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योगी के मिशन के लिए चुने गए थे लेखक राजेश शर्मा, बरेली मंडल के प्राचीन मंदिरों की तैयार की थी शानदार रिपोर्ट, साजिश करके बदनाम कर रहे कुछ असामाजिक तत्व, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

नीरज सिसौदिया, बरेली

तरक्की की राहों पर बढ़ते कदम अक्सर कुछ असामाजिक तत्वों की आंखों की किरकिरी बन जाते हैं। कुछ ऐसी ही साजिश का शिकार बनाया गया उपजा प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष और लेखक डॉ. राजेश शर्मा को। ये वही राजेश शर्मा हैं जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिन्दुत्व के मिशन को आगे बढ़ाने और बरेली मंडल के ऐतिहासिक मंदिरों के गौरवशाली इतिहास को शब्दों में सहेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। राजेश शर्मा ने कड़ी मशक्कत के बाद इन मंदिरों की गाथा को एक संकलन का रूप दिया और इस संकलन को संस्कृति विभाग एवं बरेली कमिश्नरेट में संजोया गया। हैरानी की बात है कि इस गौरवगाथा से संस्कृति विभाग एवं समाज को रूबरू कराने वाले राजेश शर्मा को कुछ अराजक तत्वों ने उस पोस्ट के लिए साजिश का शिकार बनाना चाहा जिसमें उन्होंने आधुनिक रामलीला के पात्रों के विकृत स्वरूप के खिलाफ आम जनमानस को जागरूक करने की पहल की थी।

हालांकि राजेश शर्मा ने यह पोस्ट खुद लिखी भी नहीं थी। उन्होंने तो महज अतुल कुमार की वर्षों पुरानी पोस्ट को मात्र शेयर किया था। हैरानी की बात है कि धर्म और भगवान श्री राम के प्रति लोगों को जागरूक करना कुछ असामाजिक तत्वों को रास नहीं आया और उन्होंने साजिश रचते हुए धार्मिक भावनाएं जागृत करने वाली पोस्ट को धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली पोस्ट बता दिया। उन असामाजिक तत्वों ने यह तक नहीं सोचा कि ऐसा करके वे लोग न सिर्फ आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी बदनाम कर रहे हैं।
राजेश शर्मा का हिन्दुत्व प्रेम किसी से छुपा नहीं है। अभी एक साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्राचीन राम जानकी मंदिर, प्राचीन हनुमान मंदिर और प्राचीन रामलीला स्थलों के अन्वेषण का आदेश दिया गया था। सभी मंडलों के कमिश्नर को संस्कृति विभाग की तरफ से पत्र जारी हुए कि अपने-अपने मंडलों में इन प्राचीन मंदिरों व स्थानों की खोज करके इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को दी जाए। बरेली में कमिश्नर ने जब मीटिंग ली तो सभी अधिकारियों की सहमति से यह तय हुआ कि बरेली के किसी लेखक, साहित्यकार प्रबुद्ध व्यक्ति को इस काम में लगाया जाए जिसे यहां की भौगोलिक जानकारी हो। इसके लिए तत्कालीन कमिश्नर ने राजेश शर्मा को अपने कार्यालय पर बुलाया। इस कार्य के लिए नोडल अफसर खाद एवं ड्रग कमिश्नर को बनाया गया था। लेकिन इस काम को स्थानीय व्यक्ति के तौर पर उपजा प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा को चुना गयी। राजेश शर्मा ने बरेली मंडल के चारों जिलों में जाकर प्राचीन राम मंदिरों, प्राचीन हनुमान मंदिरों और प्राचीन रामलीला स्थलों की खोज की और इसका एक संकलन तैयार कर कमिश्नर को सौंपा। जिसे कमिश्नर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय और उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय को प्रेषित किया।
इस दौरान राजेश शर्मा ने बरेली, बदायूँ, शाहजहांपुर और पीलीभीत के सभी मंदिरों का भ्रमण किया। राजेश शर्मा कहते हैं कि मुझे उस समय अलौकिक अनुभूतियां हुईं। मैंने ईश्वर का लाखों बार वंदन किया कि उसने मुझे ही इस कार्य के लिए चुना क्योंकि मैं शायद इतने सारे मंदिरों के दर्शन कभी न कर पाता और उनका इतिहास भी नहीं जान पाता।अपने मण्डल के इन सारे मंदिरों के दर्शन का ये परम सौभाग्य मुझे ईशकृपा से ही प्राप्त हुआ। नवम्बर और दिसंबर 2020 के दो माह कड़ाके की ठंड में भी राजेश शर्मा ने इस कार्य को संपादित किया।
राजेश शर्मा ने कहा कि अभी फ़ेसबुक की एक पोस्ट जो किसी अतुल कुमार की लिखी हुई थी मैंने अनजाने में अग्रसारित कर दी। इस बात से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुईं लेकिन मैं तो ईश्वर भक्त हूँ। मेरा तो हर दिन मंदिर जाना होता है। इस बात की पुष्टि सिविल लाइंस वाले हनुमानजी के मंदिर के पुजारी कर देंगे कि मैं ईश्वर के दर्शनों के बाद ही अपने दिन की शुरुआत करता हूं।भगवान के चरणों का जल धारण कर के ही कुछ खाता पीता हूं। मुझ पर जो आरोप लगाये गए वो मेरी मूल भावना और भक्ति के बिल्कुल विपरीत थे। फिर भी मैंने अपने मित्रों से माफी मांग ली थी।
अब विस्तार से मैं अपने मण्डल के इन सारे प्राचीन मंदिरों के बारे में लिखूंगा। जो रिपोर्ताज उत्तर प्रदेश सरकार को बना कर भेजे हैं उनका विस्तार कर के समाज और नई पीढ़ी को अपने गौरवपूर्ण धार्मिक इतिहास के प्रति जागरूक करूंगा।
बहरहाल, राजेश शर्मा की लोकप्रियता को दागदार करने का असामाजिक तत्वों का सपना पूरा नहीं हो पाया। संभावना जताई जा रही है कि ये लोग फिर से राजेश शर्मा को फंसाने का भरपूर प्रयास करेंगे।

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