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बाबा श्री नीलकंठ मंदिर के वार्षिकोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, सतीश चंद्र सक्सेना ‘मम्मा’ 2002 से लगातार निभा रहे अहम भूमिका, विशाल भंडारा 16 अप्रैल को

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली शहर के धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष स्थान रखने वाले राजेंद्र नगर स्थित बाबा श्री नीलकंठ मंदिर का वार्षिकोत्सव इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सात अप्रैल से शुरू हुआ यह भव्य धार्मिक आयोजन 15 अप्रैल तक चला, जबकि 16 अप्रैल को विशाल भंडारे के साथ इसका समापन होगा। मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और भगवान शिव की महिमा का श्रवण कर धर्मलाभ ले रहे हैं।

वार्षिकोत्सव के अंतर्गत इन दिनों शिवमहापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसका बुधवार को नौवां दिन रहा। कथा श्रवण के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। रात होते-होते पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।

इस बार कथा वाचन के लिए वृंदावन की प्रसिद्ध कथा वाचिका राध्या भारद्वाज को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने अपने मधुर और ओजस्वी वचनों से शिवमहापुराण की कथा को जीवंत कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव के विवाह, नीलकंठ स्वरूप, भक्तों पर कृपा और जीवन में धर्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके भावपूर्ण प्रवचन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या रोजाना कथा में पहुंच रही है।

मंदिर के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी स्थापना वर्ष 1999 में स्थानीय लोगों ने स्वर्गीय मोहनलाल के प्रयासों से की थी। उस समय क्षेत्रवासियों ने मिलकर इस मंदिर को एक धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया था। तभी से यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थापना के बाद से हर वर्ष यहां वार्षिकोत्सव, शिवमहापुराण कथा और अन्य धार्मिक आयोजन निरंतर होते आ रहे हैं।

स्थानीय पार्षद और शहप विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा का कहना है कि यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का भी केंद्र है। यही कारण है कि यहां दशहरा, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों पर भी भव्य आयोजन किए जाते हैं। हर साल बाहर से प्रसिद्ध कथावाचकों को बुलाकर धार्मिक कार्यक्रमों को विशेष स्वरूप दिया जाता है, जिससे नई पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ी रहे।

इस पूरे आयोजन में भाजपा के वरिष्ठ पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा की अहम भूमिका रहती है। वर्ष 2002 से लगातार इस क्षेत्र से पार्षद रहे सतीश मम्मा इस मंदिर और क्षेत्र के धार्मिक आयोजनों से शुरू से जुड़े रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के वार्षिकोत्सव को भव्य बनाने में उनकी विशेष रुचि रहती है और हर वर्ष वे व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं।

इस बार भी कथा स्थल की सजावट, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, पेयजल, प्रसाद वितरण और सुरक्षा व्यवस्था पर सतीश मम्मा ने विशेष ध्यान दिया। उनके साथ राजीव गुप्ता पार्षद, आशीष शर्मा, स्मिथ जौहरी, नरेश शास्त्री, विशाल कपूर, पवन अरोड़ा, एसडी शर्मा, एसबी सक्सेना और अनिल कुमार गुप्ता भी आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहे। सभी ने मिलकर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पवन अरोड़ा ने बताया कि वार्षिकोत्सव के दौरान रोजाना सुबह पूजा, दोपहर में भजन-कीर्तन और शाम को शिवमहापुराण कथा का आयोजन हो रहा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है। महिलाएं भी बड़ी संख्या में आयोजन से जुड़ी हुई हैं। प्रेरणा कपूर, पूर्व पार्षद माया सक्सेना, सीमा कपूर, पूजा सिंह, अनीता और लता यादव समेत कई महिलाओं ने भक्ति कार्यक्रमों और प्रसाद वितरण में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

मंदिर कमेटी के अनुसार 16 अप्रैल को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए अभी से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। भंडारे में क्षेत्र के सभी लोगों को आमंत्रित किया गया है। कमेटी का कहना है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का भी संदेश देता है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा श्री नीलकंठ मंदिर का यह वार्षिकोत्सव क्षेत्र की पहचान बन चुका है। हर वर्ष होने वाले इस आयोजन से लोगों की आस्था और भी मजबूत होती है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसमें उत्साह से शामिल होते हैं। कथा के माध्यम से लोगों को धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों की सीख मिलती है।

सतीश चंद्र सक्सेना ‘मम्मा’ ने कहा कि बाबा श्री नीलकंठ मंदिर क्षेत्र की आस्था का केंद्र है और यहां होने वाले आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर की स्थापना से लेकर आज तक स्थानीय लोगों का सहयोग ही इसकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। आने वाले समय में भी मंदिर परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।

कुल मिलाकर बाबा श्री नीलकंठ मंदिर का वार्षिकोत्सव इस बार भी भक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम बनकर सामने आया है। शिवमहापुराण कथा, वृंदावन की कथा वाचिका राध्या भारद्वाज के प्रवचन, सतीश मम्मा की सक्रियता और स्थानीय लोगों की सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया है। अब सभी को 16 अप्रैल के विशाल भंडारे का इंतजार है, जहां एक बार फिर पूरा क्षेत्र बाबा भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर नजर आएगा।

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