नीरज सिसौदिया, बरेली
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य और बरेली शहर विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा की ओर से बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर नीलकंठ मंदिर के पास एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक समरसता और संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने बाबा साहब के जीवन संघर्ष, उनके योगदान और सामाजिक न्याय के लिए किए गए प्रयासों को याद किया।

इस मौके पर सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जिन्होंने समाज के हर वर्ग को समान अधिकार दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बाबा साहब के विचारों को अपनाना और समाज में समानता, भाईचारा और न्याय की भावना को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संविधान के माध्यम से बाबा साहब ने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक आधार प्रदान किया है, जिसका लाभ आज हर नागरिक को मिल रहा है। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और बाबा साहब के योगदान को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए जो संघर्ष किया, वह सदैव प्रेरणादायक रहेगा। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।
इस अवसर पर राजीव गुप्ता (पार्षद), आशीष शर्मा, स्मिथ जौहरी, नरेश शास्त्री, विशाल कपूर, पवन अरोड़ा, एसडी शर्मा, एसबी सक्सेना, अनिल कुमार गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बाबा साहब को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में शामिल लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। आयोजन के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।

कुल मिलाकर यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि सभा रहा, बल्कि बाबा साहब के विचारों को समाज में फैलाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का एक सशक्त प्रयास भी साबित हुआ।





