूर हुए| भीख मांगने वाले विद्यार्थियों में रानी, निसात, रोशनी और सविता सहित कुुछ अन्य विद्यार्थी भी शामिल हैं| यह विकलांग विद्यार्थी मोदी सरकार से नौकरी की जीत मांग रहे हैं|

आज सुबह लगभग 12 बजे ये लोग मंडी हाउस पहुंचे. इन्होंने अपने शरीर पर एक पोस्टर लगा रखा था जिसमें अपना-अपना नाम, डिग्री और शहर के नाम के साथ ही भिखारी लिखा हुआ था. जिस अनोखे अंदाज में इन स्टूडेंट्स ने विरोध प्रदर्शन किया वह इतिहास में पहले कभी भी देखने को शायद ही मिला हो.

भारतीय रेल की मेगा भर्ती 2018 के दिव्यांग अभ्यर्थी पिछले 8 दिनों से दिल्ली के मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा अभ्यर्थियों को कहना है कि परीक्षा में हुई धांधली की वजह से उनको भर्ती से बाहर होना पड़ा है। छात्र देश के कोने कोने से आकर न्याय की गुहार लगाने राजधानी दिल्ली पहुचें हुए हैं।

आज अंतराष्ट्रीय विकलांग दिवस को अभ्यर्थियों ने काला दिवस के रूप में मनाया। छात्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस पर संदेश दिया लेकिन दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे विकलांग परीक्षार्थियों की एक न सुनी।

आज अभ्यर्थियों को समर्थन देने युवा-हल्लाबोल के अनुपम ने मंडी हाउस पहुँचकर प्रदर्शनकारियों के जज़्बे को सलाम किया। अनुपम ने अभ्यर्थियों की समस्या को जाना और छात्रों की इस लड़ाई में पूरा साथ देने का भरोसा दिलाया।

अनुपम ने कहा कि देशभर से आए सैकड़ों विकलांग युवा दिल्ली के मंडी हाउस पर खुले आसमान के नीचे 8 दिनों से बैठे हैं। रेलवे ग्रुप D भर्ती मे हुई धांधली के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन मोदी जी ने अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस पर एक सांकेतिक ट्वीट करके और “दिव्यांग” कहकर अपना फर्ज निभा लिया।

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