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नहीं बनी मोदी सरकार और विपक्ष में सहमति, 50 साल में पहली बार होगा लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव, वोटिंग कल, पढ़ें कौन पड़ेगा भारी?

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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए सरकार और विपक्ष के बीच मंगलवार को आम-सहमति नहीं बन सकी और अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार तथा भाजपा सांसद ओम बिरला का मुकाबला कांग्रेस के कोडिकुन्नील सुरेश के साथ होगा। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदान बुधवार को होगा। बिरला और सुरेश ने मंगलवार को क्रमश: राजग और विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) के उम्मीदवारों के रूप में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। पिछली लोकसभा में भी अध्यक्ष रह चुके बिरला को राजग की तरफ से सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाया गया है। यदि वह बुधवार को हुए मतदान में जीत जाते हैं तो 25 साल में इस पद पर दोबारा आसीन होने वाले पहले व्यक्ति होंगे। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि बिरला का नाम राजग के सभी दलों ने सर्वसम्मति से तय किया और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह भी समर्थन हासिल करने के लिए विपक्ष के पास पहुंचे। बिरला ने नामांकन दाखिल करने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। वह राजस्थान के कोटा से लगातार तीसरी बार भाजपा के टिकट पर सदस्य निर्वाचित हुए हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए ललन सिंह ने कहा कि वे लोकसभा उपाध्यक्ष के पद पर तुरंत फैसला चाहते हैं, जबकि राजनाथ सिंह ने अनुरोध किया था कि चयन का समय आने पर सभी को एक साथ बैठना चाहिए और इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार के नाम पर सर्व सम्मति होती तो बेहतर होता। उन्होंने इस संबंध में शर्तें रखने के लिए विपक्ष की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को शर्तों पर नहीं चलाया जा सकता। सहमति नहीं बनने के बाद विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस नेता सुरेश को अपना उम्मीदवार बनाया और उन्होंने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेता एन के प्रेमचंद्रन ने बताया कि सुरेश ने नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल और द्रमुक नेता टी आर बालू लोकसभा अध्यक्ष के पद के लिए राजग उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय से बाहर आ गए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने उपाध्यक्ष पद विपक्ष को देने की प्रतिबद्धता नहीं जताई। इससे पहले, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि लोकसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिए जाने की परंपरा रही है और यदि नरेन्द्र मोदी सरकार इस परंपरा का पालन करती है तो पूरा विपक्ष सदन के अध्यक्ष के चुनाव में सरकार का समर्थन करेगा। उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताताओं से बातचीत में यह भी कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समर्थन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को फोन किया था और फिर से फोन करने की बात की थी, लेकिन अब तक उनका फोन नहीं आया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की उम्मीद करते हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता का अपमान किया जा रहा है। केरल से आठवीं बार लोकसभा पहुंचे सुरेश ने कहा कि यह हारने या जीतने का विषय नहीं है, बल्कि बात इस परंपरा की है कि लोकसभा अध्यक्ष सत्तारूढ़ दल का होगा और उपाध्यक्ष विपक्ष का रहेगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछली दो लोकसभाओं में उन्होंने उपाध्यक्ष पद हमें नहीं दिया और कहा कि आपको विपक्ष के रूप में मान्यता नहीं मिली है। अब हमें विपक्ष के रूप में मान्यता मिली है तो उपाध्यक्ष पद पर हमारा अधिकार है। लेकिन वे हमें इस पद को देने को तैयार नहीं हैं। हमने आज पूर्वाह्न 11.50 बजे तक सरकार के जवाब का इंतजार किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।” कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री के सहमति से काम करने के आह्वान के मात्र 24 घंटे के अंदर सरकार का यह रुख देखने को मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

ओम बिरला के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के लिए नड्डा ने की विपक्ष की आलोचना

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने मंगलवार को कांग्रेस को ‘आपातकाल के काले दिनों’ की याद दिलाते हुए उसपर तीखा हमला बोला और साथ ही लोकसभा अध्यक्ष पद के चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के लिए विपक्ष की आलोचना की। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के ओम बिरला के खिलाफ अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता के सुरेश को उम्मीदवार बनाया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल की 49वीं बरसी के मौके पर भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के मुद्दे पर कांग्रेस पर ‘पाखंड’ और ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्य विपक्षी दल की मानसिकता में लोकतंत्र के लिए कोई जगह नहीं है। नड्डा ने सवाल किया, ‘‘आज तक कभी भी लोकसभा के स्पीकर का चुनाव सशर्त हुआ है? ये (विपक्ष) कह रहे हैं कि डिप्टी स्पीकर तय करो तब हम स्पीकर को समर्थन देंगे।” उन्होंने कहा कि यह बात वह लोग कह रहे हैं जिन्होंने अपने शासन वाले राज्यों में खुद इसका पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में तेलंगाना में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर दोनों अपने बनाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कनार्टक में इनका ही स्पीकर और इनका ही डिप्टी स्पीकर है। ममता बनर्जी लोकतंत्र की बात करती हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में भी टीएमसी का ही स्पीकर और डिप्टी स्पीकर है। तमिलनाडु में इनका ही स्पीकर और इनका ही डिप्टी स्पीकर, केरल में वामपंथी दलों का स्पीकर और डिप्टी स्पीकर।” उन्होंने कहा, ‘‘हाथी के दांत दिखाने के कुछ और और खाने के कुछ और हैं। ये ऐसे लोग हैं जो पाखंड करते हैं और दोहरे मापदंड में जीते हैं। इनके मन में आज भी वही आपातकाल वाली सोच है। मेरी मानो नहीं तो हम आपके साथ जो व्यवहार करेंगे वह तो करेंगे।” नड्डा ने कहा कि यह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी जिसने 25 जून, 1975 को आपातकाल लगाकर देश के लोकतंत्र का गला घोंट दिया था और विरोध करने वालों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार किए थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘संविधान का कई बार अपमान और अनदेखी करने वालों ने खुद को संविधान रक्षक घोषित किया है।”

हार सुनिश्चित दिखती है तो कांग्रेस किसी दलित को उम्मीदवार बना देती है: चिराग पासवान

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण पदों पर जब उसे हार सुनिश्चित दिखती है तो वह किसी दलित नेता को ‘प्रतीकात्मक उम्मीदवार’ के रूप में मैदान में उतार देती है। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव में विपक्षी दलों की ओर से कोडिकुन्नील सुरेश को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दलित नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यह टिप्पणी की है। सरकार और विपक्ष के बीच मंगलवार को आम-सहमति नहीं बन सकी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार तथा भाजपा सांसद ओम बिरला का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी के. सुरेश के साथ होगा। सुरेश आठवीं बार सांसद बने हैं और वह दलित समुदाय से आते हैं। चिराग पासवान ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जब भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को पता चलता है कि उनकी हार सुनिश्चित है तो वे दलित कार्ड चल देते हैं।” पासवान ने कहा कि साल 2002 में उन्हें पता था कि वे उपराष्ट्रपति पद का चुनाव हार रहे हैं फिर भी उन्होंने सुशील कुमार शिंदे को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार 2017 में जब वे जानते थे कि वे राष्ट्रपति पद का चुनाव हार रहे हैं तो उन्होंने मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने कहा, ‘‘अब जब उनके पास स्पष्ट रूप से लोक सभा अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए संख्याबल नहीं है तो वे कांग्रेस के दलित के नेता के.सुरेश जी को नामांकित कर रहे हैं।” उन्होंने सवाल किया, ‘‘विपक्ष के लिए क्या दलित नेता केवल और केवल प्रतीकात्मक उम्मीदवार हैं?” लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदान बुधवार को होगा। संख्याबल के हिसाब से राजग उम्मीदवार बिरला का पलड़ा भारी है। बिरला और सुरेश ने मंगलवार को क्रमश: राजग और विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) के उम्मीदवारों के रूप में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।

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