नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली ज़िले की राजनीति उत्तर प्रदेश की विधानसभा की दिशा तय करने में हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। यहां के नौ विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक समीकरणों का संतुलन जीत-हार का फैसला करता रहा है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जो एक समुदाय सबसे चुपचाप लेकिन निर्णायक ताकत बनकर उभर रहा है, वह है धोबी समाज। बरेली की राजनीति में धोबी समाज अब न सिर्फ संख्या की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि संगठन और नेतृत्व के लिहाज से भी तैयार हो रहा है। धोबी समाज के नेता और सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समाज अब सिर्फ वोट देने वाला नहीं, बल्कि नेता चुनने वाला और सरकार बनाने वाला समाज बनना चाहता है। वर्ष 2027 के चुनाव में सभी बड़ी पार्टियों के लिए यह एक चेतावनी है। अब तक जिन वोटों को ये दल ‘गिन’ तो रहे थे, लेकिन उनकी ‘सुन’ नहीं रहे थे, वो अब जवाब देंगे। अब तक विभिन्न दलों में बिखरे हुए इस समाज ने इस बार अपनी राजनीतिक एकता की निर्णायक पहल कर दी है। सर्वजन आम पार्टी के गठन और उसके नेतृत्वकर्ता जयप्रकाश भास्कर के शानदार राजनीतिक अभियान ने पूरे जिले के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
इस बार सर्वजन आम पार्टी के बैनर तले धोबी समाज एकजुट होता नजर आ रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर खुद भी इसी समाज से आते हैं और बरेली जिले में अपने समाज में गहरी पैठ रखते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से लगभग तीन साल पहले ही मूलत: धोबी समाज पर आधारित सर्वजन आम पार्टी का गठन करके उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि इस बार धोबी समाज के वोटों का बंटवारा बिल्कुल भी नहीं होने देंगे। सर्वजन आम पार्टी ने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया है कि यह पार्टी केवल “वोट कटवा” नहीं, बल्कि “वोट निर्धारक” भूमिका निभाने आई है।
जयप्रकाश भास्कर ने अपने शुरुआती बयानों में साफ कर दिया है, “अब हमारे वोटों का बंटवारा नहीं होगा। अब हम टिकट लेने और सरकार बनाने आए हैं, हमारा समाज सिर्फ तालियां बजाने के लिए नहीं है। हमें भी समाज में अपनी भागीदारी के अनुसार ही हिस्सेदारी भी चाहिए।” उनका यह बयान सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति का उद्घोष था। इसका असर राजनीतिक हलकों में महसूस किया जाने लगा है।
क्या कहते हैं बरेली जिले में धोबी समाज के आंकड़े
धोबी समाज के कुल मतदाता: 1,88,000
विधानसभा क्षेत्रवार अनुमानित धोबी मतदाता
फरीदपुर 38,000
बिथरी चैनपुर 22,000
आँवला 17,000
बहेड़ी 15,000
नवाबगंज 20,000
मीरगंज 22,000
भोजीपुरा 18,000
कैंट 16,000
शहर 20,000
इनमें फरीदपुर, मीरगंज, बिथरी, नवाबगंज और भोजीपुरा जैसी सीटों पर तो धोबी समाज सीधे-सीधे हार-जीत तय कर सकता है।
क्या है सर्वजन आम पार्टी की रणनीति?
बरेली जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों पर धोबी समाज के सक्रिय कार्यकर्ताओं की टोली बना दी गई है। जयप्रकाश भास्कर खुद फरीदपुर, मीरगंज, और नवाबगंज जैसे इलाकों में जनसंपर्क और पार्टी का विस्तार करने में जुट गए हैं। पार्टी का स्पष्ट दावा है कि वह धोबी समाज के साथ-साथ अन्य वंचित वर्गों को भी जोड़ेगी। पार्टी सिर्फ समाज का नाम नहीं ले रही, वह ग्राम और वार्ड स्तर पर सांगठनिक ढांचा भी तैयार कर रही है। यह बात अन्य दलों के लिए चुनौती बन चुकी है।
राजनीतिक दलों की रणनीति अब कैसे बदलेगी?
भाजपा, बसपा और सपा के लिए यह नई पार्टी एक वोटबैंक काटने वाली ताकत नहीं, बल्कि निर्णायक बुनियाद बन सकती है। भाजपा के लिए शहरी क्षेत्रों और ओबीसी वर्गों में बढ़ती असहमति का संकेत मिल रहा है। सपा के लिए पारंपरिक मतदाताओं में दरार पड़ सकती है। वहीं, बसपा के लिए अपने ही सामाजिक आधार को खो देने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, बसपा पहले से ही काफी कमजोर हो चुकी है। अब सर्वजन आम पार्टी के उदय से धोबी समाज भी उससे पूरी तरह कटने की संभावना जताई जा रही है।
अगर धोबी समाज के वोटर एकजुट हो जाएं तो क्या होगा?
यदि 1.88 लाख धोबी वोटरों में से सिर्फ 60% भी गोलबंद होकर एक पार्टी को वोट दें, यानी लगभग 1,12,000 वोट तो बरेली की कम से कम 5 सीटों पर सीधा असर पड़ सकता है। यह असर दो रूपों में आएगा। पहला सर्वजन आम पार्टी की निर्णायक भूमिका के रूप में और दूसरी दूसरे दलों को हराकर परिणाम को उलट सकती है। अब तक दलित जातियों में बरेली जिले में सिर्फ जाटव ही एकजुट नजर आते थे और धोबी समाज को अपनी ताकत का अहसास नहीं था। लेकिन अब जयप्रकाश भास्कर ने सर्वजन आम पार्टी के माध्यम से धोबी समाज को उनकी ताकत का अहसास कराना शुरू कर दिया है और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समूचा धोबी समाज निश्चित तौर पर अपनी इस ताकत को पूरी तरह पहचान लेगा।





