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मिडिल क्लास फैमिली से हैं ‘पिया अलबेला’ फेम ‘इंडिया वाली मां’ के रोहन, दो साल में ही बना ली पहचान, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

पूजा सामंत, मुंबई

अक्षय म्हात्रे एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं. उनके पिता रेलवे में नौकरी करते हैं. टीवी वर्ल्ड में अभी उन्हें ज्यादा समय नहीं हुआ है लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने खुद को साबित किया और बिना किसी गॉडफादर के सोनी टीवी के लोकप्रिय शो में लीड रोल हासिल कर लिया. इन दिनों वह सोनी के शो इंडिया वाली मां में रोहन का लीड रोल प्ले कर रहे हैं. शो में क्या है खास, रोहन के किरदार को उन्होंने क्यों स्वीकार किया? बॉलीवुड में अक्षय किसे अपना रोल मॉडल मानते हैं? पेश हैं अक्षय म्हात्रे के साथ बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : अक्षय, सोनी टीवी के शो ‘इंडिया वाली मां ‘ को स्वीकार करने की क्या मुख्य वजह रही? क्या खास लगा इस शो में ?
जवाब : ‘ इंडिया वाली मां ‘ शो सोनी पर आनेवाला था जो टॉप का चैनल है। इसकी कहानी हर भारतीय के दिल को छू लेने वाली है। कहानी हर दूसरे भारतीय की मां को रिप्रेजेंट करती है। मेरा रोहन किरदार मुझे उतना ही अच्छा लगा। बहुत रिलेवेंट सा लगा. जब किरदार के इर्द गिर्द कहानी घूमती हो, किरदार अगर मध्यवर्ती किरदार हो तो उसे एक्सेप्ट न करने की कोई वजह ही नहीं बचती.
दूसरी बात यह कि मुझे इस शो का ऑफर वर्ष 2019 में मिला था। लॉकडाउन के कारण शो शुरू होते होते 2020 का सितम्बर महीना शुरू हुआ। मेरी जगह कोई और होता तो वो भी इस किरदार को ख़ुशी-खुशी कर लेता.
सवाल : आपके अभिनय का सफर दो-तीन साल पहले ही शुरू हुआ है. इतनी जल्दी ‘इंडिया वाली मां’ शो में आपको लीड किरदार कैसे मिला?
जवाब : पिछले कई वर्षों से फिल्म्स -वेब सीरीज या टीवी शोज में रोल मिलने का एकमात्र जरिया है ऑडिशंस देना और मैंने भी यही किया। इस शो के लिए ऑडिशन देने एक हजार से भी अधिक युवक आये थे जिन्होंने ऑडिशन दिया लेकिन उनमें से मुझे शॉर्ट लिस्ट कर लिया गया और फाइनली लास्ट राउंड तक पहुंच गया। इस शो के किरदारों में सबसे पहली मेरी कास्टिंग हुई थी। पहले ऐसा तय हुआ था कि इस शो की पूरी शूटिंग विदेश में होगी, शो का टायटल ही ‘इंडिया वाली मां’ जो है। लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह निर्णय लेना पड़ा कि शो की शूटिंग अपने ही देश में करेंगे। ‘

सवाल : किस तरह का किरदार है आपका? इसकी विशेषता क्या है?’
जवाब : शो में मेरे किरदार का नाम रोहन है। रोहन का पत्ता तक नहीं हिलता उसकी मां के बिना। आज कल ऐसे लड़कों को मम्माज बॉय कहते हैं। यह मम्माज बॉय करियर के सिलसिले में जब विदेश जाता है वो अपनी मां तक को भूल जाता है, अपने घर -अपनी मां-अपने देश को रोहन भूल जाता है जिसकी कल्पना उसीे मां ने कभी नहीं की थी। रोहन दुष्ट नहीं है लेकिन महत्वाकांक्षाओं ने उसे अंधा कर दिया है. जब पानी सिर के ऊपर बहने लगता है उसकी मां विदेश पहुंचती है रोहन के पास। किस तरह से मां रोहन में फिर भारतीयता भर देती है, यही इस शो की कहानी है। रोहन भी दिल का बुरा नहीं. ऐसे युवक आज के जमाने में कम मिलते हैं. यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज कल के युवा खासकर लड़के अपने पेरेंट्स के साथ वैसा प्यारभरा रिश्ता नहीं रखते जैसा रखना चाहिए। बच्चों को उनके -माता -पिता को यह अवगत करना चाहिए कि वे किनसे मिलते हैं, कौन हैं उनके दोस्त, अपने भविष्य की योजना, करियर पर अपने माता-पिता को कॉन्फिडेंस में लेकर बात करें. लेकिन आज के समाज में ऐसा हो नहीं रहा है।
सवाल : अक्षय, आप और आपके माता -पिता में कैसा है रिश्ता ? क्या अपने दिल की बातें आप उनसे शेयर करते हैं?’
जवाब : मैंने रोहन जैसे लड़के समाज में देखे हैं इसीलिए इस किरदार के साथ रिलेट कर पाया। रोहन को पाल -पोसकर बड़ा करने वाली मां से किसी भी तरह की मदद लेना रोहन को अच्छा नहीं लगता. मेरा अपनी मां और पिता से दिल का गहरा रिश्ता है। मैं शूटिंग के बाद जैसे वक्त मिलता है मां और पिता से बात किए बिना नहीं रह सकता। मेरी उनसे बहुत इमोशनल बॉन्डिंग है, हमेशा रहेगी। शूटिंग दरमियान जब रोहन अपनी मां से रुखा बर्ताव करता है तो मैं बहुत इमोशनल हो जाता हूं. यह सोचकर कि क्यों हम बच्चे अपनी मां के जज्बातों को नहीं समझते? जरूरत है उन्हें समझने की, उनके साथ दो प्यारभरी बातें करने की। वैसे मैं भी मम्माज बॉय हूं.

सवाल : अक्षय , इस शो को करने से पहले आपने और क्या किया ? आपकी बैकग्राउंड तो अभिनय से नहीं है ?’
जवाब : मुंबई के पोद्दार कॉलेज में पढ़ते समय मैं थिएटर करता था। अभिनय करने की चाहत काफी पहले से थी लेकिन रास्ता समझ में नहीं आ रहा था। कॉमर्स की डिग्री लेने बाद मैंने एमबीए में एडमिशन ली। थिएटर करते समय किसी को -ऑर्डिनेटर ने मेरा प्ले देखा और कलर्स मराठी के शो ‘सावर रे ‘ में ब्रेक दिया। यह सब कुछ इतनीे तेजी से हुआ कि मुझे खुद यकीन नहीं हुआ और कहीं न कहीं यह समझ बैठा कि अब तो मुझे सामने से काम मिलने लगेगा। हुआ ठीक उल्टा. ‘कलर्स मराठी जैसे बड़े चैनल के शो को करने के बाद ही मेरा संघर्ष शुरू हुआ. बहुत पापड़ बेलने पड़े। अभिनय अनुभव , शक्ल अच्छी होने के बावजूद रिजेक्शन मिलता रहा. तब अहसास हुआ कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में गॉडफादर, मेंटॉर न हो तो कितना मुश्किल होता है काम पाना. बहुत वक्त लगा मुझे दूसरा ब्रेक मिलने तक। इस दौरान मैंने कुछेक मराठी फिल्म्स , डॉक्यूमेंटरीज, शॉर्ट फिल्म्स कीं। राजश्री प्रोडक्शंस के लिए एक शो किया। एक अहम् टीवी धारावाहिक ‘जी’ चैनल के लिए किया। उस शो का नाम था ‘पिया अलबेला ‘ इस शो ने मुझे पहचान दी। धीरे धीरे काम मिलने लगा , और अब यह शो कर रहा हूं.

Akshay mhatre

सवाल : संघर्ष के दौर में रिजेक्शन मिलने से डिप्रेशन आता है, आपने डिप्रेशन को कैसे हैंडल किया ?
जवाब : मेरी परवरिश मिडिल क्लास परिवार में हुई। अभिनय करना, मौका मिलना, संघर्ष करना कतई आसान नहीं है, यह मेरे साथ मेरे पेरेंट्स भी जानते थे। अभिनय के लिए अनगिनत ऑडिशंस देने पड़ते हैं. कई लोगों को, खासकर मेकर्स को मिलना पड़ता है. ढंग के कपड़े पहनने पड़ते हैं. एक लाइफस्टाइल जरूरी होती है लेकिन उसी स्टेज पर पिताजी ने मुझे यह सब मुहैया करवाया. मेरे पिताजी सेंट्रल रेलवे में काम करते हैं। मेरा अभिनय का पैशन पूरा करने के लिए कोई कसर उन्होंने छोड़ी नहीं. जब अगले मुकाम पर मुझे रिजेक्शन (अस्वीकार ) आते रहे, सबसे पहले मां और पिताजी ने मुझमें सकारात्मक ऊर्जा भरी वरना मैं निराशा से घिर जाता. आज मां और पिताजी के आशीर्वाद -सपोर्ट के कारण मैं बिना गॉडफादर -मेंटॉर आगे बढ़ रहा हूं।

सवाल : अभिनय में आपके आदर्श कौन है?
जवाब : ‘खान ‘ हीरोज मेरे आदर्श हैं. मेरे पसंदीदा एक्टर सलमान खान हैं. 25 वर्षों से अधिक समय से शाहरुख़, सलमान, आमिर शिखर पर राज कर रहे हैं जो आसान नहीं. अक्षय कुमार, अजय देवगन, अमिताभ बच्चन, नासिरुद्दीन, इरफ़ान, नवाजुद्दीन सिद्द्की के अभिनय को देखकर महसूस होता है कि ये सभी पाठशाला नहीं बल्कि एक्टिंग की यूनिवर्सिटीज हैं.

सवाल : नया क्या कर रहे हैं?
जवाब : ‘ मेरा पूरा फोकस इस समय ‘इंडिया वाली मां ‘ शो पर है। इसे बहुत पसंद किया जा रहा है. अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। अच्छे रोल टीवी, फिल्म्स, वेब शोज में काम मिले तो करता रहूंगा।

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