नीरज सिसौदिया, बरेली
नाथ नगरी की सियासत में ब्राह्मणों का कुछ न कुछ प्रभाव हमेशा से रहा है। इन दिनों यहां के सियासतदानों में खुद को ब्राह्मण नेता के तौर पर स्थापित करने की होड़ लगी हुई है। इनमें युवा नेता और नए चेहरे भी शामिल हैं। इनमें अनिल शर्मा, रामगोपाल मिश्रा, उमेश गौतम, राघवेंद्र शर्मा और राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं तो वहीं, चित्रा मिश्रा, पवन मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा और पंडित दीपक शर्मा जैसे उभरते हुए चेहरे भी हैं।
अनिल शर्मा एक दौर में बरेली की राजनीति में अहम मुकाम रखते थे। वह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में रहने के बाद भाजपा में शामिल हुए हैं। उनके साथ बड़ी तादाद में ब्राह्मण समाज जुड़ा हुआ था। समाज का कोई भी कार्यक्रम हो, अनिल शर्मा की मौजूदगी उसमें जरूर होती थी। वह जब-जब विधानसभा चुनाव लड़े, ब्राह्मणों ने उनका पूरा साथ दिया। यह बात अलग है कि वह चुनाव जीत नहीं सके लेकिन ब्राह्मणों का उनके प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ।

वह दो समाजवादी पार्टी से जब शहर विधानसभा सीट से चुनाव हारे तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें एमएलसी का टिकट दे दिया लेकिन ऐन वक्त पर अनिल शर्मा का टिकट काटकर घनश्याम लोधी को दे दिया गया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने वाले अनिल शर्मा अंतत: भाजपा में शामिल हो गए। इन दिनों भी वह ब्राह्मण समाज की कई बड़ी संस्थाओं से जुड़े हैं। वह धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और कई साधु-संन्यासियों का भी उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है।

बताया जाता है कि अनिल शर्मा खुद को एक मजबूत ब्राह्मण नेता के तौर पर फिर स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें अपने खोए हुए रुतबे को वापस पाने का इंतजार है।
दूसरा नाम रामगोपाल मिश्रा का है। रामगोपाल मिश्रा का भी ब्राह्मण समाज पर अच्छा प्रभाव रहा है। उन्हें एक सशक्त ब्राह्मण नेता के तौर पर जाना जाता है। रामगोपाल मिश्रा कभी भाजपा में हुआ करते थे। वह भाजपा और बसपा से दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा के कई अहम पदों पर भी रह चुके हैं। वर्ष 2012 में रामगोपाल मिश्रा भाजपा उम्मीदवार राजेश अग्रवाल के खिलाफ चुनाव लड़े थे। वर्तमान में भी वो पूरी तरह सक्रिय हैं।
ब्राह्मण नेताओं में अगला चेहरा मेयर उमेश गौतम का है। उमेश गौतम काफी प्रयासों के बावजूद ब्राह्मण नेता के तौर पर खुद को स्थापित नहीं कर पाए हैं। उमेश गौतम अपने मैनेजमेंट के दम पर टिकट ले आते हैं। उनकी पहचान ‘धन नेता’ वाली बनकर रह गई है। लोगों का मानना है कि जब तक पैसा और पद है, तभी तक उमेश गौतम ब्राह्मण चेहरा हैं। वह इस समाज पर व्यक्तिगत पकड़ स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

बरेली का सबसे बड़ा ब्राह्मण चेहरा बिथरी के पूर्व विधायक राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का है। पप्पू भरतौल एकमात्र ऐसे ब्राह्मण चेहरा हैं जो बरेली मंडल के साथ ही मुरादाबाद मंडल और उसके बाहर भी कई अन्य जिलों पर पकड़ रखते हैं।


बिथरी विधायक डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा विधायक बनने के बावजूद खुद को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर स्थापित करने में नाकाम रहे हैं। उनकी जगह पप्पू भरतौल का कद बढ़ता जा रहा है।
ये हैं उभरते हुए चेहरे
उभरते हुए ब्राह्मण चेहरों में सबसे पहला नाम तीन बार की पार्षद और बेहद कर्मठ भाजपा नेत्री चित्रा मिश्रा का है। वो अलग-अलग वार्डों से पार्षद रही हैं। शिक्षित और जुझारू नेत्री हैं और लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती हैं। उनकी यही खूबी उन्हें उभरती हुई ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पसंदीदा बनाती है।

ब्राह्मण समाज के साथ ही अन्य वर्गों पर भी उनका अच्छा प्रभाव है। आम तौर पर महिला नेता अपने पति की डमी के तौर पर पहचानी जाती हैं लेकिन चित्रा मिश्रा के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनकी अपनी एक अलग छवि है।
अगला चेहरा पवन मिश्रा का है। पवन मिश्रा युवा परशुराम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ब्राह्मण समाज को लेकर अक्सर कार्यक्रमों का आयोजन करवाते रहते हैं। वह युवाओं में काफी पसंद किये जाते हैं।

अगला नाम है ब्रजेश मिश्रा का है। ब्रजेश मिश्रा भाजपा का युवा चेहरा हैं। अपने समाज के अलावा अन्य वर्गों में भी अच्छी पैठ है। अपनी कर्मठता और सरल स्वभाव के कारण यह हर वर्ग में लोकप्रिय हैं। जमीन से जुड़ा चेहरा हैं, उनके पास दिखावे को कुछ नहीं है।

ब्राह्मण समाज से जुड़े सभी संगठनों के आयोजनों में उनकी उपस्थिति आम तौर पर देखने को मिलती है लेकिन उन्होंने कभी कोई पद किसी भी संगठन में मिलने के बावजूद नहीं लिया है। इसका एकमात्र उद्देश्य यह है कि वह खुद को पूरे ब्राह्मण समाज मेें मिलकर रहना चाहते हैं और खुद को निर्विवाद ब्राह्मण चेहरे के तौर पर स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए वो किसी एक संगठन के होकर नहीं रहना चाहते। वह रामपुर बाग से भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।

अगला चेहरा समाजवादी पार्टी के महानगर महासचिव पंडित दीपक शर्मा का है। वह बरेली में सपा का सबसे उभरता हुआ ब्राह्मण चेहरा हैं। ब्राह्मणों के साथ ही अन्य वर्गों और मुस्लिम समाज में भी गहरी पैठ रखते हैं।





