नीरज सिसौदिया, जालंधर
आईएएस अफसर और नगर निगम के निवर्तमान कमिश्नर दीपर्व लाकड़ा के साथ की गई बदसलूकी जालंधर वेस्ट के विधायक सुशील कुमार रिंकू के गले की फांस बनती जा रही है. एक तरफ रिंकू के इस असंवेदनशील रवैये को लेकर आईएएस लॉबी में रोष व्याप्त है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की छीछालेदर होने के बाद कांग्रेस नेता भी रिंकू के विरोध में उतर आए हैं. पूर्व पार्षद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने तो रिंकू को बदतमीज और बददिमाग इंसान करार देते हुए उन्हें राजनेताओं की श्रेणी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है. साथ ही रिंकू को जालंधर के अन्य तीन विधायकों बावा हैनरी, राजिंदर बेरी और परगट सिंह से बात करने की थोड़ी सी तमीज सीखने की नसीहत भी दी है.
पत्रकारों को दिए गए बयान में प्रदीप राय ने कहा कि सुशील रिंकू ने अपने पद की गरिमा को तार-तार कर दिया है. रिंकू ने जिस तरह से से आईएएस अधिकारी दीपर्व लाकड़ा से अभद्रता की है वह बेहद शर्मसार करने वाला है. इससे रिंकू ही नहीं पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक संस्कारवान और गांधी एवं नेहरू जैसे महापुरुषों के आदर्शों पर चलने वाली पार्टी है लेकिन रिंकू ने जिस तरह की गुंडे मवालियों और सड़कछाप लोगों की भाषा का इस्तेमाल एक आईएएस अधिकारी के लिए किया है उसने विधायक पद की गरिमा के साथ ही पार्टी के गौरवमयी इतिहास को भी धूमिल करने का प्रयास किया है.
प्रदीप राय ने कहा कि रिंकू ऐसा क्यों कर रहे हैं ये तो वही जानें लेकिन उन्होंने जो भी किया वह पार्टी को आघात पहुंचाने वाला है. उन्होंने आगे कहा कि हर विभाग में काम करने का एक सिस्टम होता है. एक अधिकारी उसी सिस्टम पर से बंधा होता है. पार्षद और विधायक का दायित्व होता है कि वह नगर निगम के अधिकारियों के साथ सामंजस्य बनाते हुए जनता के कार्यों को पूरा कराए जिससे न तो जनता के काम रुकें और न ही अधिकारी खुद को अपमानित महसूस करें. प्रदीप राय ने कहा कि जालंधर में और भी विधायक हैं. बावा हैनरी, राजिंदर बेरी और परगट सिंह जैसे नेता हैं जो विधायक बनने के बाद भी उसी शालीनता से लोगों से पेश आते हैं जिस तरह से विधायक बनने से पहले आते थे. ऐसा नहीं है कि इन सभी विधायकों के इलाके में सारी समस्याओं का समाधान हो चुका है लेकिन वे सभी कभी भी अपने पद की गरिमा को नहीं भूले और हमेशा मर्यादा में रहकर ही अपनी आपत्ति भी दर्ज कराते रहे हैं. वे चाहते तो वे भी रिंकू की तरह बदतमीजी और गुंडे मवालियों वाली भाषा का इस्तेमाल कर सकते थे लेकिन उन्हें पार्टी की छवि और पद की गरिमा का महत्व पता है. रिंकू को भी उक्त तीनों विधायकों से थोड़ी सी बात करने की तमीज सीखनी चाहिए जिससे उनके पद की गरिमा भी बरकरार रहे और पार्टी की छवि भी धूमिल न हो.
प्रदीप राय यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि सुशील रिंकू जिस माहौल से आए हैं शायद वह महौल उन्हें अधिकारियों के सम्मान करने की इजाजत नहीं देता. रिंकू को शायद यह नहीं पता कि एक आईएएस अधिकारी बनने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है. देश के सबसे प्रतिष्ठित पद को पाने के लिए एक युवा क्या इसीलिए मेहनत करता है कि कल को रिंकू जैसा कोई नासमझ और बेगैरत विधायक उसे बेइज्जत करके चला जाए? आई ए एस लॉबी इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी.
उन्होंने कहा कि रिंकू की नासमझी का यह पहला मामला नहीं है. पहले भी रिंकू अपनी ही सरकार के फैसले का विरोध करते नजर आए थे. उस वक्त तो वह एक महिला अधिकारी से बदतमीजी पर उतारू हो गए थे. रिंकू बार-बार वही गलतियां करने में लगे हैं जिनसे पार्टी की छवि धूमिल हो रही है. जिस इंसान की नजरों में गांधी और नेहरू के संस्कारों की कोई अहमियत न हो ऐसे इंसान को पार्टी में रहने का कोई अधिकार नहीं है. उन्हें तत्काल पार्टी से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए.

विधायक रिंकू पर फिर बरसे प्रदीप राय, बोले- बावा हैनरी, बेरी और परगट सिंह से बात करने की थोड़ी सी तमीज भी सीख लें रिंकू, पढ़ें और क्या-क्या कहा…




