नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा की राजनीति में अब तक जातीय समीकरण, दलगत निष्ठाएं और चुनावी सभाएं चर्चा का विषय बनती रही हैं, लेकिन वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पहली बार विकास का एक विस्तृत खाका गांव-गांव की चौपालों तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और फरीदपुर विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार चंद्रसेन सागर ने विधानसभा क्षेत्र के 112 गांवों में बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगाकर ऐसा राजनीतिक संदेश दिया है जिसकी चर्चा आज पूरे क्षेत्र में हो रही है।
इन होर्डिंगों में चंद्रसेन सागर ने जनता के सामने 15 बड़े संकल्प रखे हैं। इनमें फैक्ट्री मजदूरों को न्यूनतम 750 रुपये दैनिक मेहनताना, टूटी सड़कों और नालियों की समयबद्ध मरम्मत, नदियों और संपर्क मार्गों पर पुल-पुलियों का निर्माण, किसानों के लिए मंडी समिति और खरीद केंद्र, फतेहगंज पूर्वी को ब्लॉक का दर्जा, नए उद्योगों के जरिए रोजगार सृजन, छुट्टा पशुओं की समस्या का समाधान, युवाओं के लिए निशुल्क कोचिंग, खेल मैदान और रोजगार सहायता केंद्र, बेहतर बिजली-पानी-सफाई व्यवस्था, हर गांव में जनता दरबार और जन सहायता कार्यालय, बेटियों को स्थानीय उद्योगों एवं निजी संस्थानों में 50 प्रतिशत रोजगार आरक्षण, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग एवं सुरक्षित परिवहन, गरीब बेटियों के लिए विशेष शिक्षा एवं कौशल सहायता योजना, प्रोफेशनल कोर्स के साथ महिला कॉलेज तथा एमबीबीएस और आईआईटी में चयनित बेटियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति कोष जैसी घोषणाएं शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि फरीदपुर में शायद यह पहला अवसर है जब कोई प्रमुख टिकट दावेदार चुनाव से काफी पहले जनता को यह बताने का प्रयास कर रहा है कि यदि उसे विधायक बनने का अवसर मिला तो उसकी प्राथमिकताएं क्या होंगी। यही कारण है कि यह अभियान केवल पोस्टर और बैनरों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि पूरे क्षेत्र में बहस का विषय बन गया है।
सबसे पहले बात मजदूरों के लिए 750 रुपये दैनिक मेहनताना सुनिश्चित कराने के वादे की। फरीदपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनकी आय का मुख्य स्रोत फैक्ट्री और श्रम आधारित रोजगार हैं। महंगाई के लगातार बढ़ते दबाव के बीच मजदूरी का सवाल सीधे परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक रूप से देखें तो यह वादा उस वर्ग को केंद्र में रखता है जो चुनावी चर्चाओं में अक्सर सबसे ज्यादा संख्या में होने के बावजूद सबसे कम प्रतिनिधित्व पाता है। चंद्रसेन सागर ने मजदूरों की आय को मुद्दा बनाकर यह संकेत दिया है कि उनकी राजनीति केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं बल्कि आम आदमी की जेब से भी जुड़ी है।
इसके बाद टूटी सड़कों और नालियों की समयबद्ध मरम्मत का संकल्प आता है। देखने में यह एक सामान्य घोषणा लग सकती है, लेकिन वास्तव में यही वह समस्या है जिससे हर गांव और हर मोहल्ला प्रभावित होता है। खराब सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और कृषि सभी को प्रभावित करती हैं। वहीं जाम नालियां और खराब जल निकासी बरसात के दिनों में लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं। इसलिए यह वादा सीधे जनजीवन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
नदियों और संपर्क मार्गों पर पुल-पुलियों के निर्माण का वादा भी केवल निर्माण कार्य नहीं बल्कि विकास की बुनियादी जरूरत से जुड़ा विषय है। फरीदपुर क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां बरसात के दौरान आवागमन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में पुल-पुलियों का निर्माण ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि यह घोषणा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।
किसानों के लिए मंडी समिति और खरीद केंद्र स्थापित कराने का संकल्प कृषि प्रधान फरीदपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसान वर्षों से स्थानीय खरीद केंद्रों की मांग करते रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यदि स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र विकसित होते हैं तो किसानों की लागत घटेगी और उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह वादा सीधे कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में देखा जा रहा है।

फतेहगंज पूर्वी को ब्लॉक बनाने की घोषणा प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लंबे समय से यह मांग क्षेत्र में उठती रही है। ब्लॉक बनने से सरकारी योजनाओं का लाभ और प्रशासनिक सेवाएं लोगों तक तेजी से पहुंच सकती हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह घोषणा क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय विकास की भावना को भी मजबूत करती है।
चंद्रसेन सागर का नया उद्योग स्थापित करने और रोजगार के लिए होने वाले पलायन को रोकने का वादा युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। आज बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में अपने घर और परिवार छोड़कर दूसरे शहरों में जाने को मजबूर हैं। यदि स्थानीय स्तर पर उद्योग विकसित होते हैं तो रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। यह वादा केवल रोजगार नहीं बल्कि सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।
छुट्टा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान किसानों की सबसे बड़ी मांगों में से एक है। खेतों में फसलों को होने वाला नुकसान किसानों की आय पर सीधा असर डालता है। यह मुद्दा वर्षों से राजनीतिक भाषणों में उठता रहा है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदमों की अपेक्षा बनी रहती है। चंद्रसेन सागर ने इसे अपने प्रमुख संकल्पों में शामिल कर किसानों के दर्द को सीधे संबोधित करने का प्रयास किया है।
युवाओं के लिए निशुल्क कोचिंग, खेल मैदान और रोजगार सहायता केंद्र की योजना उनके विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों की कमी अक्सर युवाओं को पीछे छोड़ देती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल सुविधाओं और रोजगार मार्गदर्शन की व्यवस्था युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। यही कारण है कि यह घोषणा युवा वर्ग में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है।
बेहतर बिजली, पानी और सफाई व्यवस्था का वादा सुनने में भले साधारण लगे, लेकिन यही वे मूलभूत सुविधाएं हैं जिनके आधार पर किसी क्षेत्र के विकास का मूल्यांकन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इन सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसलिए यह संकल्प सीधे आम परिवारों के जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है।
हर गांव में जनता दरबार और जन सहायता कार्यालय स्थापित करने की घोषणा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अक्सर जनता और जनप्रतिनिधि के बीच दूरी की शिकायत रहती है। यदि स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान की व्यवस्था विकसित होती है तो लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इसे जवाबदेही आधारित राजनीति की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
हालांकि चंद्रसेन सागर के पूरे विजन में सबसे अधिक चर्चा महिलाओं और बेटियों के लिए की गई घोषणाओं की हो रही है। स्थानीय उद्योगों और निजी संस्थानों में बेटियों को 50 प्रतिशत रोजगार आरक्षण दिलाने की पहल ने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींचा है। यह घोषणा केवल नौकरी देने की बात नहीं करती बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का संदेश देती है।
उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग तथा सुरक्षित परिवहन सुविधा का वादा ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को पहचानता है। अक्सर प्रतिभाशाली छात्राएं संसाधनों और सुरक्षा संबंधी कारणों से अपने सपनों को पूरा नहीं कर पातीं। यह योजना उस बाधा को कम करने का प्रयास मानी जा रही है।
गरीब बेटियों की पढ़ाई और कौशल प्रशिक्षण के लिए विशेष सहायता योजना सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह केवल शिक्षा तक सीमित नहीं बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ी हुई है। वहीं प्रोफेशनल कोर्स के साथ महिला कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव क्षेत्र की लड़कियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
एमबीबीएस और आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में चयनित बेटियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति कोष बनाने की घोषणा भी दूरगामी सोच को दर्शाती है। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि उन परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जो अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं।
चंद्रसेन सागर के इन सभी संकल्पों को एक साथ देखें तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि उन्होंने फरीदपुर के लगभग हर वर्ग को अपने विजन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया है। मजदूर, किसान, युवा, महिलाएं, छात्र, व्यापारी और ग्रामीण परिवार—सभी के लिए अलग-अलग सोच और योजनाएं प्रस्तुत की गई हैं। यही वजह है कि 112 गांवों में लगे ये होर्डिंग केवल चुनावी प्रचार सामग्री नहीं बल्कि फरीदपुर के भविष्य को लेकर शुरू हुई एक नई राजनीतिक बहस के प्रतीक बन गए हैं।
राजनीति में अक्सर नेता जनता से समर्थन मांगते हैं, लेकिन चंद्रसेन सागर का यह अभियान समर्थन मांगने से पहले जवाबदेही का वादा करता दिखाई देता है। यही कारण है कि आज फरीदपुर में चर्चा केवल इस बात की नहीं हो रही कि चुनाव कौन लड़ेगा, बल्कि इस बात की भी हो रही है कि क्षेत्र के विकास का सबसे स्पष्ट रोडमैप किसके पास है।




