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नई करवट लेने जा रही है फरीदपुर की सियासत, एक होने जा रहा है सबसे बड़ा सियासी घराना, भूतपूर्व विधायक स्व. सियाराम सागर की पुण्यतिथि पर 15 जुलाई से शुरू होगा रिश्तों का नया सफर, पढ़ें क्या असर पड़ेगा फरीदपुर की सियासत पर?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर की सियासत में भूतपूर्व विधायक स्व. सियाराम सागर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पांच बार विधायक रहे सियाराम सागर के परिवार की गिनती फरीदपुर के सबसे बड़े सियासी घरानों में होती है। इस राजनैतिक घराने ने फरीदपुर को विधायक, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य भी दिए हैं। परिवार की तीन बेटियां सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर अधिकारी भी बन चुकी हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस परिवार में दूरियां बन गई थीं। यही वजह रही कि स्व. सियाराम सागर की राजनैतिक विरासत आगे नहीं बढ़ सकी और उनके निधन के बाद इस परिवार का कोई भी सदस्य विधानसभा की सीढ़ियां नहीं चढ़ सका। लेकिन अब बीते दौर के सभी गिले-शिकवे भुलाकर इस परिवार ने फिर से एकजुट होने का निर्णय लिया है। रिश्तों के इस नए सफर की शुरुआत मंगलवार 15 जुलाई से होने जा रही है।
स्व. सियाराम सागर के छोटे भाई और दो बार भुता के ब्लॉक प्रमुख रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रसेन सागर ने

स्व.सियाराम सागर को श्रद्धांजलि अर्पित करते चंद्रसेन सागर।
स्व. सियाराम सागर

बताया, ‘ 15 जुलाई को मेरे दिवंगत भाई स्व. सियाराम सागर की छठी पुण्यतिथि है। इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन श्री राम बख्स गोमती इंटर कालेज, खजुरिया संपत में सुबह 8 बजे किया जा रहा है। यहां परिवार के सभी सदस्य उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। उसके बाद प्रातः 10 बजे राम रहीम भवन पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस अवसर पर डी. के. सागर, विशाल सागर, विवेक सागर (पुत्रगण) अमीश सागर (फिल्म डायरेक्टर/लेखक मुंबई) (भतीजा) शुभम सागर, मयांक सागर, मुकुल सागर, वीर सागर (पौत्रगण) मीरा सिंह (पुत्री), राजकुमारी, कल्पना सागर, शीतू सागर (पुत्र वधू) सहित पूरा परिवार मौजूद रहेगा। हमारा पूरा परिवार उनकी पुण्यतिथि पर मिलकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। जो गिले-शिकवे थे वो सब बहुत पुरानी बात हो चुकी है। अब हम सभी एक हैं और हमेशा एक रहेंगे।’

विशाल सागर

बता दें कि सियाराम सागर वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और दोबारा विधायक बने। इसके बाद समाजवादी पार्टी का गठन हुआ और सियाराम सागर भी पार्टी का हिस्सा बने। वर्ष 1993 में वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और तीसरी बार विधायक बने। फिर वर्ष 2002 और 2012 में भी वह सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे।

चंद्रसेन सागर

सियाराम सागर की सबसे बड़ी ताकत उनके भाई थे। उनके छोटे भाई चंद्रसेन सागर उनका पूरा चुनाव प्रबंधन देखते थे। ठीक उसी तरह जिस तरह कभी शिवपाल सिंह यादव सपा संस्थापक और अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव का दाहिना हाथ हुआ करते थे। सियाराम सागर के निधन के बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले यह पूरा परिवार बिखर गया था। सियाराम सागर के पुत्र विशाल सागर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और चंद्रसेन सागर के पुत्र निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े। दोनों ही कुछ खास नहीं कर पाए। अब चंद्रसेन सागर वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए फरीदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावोदारी पुरजोर तरीके से कर रहे हैं। वह लगातार क्षेत्र में पीडीए पंचायतें भी कर रहे हैं।
मंगलवार से यह परिवार रिश्तों का नया सफर शुरू करने जा रहा है। अगर दोनों परिवार आगामी विधानसभा चुनाव तक एकजुट रहे तो फरीदपुर विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही सपा नेता और पूर्व विधायक विजयपाल सिंह के टिकट पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लगातार दो बार से पराजय का सामना कर रहे विजयपाल सिंह पर इस बार भी सपा दांव लगाएगी यह कहना मुश्किल है। खासकर तब जबकि फरीदपुर का सबसे बड़ा सियासी घराना फिर से एक हो रहा है।

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