इंटरव्यू

बाप बीमार हो जाए तो इलाज कराया जाता है बाप नहीं बदला जाता, दिल पर हाथ रखकर बताएं शहर विधायक क्या किया है जनता के लिए, पढ़ें कांग्रेस नेता प्रेम प्रकाश अग्रवाल का बेबाक और एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

बरेली की सियासत में प्रेम प्रकाश अग्रवाल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. कांग्रेस के बुरे दिन आए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता भी भाजपा में चले गए लेकिन प्रेमप्रकाश अग्रवाल 40 वर्षों से लगातार पार्टी की सेवा में डटे हैं. इसकी क्या वजह है? वर्ष 2017 में प्रेम प्रकाश अग्रवाल शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे. क्या इस बार फिर से चुनावी मैदान में उतरेंगे? शहर विधायक डा. अरुण कुमार के दस वर्षों के कार्यकाल को वह किस नजरिये से देखते हैं? अरुण कुमार को बतौर विधायक वह कितना सफल मानते हैं? आगामी विधानसभा चुनावों में अगर पार्टी उन्हें मैदान में उतारती है तो उनके मुद्दे क्या होंगे? किसान आंदोलन और हाल ही में पेश बजट पर उनकी क्या राय है? राजनीति और निजी जिंदगी के बारे में प्रेम प्रकाश अग्रवाल ने नीरज सिसौदिया के साथ खुलकर अपनी बात रखी. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही, राजनीति में कब आना होगा?
जवाब : मेरा जन्म बरेली में ही एक व्यवसायी परिवार में हुआ. हम तीन भाई बहन हैं और तीनों ही बरेली में ही हैं. मुझे राजनीति में आए लगभग 40 वर्ष हो गए. मुझे शुरू से ही कांग्रेस की विचारधारा ने प्रेरित किया. पंडित हरिदास वैद के माध्यम से मुझे कांग्रेस में शामिल होने का अवसर मिला उसके बाद से वर्ष 1988 से मैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सदस्य हूं. बीच में प्रदेश कांग्रेस सचिव ही रहा. साथ ही समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ा रहा. महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय बरेली का मैं फाउंडर जनरल सेक्रेटरी हूं. विगत 22 नवंबर तक अध्यक्ष भी रहा और वर्ष 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन के टिकट पर शहर विधानसभा सीट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा. 86500 वोट हासिल हुए और मैं दूसरे नंबर पर रहा. राजनीति में कई माध्यम होते हैं जिसमें हम समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. यही वजह रही कि मैंने भी राजनीति को चुना. वर्ष 2017 में चुनाव हारने के बाद भी जनता से मेरा संपर्क जारी है. लोगों के कार्य में जो परेशानी आती है उसके उन्मूलन में यथासंभव सहयोग देते हैं जिससे जनता के बीच एक चुनाव बना रहे.

सवाल : पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस डाउन होती जा रही है. विभिन्न दलों के साथ गठबंधन करने के बावजूद कांग्रेस की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. क्या कारण हैं?
जवाब : देखिए, कांग्रेस डाउन तो नहीं हो रही है. वो कहते हैं न कि सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता. कांग्रेस एक सत्य का नाम है. कांग्रेस की जो एक सेक्युलर छवि है वह बहुत महत्वपूर्ण है. भविष्य में निश्चित रूप से मान्यता उसी की होगी जो सबको जोड़कर साथ चलेगा, तोड़कर चलने वाला स्थाई नहीं रह सकता. हमारा जो लोकतंत्र है वह फॉर द पीपुल, टु द पीपुल और बाई द पीपुल है और पीपुल में कोई धर्म विशेष नहीं हो सकता. इसमें सभी धर्म हैं. हर एक के कालखंड में परेशानी आती है लेकिन अंततः कांग्रेस ही जीतती है. एक बहुत लंबा समय रहा जब कांग्रेस नहीं रही लेकिन फिर वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक 10 साल तक कांग्रेस ने ही शासन किया. विश्व के एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और बहुत ईमानदार नेता डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे. यह जीवन चक्र है. उतार-चढ़ाव तो चलता रहता है सत्ताधारियों ने जिस तरह से लोगों को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का प्रयास किया उसमें वे खुद को सफल भी मानते हैं लेकिन नैतिकता के आधार पर वे सफल नहीं है. सफलता तो उसमें है जब हम सबको जोड़ कर चलें. गंगा की धार की तरह है कांग्रेस, पतली तो हो सकती है पर खत्म नहीं हो सकती.

किसानों और बजट पर राय देते प्रेम प्रकाश अग्रवाल.

सवाल : वर्तमान में देश में जिस तरह का माहौल है, किसान आंदोलन पर डटा है. कई किसानों की जान भी जा चुकी है पर सरकार आंदोलन को खत्म नहीं करा सकी है. किस नजरिए से देखते हैं?
जवाब : सरकार की भरपूर संवेदनहीनता है. इतनी ठंड में आप किसानों पर पानी की बौछार कर रहे हैं, उनकी मृत्यु भी हो रही है. दर्जनों किसान अपनी जान गंवा चुके हैं फिर भी संवेदनहीनता दिखाते हुए किसी तरह का अफसोस भी नहीं कर रहे हैं. अपनी हठधर्मिता और तानाशाही के चलते आपने किसानों की आवाज को जिस तरह से दबाने का प्रयास किया है यह किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता है. सरकार की बहुत बड़ी चूक है कि सरकार ने इस मामले को बिल्कुल भी गंभीरता से न लेते हुए सिर्फ इस बात को लिया कि किस तरह से दमनकारी नीति अपनाकर अपनी ही बात करें और बड़े-बड़े उद्योगपतियों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से देश का पूरा ताना-बाना ही खराब करने का प्रयास किया गया है. इसकी पूरी जिम्मेदार वर्तमान सरकार है.
सवाल : कई नेता कांग्रेस छोड़कर जा रहे हैं. कुछ सपा में तो कुछ भाजपा में शामिल हो रहे हैं. क्या आपको नहीं लगता कि अब पार्टी बदल लेनी चाहिये?
जवाब : देखिए मैं कोई दलबदलू नहीं हूं. बाप अगर बीमार हो जाए तो बाप को बदला नहीं जाता बल्कि उसका इलाज कराया जाता है. कांग्रेस पार्टी भी हमारे लिए पिता तुल्य है जिसने हमें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है. मैं 40 साल से पार्टी की सेवा कर रहा हूं और करता रहूंगा.
सवाल : आप पिछले 40 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं. आपने बरेली शहर को बेहद करीब से देखा है. क्या बदलाव महसूस करते हैं इन 40 वर्षों में या क्या कमी लगती है शहर विधानसभा क्षेत्र में विकास को लेकर? जवाब : पिछले लगभग 30 32 सालों से तो शहर विधानसभा सीट से भाजपा का ही विधायक है. लोग बता सकते हैं कि क्या विकास हुआ? कितना कुछ आगे बढ़ा? ऐसा लगता है कि सब ठहर कर रह गया. चुनाव जीतना ही मकसद बन गया है, जीतने के बाद हमारी जिम्मेदारी क्या है, पब्लिक ने हमें किस लिए चुना था और उसके प्रत्युत्तर में हमें क्या जवाब देना है वह तक नहीं जानते. बस चुनाव जीतना, सब्जबाग दिखाना, लंबे चौड़े वादे करना और मुकर जाना यही वर्तमान सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों की स्थिति है जो निश्चित तौर पर निंदनीय भी है और दुखद भी.
सवाल : बरेली शहर की प्रमुख समस्या आप किसे मानते हैं?
जवाब : बरेली में समस्याएं ही समस्याएं हैं, समाधान नहीं है. आज आप देखिए कि कौन सी ऐसी सड़क है जो खुदी नहीं है? आज एक काम पूरा नहीं होता दूसरा शुरू कर देते हैं. एक काम पूरा करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए. इसमें उनकी स्वार्थपरता और नीति हो सकती है. कुल मिलाकर अनियोजित तरीके से और दूरदृष्टि के अभाव में काम कर रहे हैं. सड़क की समस्या है स्वास्थ्य, बिजली, पानी, किसानों की समस्या है. लोग परेशान हो रहे हैं. विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. एक सशक्त विपक्ष जनता के लिए लाभप्रद होता है क्योंकि सरकार को भय रहता है कि अगर वह कोई गलत काम करेंगे तो विपक्ष आ जाएगा लेकिन ये लोग यह समझ रहे हैं कि अब कोई नहीं है. सिर्फ हम ही हम हैं और हम ही शासन करेंगे तो यह उनकी गलतफहमी है क्योंकि जब ज्यादा जनता का शोषण होगा, जुल्म होगा तो जनता भी विरोध पर उतारू हो जाएगी जिसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं.
सवाल : कुतुबखाना ओवरब्रिज को लेकर काफी हंगामा हो रहा है. क्या आपको लगता है यह ब्रिज बनना चाहिए?
जवाब : मुझे लगता है कि ओवरब्रिज बनना चाहिए क्योंकि भविष्य में एक बहुत बड़ी आवश्यकता होगी वरना ट्रैफिक का बहुत बुरा हाल हो जाएगा. लोग रेंग रेंग कर निकलेंगे मगर उन लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर इस तरह से निर्माण किया जाना चाहिए कि स्थानीय दुकानदार प्रभावित न हों, परेशान न हों. उनकी परेशानियों को समझा जाना चाहिए. कम से कम जगह घेरी जाए मगर ओवरब्रिज का निर्माण हितकर लग रहा है.
सवाल : डॉ. अरुण कुमार पिछले लगभग नौ वर्षों से शहर विधानसभा सीट से विधायक हैं. क्या उपलब्धि मानते हैं उनकी, क्या उम्मीदें थी उनसे और उन उम्मीदों पर कितनी खरे उतरे डॉ. अरुण कुमार?
जवाब : डॉ अरुण कुमार के कार्यकाल में स्थिति जस की तस है बल्कि और भी बदतर होती चली जा रही है. कोई ऐसा कार्य नहीं है उनकी जुबान पर जिसे वह बेहतर बता सकें क्योंकि वह बनाने में नहीं तोड़ने में विश्वास करते हैं. हिंदू मुस्लिम के बीच खाई चौड़ी करने में विश्वास रखते हैं और उसमें सफल भी होते हैं लेकिन यह सफलता अस्थाई है क्षणिक है. शहर विधानसभा सीट का कोई ऐसा इलाका नहीं है जहां विकास हुआ हो. मैं सारे इलाकों को पिछड़ा मानता हूं. सरकार आपको पैसा देती है लेकिन आप सिर्फ फोटो खिंचवाकर अखबारों में भिजवा देते हैं. धरातल पर आपका कोई काम नजर नहीं आता. अपने दिल पर हाथ रखकर विधायकों को यह सोचना चाहिए कि क्या वाकई उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किया है? निश्चित रूप से उन्हें रात में यह सोचकर नींद नहीं आती होगी कि उन्होंने जनता के लिए कुछ नहीं किया है.

विकास के मुद्दे पर अपनी बात रखते प्रेम प्रकाश अग्रवाल.

सवाल : क्या इस बार आप शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, अगर पार्टी आपको मौका देती है तो आप के मुद्दे क्या होंगे?
जवाब : किस विधानसभा सीट से कौन चुनाव लड़ेगा इसका निर्णय पार्टी को करना है. पार्टी जो भी फैसला करेगी हम उसका पूरी तरह से सम्मान करेंगे और पार्टी के लिए ही चुनाव में काम करेंगे. अगर पार्टी हमें मौका देती है तो हमारे मुद्दे चौतरफा विकास, लोगों में प्यार मोहब्बत की वापसी और सिर्फ जनता के हितों का काम होंगे हमारे क्षेत्र में भी बहुत सारे किसान आते हैं, बहुत सारे लोग हैं जिनके पास भूमि है उन लोगों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान और जो अति पिछड़े इलाके हैं उनको सर्वोपरि रखते हुए सबसे पहले उनका विकास ही हमारे मुद्दे होंगे.
सवाल : अति पिछड़े क्षेत्र आप किसे मानते हैं?
जवाब : शहर में किले की तरफ का एरिया, अलमगिरी गंज, साहूकारा क्षेत्र पिछड़ा ही कहा जाएगा. डीडीपुरम व राजेंद्र नगर जैसे इलाकों को छोड़ दें जहां लोगों ने खुद अपने स्तर पर विकास कराया है तो पूरी की पूरी 124 शहर विधानसभा सीट ही अति पिछड़े इलाकों में आती है.
सवाल : आपके क्षेत्र में भी जरी जरदोजी का भी कारोबार हुआ करता था जो अब पूरी तरह से चौपट हो गया है. क्या कहेंगे इस बारे में?
जवाब : हमारे क्षेत्र में लगभग 30 फ़ीसदी मुस्लिम रहते हैं. ज्यादातर इन्हीं लोगों के परिवार जरी जरदोजी के कारोबार में लगे हुए थे. काफी अच्छा कारोबार चलता था. काफी पैसा आता था. विदेशों से भी पैसा आता था उसे इस सरकार ने हतोत्साहित किया है. यह भी विकास में बाधा बना. विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए क्योंकि वे पूरी तरह से इंवॉल्व थे इसमें. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
सवाल : भारतीय जनता पार्टी 90 के दशक से राम मंदिर के मुद्दे पर चुनाव लड़ती आ रही है. अब राम मंदिर बनने जा रहा है तो आपको नहीं लगता कि अगला चुनाव हिंदू बनाम मुस्लिम होगा और भाजपा को राम मंदिर का फायदा मिलेगा?
जवाब : राम मंदिर बनना चाहिए क्योंकि यह एक आस्था का विषय है. सत्ताधारी लोग इसे राजनीति का मुद्दा बनाते रहे हैं लेकिन जनता इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनने देगी. कांग्रेस, बसपा, सपा सभी दल इसमें सहयोग कर रहे हैं. कहीं-कहीं तो मुस्लिम समाज के लोगों ने भी चंदा दिया है राम मंदिर के निर्माण के लिए. ये लोग गलतफहमी में है कि उन्हें राम मंदिर का लाभ मिलेगा, कोई लाभ नहीं मिलने वाला. यह कोर्ट का आदेश था जिसे सर्व स्वीकार किया गया, शिरोधार्य किया गया वह आदेश मान्य है. किसी भी पार्टी के कार्यकाल में यह फैसला आता तो मान्य होता. कोर्ट के फैसले को किसी एक दल की उपलब्धि कैसे माना जा सकता है. जनता सब जानती है कि मंदिर अदालत की वजह से बन रहा है न कि किसी पार्टी की वजह से. राम मंदिर अवश्य बनना चाहिए. भगवान राम हमारे आराध्य हैं लेकिन कलेक्शन का सवाल है वह दिखाना चाहिए सार्वजनिक रूप से की कहां-कहां से राम मंदिर निर्माण के लिए इन्होंने पैसा इकट्ठा किया है और कितना पैसा इकट्ठा किया है. एक-एक पैसे का सही हिसाब होना चाहिए. अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो भगवान राम के नाम पर अपराध के भागी होंगे.

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