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अंबेडकर जयंती पर बरेली की सबसे बड़ी शोभायात्रा में दिखे सियासत के कई रंग, छाये रहे समाजवादी पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे, इंजीनियर अनीस अहमद खां, डॉक्टर अनीस बेग और राजेश अग्रवाल, नजर नहीं आया भाजपा का कोई बड़ा चेहरा

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नीरज सिसौदिया, बरेली

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बरेली शहर पूरी तरह अंबेडकरमय नजर आया। शहर के अलग-अलग इलाकों में सुबह से देर रात तक जयंती समारोह, माल्यार्पण, शोभायात्राएं, विचार गोष्ठियां और स्वागत कार्यक्रमों की जैसे बाढ़ सी आ गई। भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए और उनमें भागीदारी भी निभाई। हर तरफ बाबा साहेब के विचार, सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा जैसे मुद्दों की गूंज सुनाई दी।

लेकिन इन तमाम आयोजनों के बीच शहर में निकली सबसे बड़ी अंबेडकर जयंती शोभायात्रा ने राजनीतिक हलकों में अलग ही चर्चा छेड़ दी। इस विशाल शोभायात्रा के स्वागत में जहां समाजवादी पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे पूरे मार्ग पर छाए रहे, वहीं मेयर उमेश गौतम को छोड़कर भाजपा और अन्य दलों के बड़े चेहरे इस मार्ग पर कहीं सक्रिय रूप से नजर नहीं आए। खासतौर पर भाजपा नेताओं की अनुपस्थिति ने शहर की सियासत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहर की इस भव्य और विशाल अंबेडकर जयंती शोभायात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सामाजिक संगठनों की ओर से निकाली गई इस शोभायात्रा में दलित समाज की बड़ी भागीदारी रही। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, कारें, मोटरसाइकिलें, डीजे वाहन और बाबा साहेब के जीवन व विचारों पर आधारित आकर्षक झांकियां शोभायात्रा की शान बढ़ा रही थीं। लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबी यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसे देखने के लिए जगह-जगह लोगों की भीड़ उमड़ती रही।

इस शोभायात्रा के स्वागत में सबसे प्रमुख रूप से समाजवादी पार्टी के तीन चेहरे सामने आए। पहला नाम बरेली कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी **राजेश अग्रवाल** का रहा। उन्होंने साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज के पास भव्य स्वागत कैंप लगाया। यहां शोभायात्रा में शामिल अंबेडकरवादियों पर फूलों की बारिश की गई, उन्हें शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया और जलपान की विशेष व्यवस्था भी की गई। राजेश अग्रवाल देर रात तक अपने समर्थकों के साथ मौके पर डटे रहे और हर गुजरते जत्थे का गर्मजोशी से स्वागत करते नजर आए।

दूसरा प्रमुख चेहरा कैंट विधानसभा सीट से सपा के ही एक और मजबूत दावेदार **डॉ. अनीस बेग** का रहा। उन्होंने नॉवल्टी चौराहे पर अपने समर्थकों के साथ शानदार स्वागत मंच तैयार कराया। शोभायात्रा के वहां पहुंचते ही फूलों की वर्षा, बाबा साहेब के जयघोष और स्वागत नारों से माहौल गूंज उठा। डॉ. अनीस बेग ने बड़ी संख्या में पहुंचे अंबेडकरवादियों को शॉल पहनाकर सम्मानित किया और जलपान की व्यवस्था के जरिए अपनी सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव का संदेश दिया। देर रात तक उनका कैंप शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण बना रहा।

तीसरा प्रमुख चेहरा इंजीनियर अनीस अहमद खां का रहा, जो कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अय्यूब खां चौराहे पर स्वागत कैंप लगाकर शोभायात्रा में शामिल लोगों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। उनके कैंप पर भी फूल बरसाए गए, शॉल भेंट की गई और लोगों के लिए जलपान की बेहतरीन व्यवस्था की गई। उनके समर्थकों ने पोस्टर-बैनर के जरिए भी अपनी मौजूदगी को मजबूत ढंग से दर्ज कराया।

दिलचस्प बात यह रही कि शोभायात्रा मार्ग पर इन तीनों नेताओं के पोस्टर-बैनर और स्वागत कैंप दूर-दूर तक दिखाई दिए, लेकिन भाजपा का कोई प्रमुख स्वागत कैंप या मंच नजर नहीं आया। जबकि शहर में भाजपा के कई नेता अलग-अलग स्थानों पर अंबेडकर जयंती कार्यक्रमों में शामिल हुए थे, फिर भी इस सबसे बड़ी शोभायात्रा के मार्ग पर उनकी गैरमौजूदगी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक जानकार इसे शहर के दलित वोट बैंक के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि यह शोभायात्रा किसी राजनीतिक दल की ओर से आयोजित नहीं की गई थी। इसे सामाजिक संगठनों और अंबेडकरवादी समूहों ने मिलकर आयोजित किया था। यही वजह रही कि इसमें आम जनता की भागीदारी बहुत बड़ी संख्या में दिखाई दी। दलित समाज के अलावा अन्य वर्गों के लोग भी इसमें शामिल हुए और बाबा साहेब के विचारों के समर्थन में नारे लगाते नजर आए।

शोभायात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका काफिला कई किलोमीटर तक फैला रहा। सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर बाबा साहेब की झांकियां सजाई गई थीं। कई झांकियों में संविधान, शिक्षा, सामाजिक समानता और दलित चेतना के संदेश दिए गए। मोटरसाइकिल सवार युवाओं के जत्थे नीले झंडों और बाबा साहेब के जयकारों के साथ पूरे जोश में आगे बढ़ रहे थे। शहर के कई इलाकों में लोगों ने अपने घरों और दुकानों से भी फूल बरसाकर स्वागत किया।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इस शोभायात्रा ने कैंट विधानसभा सीट की सियासत को नया रंग दे दिया है। समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे राजेश अग्रवाल, डॉ. अनीस बेग और इंजीनियर अनीस अहमद खां ने जिस तरह अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, उससे साफ संकेत गया कि तीनों नेता दलित समाज में अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुटे हैं। स्वागत के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सम्मान और राजनीतिक संदेश दोनों देने की कोशिश की।

इसी बीच समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी भी इस आयोजन में अहम भूमिका निभाते नजर आए। हालांकि पार्टी की ओर से शोभायात्रा के लिए अलग से कोई विशेष कैंप नहीं लगाया गया था, लेकिन शमीम खां सुल्तानी डॉ. अनीस बेग और इंजीनियर अनीस अहमद खां के मंच से अंबेडकरवादियों का सम्मान करते दिखाई दिए। उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन में सपा की राजनीतिक सक्रियता को और स्पष्ट कर दिया।

शहर के राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि अंबेडकर जयंती के इस बड़े आयोजन ने कैंट विधानसभा सीट पर सपा के संभावित दावेदारों के बीच शक्ति प्रदर्शन का मंच भी तैयार कर दिया। खासतौर पर दलित समाज की बड़ी भागीदारी वाले इस आयोजन में सक्रिय रहकर इन नेताओं ने अपने-अपने जनाधार का संदेश देने की कोशिश की। वहीं सपा के ही समर्थ मिश्रा ने भी कालीबाड़ी में कैंप लगाकर शोभायात्रा का स्वागत किया।

भाजपा की गैरमौजूदगी को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे रणनीतिक चूक मान रहे हैं, तो कुछ इसे स्थानीय स्तर की प्राथमिकताओं से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि भाजपा नेताओं ने शहर के अन्य हिस्सों में कई कार्यक्रम किए, लेकिन इस सबसे बड़ी शोभायात्रा में स्वागत मंचों की कमी ने राजनीतिक बहस को जरूर जन्म दिया है।

कुल मिलाकर, बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर निकली इस भव्य शोभायात्रा ने न केवल सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया, बल्कि बरेली की सियासत में भी नए संकेत छोड़ दिए। समाजवादी पार्टी के तीन नेताओं—राजेश अग्रवाल, डॉ. अनीस बेग और इंजीनियर अनीस अहमद खां—की सक्रियता ने यह साफ कर दिया कि दलित समाज के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाने की होड़ तेज हो चुकी है। यही वजह है कि इस आयोजन की चर्चा अब भी पूरे शहर में जोरों पर है और आने वाले दिनों में इसका असर स्थानीय राजनीति पर भी साफ दिखाई दे सकता है।

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