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दलितों, पिछड़ों और मज़दूरों के उत्पीड़न के खिलाफ तथा सरकारी स्कूलों के विलय के विरोध में सपा मज़दूर सभा ने दिया ज्ञापन

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नीरज सिसौदिया, बरेली

बरेली में सपा मज़दूर सभा ने दलितों, पिछड़ों और मज़दूरों के उत्पीड़न के खिलाफ तथा सरकारी स्कूलों के विलय के विरोध में एक ज्ञापन दिया। यह ज्ञापन राज्यपाल, लखनऊ, उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी, बरेली को संबोधित था।

ज्ञापन में उठाई गई मांगें

सपा मज़दूर सभा ने अपने ज्ञापन में पांच सूत्रीय मांगें उठाई हैं:

1. मनरेगा मजदूरों के लिए कार्य दिवस और मज़दूरी : मनरेगा मजदूरों को वर्ष में 300 दिनों का कार्य दिवस व रु.600 प्रतिदिन की मज़दूरी हो।
2. श्रम पोर्टल की बहाली: श्रम पोर्टल को तत्काल खोल दिया जाए तथा लाभार्थी को इसका लाभ दिया जाए।
3. पुराने श्रम कानूनों की बहाली: पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए तथा नए श्रम संहिता को समाप्त किया जाए।
4. प्राथमिक विद्यालयों के विलय को रोकना: प्रदेश के लगभग 5 हजार प्राथमिक विद्यालय को बंद होने से रोका जाए।
5. दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न बंद हो: पुलिस द्वारा दलितों पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न बंद हो।

सपा मज़दूर सभा के महानगर अध्यक्ष अशफाक चौधरी ने  राज्यपाल  से प्रार्थना की है कि इन मांगों पर गौर किया जाए और इन्हें स्वीकार किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि अगर  राज्यपाल इन मांगों को स्वीकार करेंगी तो यह मज़दूरों के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा और मज़दूर वर्ग उनकी इस महान सेवा का आजन्म आभारी रहेगा।

ज्ञापन बरेली के समस्त पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं और समस्त मजदूर परिवार के साथ दिया गया।

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