नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव केवल रैलियों, नारों और भीड़ जुटाने से नहीं जीते जाते, बल्कि विचारों को जमीन तक पहुंचाने और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की क्षमता भी किसी नेता की राजनीतिक ताकत तय करती है। बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे डॉ. अनीस बेग इन दिनों इसी रणनीति पर काम करते दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय से पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पंचायतों और सम्मेलनों के माध्यम से संगठन को मजबूत करने में जुटे डॉ. अनीस बेग ने अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीडीए विचार गोष्ठियों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पहल केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी के मूल संदेश और पीडीए अवधारणा को घर-घर तक पहुंचाने की एक गंभीर कोशिश है। यही कारण है कि बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में डॉ. अनीस बेग की सक्रियता लगातार बढ़ती हुई दिखाई दे रही है और उनकी टिकट की दावेदारी भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है।
राजनीति में अक्सर देखा जाता है कि नेता बड़ी सभाओं और सम्मेलनों के जरिए अपनी ताकत दिखाने का प्रयास करते हैं। लेकिन डॉ. अनीस बेग ने इस पारंपरिक तरीके से अलग रास्ता चुना है। उन्होंने पीडीए पंचायतों के साथ-साथ छोटी-छोटी विचार गोष्ठियों को भी अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाया है।
रविवार को कैंट विधानसभा क्षेत्र के मढ़ीनाथ इलाके में आयोजित पीडीए विचार गोष्ठी इसी रणनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। यह कार्यक्रम अक्षित यादव और नीरू यादव के आवास पर आयोजित किया गया, जहां विभिन्न सामाजिक वर्गों और समुदायों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो ऐसी गोष्ठियां नेताओं को सीधे लोगों से संवाद स्थापित करने का अवसर देती हैं। यहां केवल भाषण नहीं होते बल्कि लोगों की समस्याओं, राजनीतिक परिस्थितियों और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा भी होती है। यही वजह है कि डॉ. अनीस बेग अब पीडीए आंदोलन को केवल नारे तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उसे एक वैचारिक अभियान का रूप देने का प्रयास कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिए गए पीडीए फॉर्मूले को उत्तर प्रदेश की राजनीति में पार्टी की सबसे बड़ी रणनीति माना जा रहा है। इस फॉर्मूले का उद्देश्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाना है।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर डॉ. अनीस बेग इस फॉर्मूले को सबसे अधिक सक्रियता के साथ आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल हैं। पिछले कई महीनों से वह लगातार पीडीए पंचायतों का आयोजन कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है।
अब पीडीए विचार गोष्ठियों के जरिए वे इस अभियान को वैचारिक मजबूती देने में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी राजनीतिक अभियान को लंबे समय तक प्रभावी बनाना है तो केवल संगठनात्मक गतिविधियां पर्याप्त नहीं होतीं, उसके पीछे मजबूत विचारधारा भी होनी चाहिए। डॉ. अनीस बेग की नई पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मढ़ीनाथ में आयोजित गोष्ठी में यादव, कश्यप, मौर्य, वाल्मीकि और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि डॉ. अनीस बेग अपनी राजनीति को किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहते।
कार्यक्रम में हैप्पी यादव, राम प्रकाश यादव उर्फ लल्ला भैया, अमर सिंह, चरण सिंह, नवीन कश्यप, मुकेश मौर्य, यशवीर सिंह यादव, एस. वरुण मौर्य, शरद यादव, सुमित यादव, प्रोफेसर अनिल यादव, सुरेश कुमार यादव, रोहित कश्यप, लकी वाल्मीकि, कुलदीप वाल्मीकि, आदिल बेग और नदीम अंसारी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विभिन्न सामाजिक समूहों की यह भागीदारी बताती है कि डॉ. अनीस बेग लगातार अपने जनाधार का विस्तार करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता को केवल मुस्लिम समाज की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि वे व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के कई नेता सक्रिय हैं और टिकट की दौड़ में भी कई नाम चर्चा में रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में जिस तरह से डॉ. अनीस बेग लगातार क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिए हैं, उसने उन्हें प्रमुख दावेदारों की कतार में खड़ा कर दिया है।

चाहे पीडीए पंचायतों का आयोजन हो, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी हो या फिर लोगों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना, डॉ. अनीस बेग ने हर स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यही कारण है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उनकी स्वीकार्यता बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट वितरण के समय केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता ही नहीं देखी जाती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि कौन नेता संगठन को कितना मजबूत कर रहा है और पार्टी की विचारधारा को कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है। इस कसौटी पर डॉ. अनीस बेग लगातार खुद को मजबूत स्थिति में पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. अनीस बेग की राजनीतिक शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि वे केवल जनसंपर्क तक सीमित नहीं हैं। एक ओर वे लगातार लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी की विचारधारा को भी मजबूती से प्रस्तुत कर रहे हैं।
पीडीए पंचायतों से लेकर विचार गोष्ठियों तक उनका फोकस यही है कि समाजवादी पार्टी का संदेश केवल कार्यकर्ताओं तक न रहे बल्कि आम लोगों तक भी पहुंचे। यही कारण है कि उनके कार्यक्रमों में राजनीतिक चर्चा के साथ-साथ सामाजिक और वैचारिक मुद्दों को भी प्रमुखता दी जा रही है।

विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे समय में डॉ. अनीस बेग का पीडीए विचार गोष्ठियों का अभियान यह संकेत देता है कि वे चुनावी तैयारी को केवल पोस्टर और बैनर तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि एक मजबूत सामाजिक और वैचारिक आधार तैयार करने में जुटे हैं।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर उनकी लगातार बढ़ती सक्रियता, विभिन्न समाजों के बीच बढ़ता संपर्क और पीडीए अभियान को नई दिशा देने की कोशिश यह बताती है कि वे अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में डॉ. अनीस बेग का नाम आज कैंट सीट के सबसे गंभीर और मजबूत दावेदारों में शुमार किया जा रहा है। उनके हालिया कार्यक्रमों ने यह संदेश भी दिया है कि वे केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि संगठन, विचार और समाज को साथ लेकर चलने वाली राजनीति की जमीन भी तैयार कर रहे हैं।






