नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। खास तौर पर कांग्रेस उन सीटों पर अधिक फोकस करती दिखाई दे रही है जहां उसे हाल के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन मिला था या जहां उसके पास राजनीतिक पुनरुत्थान की संभावना मौजूद है। बरेली कैंट विधानसभा सीट भी ऐसी ही सीटों में शामिल है, जहां कांग्रेस ने अभी से अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। इस पूरी कवायद के केंद्र में कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नवाब मुजाहिद हसन खां हैं, जो एक बार फिर कैंट विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
पिछले दिनों कांग्रेस सांसद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम चेहरों में शामिल इमरान मसूद का बरेली दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इमरान मसूद ने यहां स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर न केवल संगठन की स्थिति का आकलन किया बल्कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का राजनीतिक फीडबैक भी जुटाया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने कैंट विधानसभा सीट समेत कई अहम सीटों की रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा दी है।
अब नजरें नवाब मुजाहिद हसन खां के प्रस्तावित दिल्ली दौरे पर टिकी हैं। आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि वह एक शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनके इस दौरे का असली मकसद आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी दावेदारी को और मजबूत करना है।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है। पार्टी नेतृत्व अब उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहां कांग्रेस उम्मीदवारों को अच्छा समर्थन मिला था या जहां जीत और हार का अंतर बेहद कम रहा था। बरेली कैंट विधानसभा सीट इस पैमाने पर कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कैंट सीट पर पिछले चुनावों में मुकाबला हमेशा दिलचस्प रहा है। यहां जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा और यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व इसे संभावनाओं वाली सीट के रूप में देख रहा है। पार्टी मानती है कि यदि सही सामाजिक समीकरण और मजबूत उम्मीदवार के साथ चुनाव मैदान में उतरा जाए तो यहां बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।
कैंट विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस की दावेदारी केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठनात्मक और ऐतिहासिक तर्क भी मौजूद हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ था। उस समय बरेली कैंट विधानसभा सीट कांग्रेस के हिस्से में आई थी और यहां से नवाब मुजाहिद हसन खां ने चुनाव लड़ा था।
नवाब मुजाहिद हसन खां के समर्थकों का कहना है कि यदि 2027 में भी विपक्षी एकता या किसी प्रकार का गठबंधन बनता है तो स्वाभाविक रूप से उन सीटों पर पहला दावा कांग्रेस का होना चाहिए, जहां वह पहले गठबंधन के तहत चुनाव लड़ चुकी है। उनके अनुसार, कैंट सीट पर कांग्रेस का दावा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और व्यावहारिक दोनों आधारों पर मजबूत है।
नवाब मुजाहिद हसन खां के समर्थक यह तर्क भी रखते हैं कि बरेली कैंट विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से समाजवादी पार्टी कभी यहां जीत दर्ज नहीं कर सकी। ऐसे में यदि विपक्षी गठबंधन की राजनीति होती है तो इस सीट पर कांग्रेस को मौका मिलना चाहिए।
उनका मानना है कि कांग्रेस नेता के पास यहां एक स्थापित संगठनात्मक ढांचा, पुराना वोट बैंक और सक्रिय कार्यकर्ताओं का नेटवर्क मौजूद है। यही कारण है कि वह लगातार इस सीट को कांग्रेस के खाते में बनाए रखने की पैरवी कर रहे हैं।
बरेली कैंट सीट की राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या और प्रभाव में कुछ वृद्धि हुई है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि मुस्लिम, दलित और परंपरागत कांग्रेस समर्थक वर्गों का एक हिस्सा फिर से पार्टी के साथ आता है तो यह सीट मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है।
यही वजह है कि कांग्रेस इस सीट पर अभी से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व भी स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेताओं को आगे बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा नवाब मुजाहिद हसन खां के आगामी दिल्ली दौरे को लेकर है। बताया जा रहा है कि वह अपने प्रवास के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। इन मुलाकातों में बरेली कैंट सीट की राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियां और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी अभी से संभावित उम्मीदवारों और मजबूत सीटों की पहचान करने में लगी हुई है। ऐसे में नवाब मुजाहिद हसन खां की सक्रियता को केवल व्यक्तिगत दावेदारी के रूप में नहीं बल्कि कांग्रेस की व्यापक चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।
नवाब मुजाहिद हसन खां की सक्रियता का असर उनके समर्थकों में भी दिखाई दे रहा है। कैंट क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जा रहा है कि पार्टी इस बार सीट को लेकर गंभीर है। इमरान मसूद के दौरे और अब दिल्ली में संभावित राजनीतिक मुलाकातों ने स्थानीय कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अभी टिकट वितरण में काफी समय है, लेकिन जो नेता शुरुआती दौर में अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं, वे भविष्य की राजनीति में बढ़त हासिल कर सकते हैं। इस लिहाज से नवाब मुजाहिद हसन खां ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराना शुरू कर दिया है।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर अभी चुनावी बिगुल नहीं बजा है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां यह संकेत देने लगी हैं कि 2027 की लड़ाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। पहले इमरान मसूद का बरेली आना और अब नवाब मुजाहिद हसन खां का दिल्ली जाने की तैयारी करना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली दरबार में नवाब मुजाहिद हसन खां की सक्रियता कितनी रंग लाती है और कांग्रेस आलाकमान बरेली कैंट सीट को लेकर क्या रणनीति बनाता है। लेकिन इतना तय है कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी का संदेश देना शुरू कर दिया है और नवाब मुजाहिद हसन खां इस पूरी कवायद के सबसे प्रमुख चेहरे बनकर उभर रहे हैं।




