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उमरा करके लौटे डॉ. अनीस बेग, सपा महानगर अध्यक्ष ने दी मुबारक बाद, अस्पताल जाकर मिले गले

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और मैक्स लाइफ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड फहमी आईवीएफ सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अनीस बेग उमरा यात्रा पूरी करके बरेली लौट आए हैं। उनकी सफल यात्रा के बाद बरेली पहुंचने पर समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी बुधवार को उनके अस्पताल पहुंचे और अनीस बेग को गले लगाकर उमरा करके लौटने की मुबारकबाद दी।
बता दें कि डॉ अनीस बेग अपनी पत्नी डॉ. फहमी खान एवं अन्य परिजनों के साथ लगभग एक सप्ताह पूर्व उमरा यात्रा के लिए बरेली से निकले थे। यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जाती है।
डॉ अनीस बेग एक प्रतिष्ठित चिकित्सक और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समाज में उनकी सेवाओं की बहुत प्रशंसा की जाती है। उनकी पत्नी डॉ. फहमी खान भी एक प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं और उन्होंने भी समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


उमरा और हज की यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह यात्रा उनके धार्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और उन्हें अपने धर्म के प्रति और अधिक जागरूक और समर्पित बनाती है।
डॉ अनीस बेग और उनकी पत्नी डॉ. फहमी खान उमरा के लिए जेद्दाह, सऊदी अरब होकर गए, जहां से वे मदीना और मक्का गए। इस यात्रा ने उन्हें इस्लाम के पवित्र स्थलों को देखने और अपने धर्म के प्रति और अधिक जागरूक और समर्पित बनने का अवसर प्रदान किया।


उमरा का मुख्य उद्देश्य अल्लाह के करीब आना है। डॉ. अनीस बेग ने उमरा के सभी अनुष्ठान पूरे किए जिनमें इहराम पहनना, तवाफ करना, सई करना और हलक या कुर्बानी शामिल है। इहराम एक विशेष प्रकार का वस्त्र होता है जिसे उमरा के दौरान पहना जाता है। तवाफ में काबा के चारों ओर सात बार चक्कर लगाना होता है। सई में सफा और मारवा के पहाड़ों के बीच सात बार दौड़ना शामिल होता है।
उमरा भाईचारे को मजबूत बनाता है। डॉक्टर अनीस बेग ने अपनी इस यात्रा के दौरान मुल्क में अमन-चैन और शांति एवं सौहार्द्र की दुआ मांगी। इस यात्रा को पापों की माफी और आध्यात्मिक शुद्धि का एक माध्यम भी माना जाता है।


डॉ. अनीस बेग की उमरा यात्रा एक प्रेरणादायी उदाहरण है जो यह संदेश देती है कि किस तरह हम अपने व्यस्त जीवन में भी आध्यात्मिकता को महत्व दे सकते हैं। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है। साथ ही मानवता के प्रति सेवा भावना को और मजबूत बनाता है।

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