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खटिया डालकर निगम की खाट खड़ी करने की मम्मा ने दी थी चेतावनी, धरना-प्रदर्शन की चेतावनी से हिला निगम, शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के सबसे प्रबल दावेदार सतीश सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा की जिद रंग लाई, इंदिरा नगर में शुरू हुआ सीवर सफाई अभियान

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नीरज सिसौदिया, बरेली

वार्ड संख्या 23 इंदिरा नगर में महीनों से बिगड़ी सीवर व्यवस्था पर आखिरकार निगम को काम शुरू करना पड़ा। लेकिन यह कदम तब उठाया गया जब वार्ड पार्षद सतीश चंद्र कातिब मम्मा ने निगम को साफ चेतावनी दी कि अगर सफाई कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। साथ ही खटिया डालकर खुद नगर निगम में बैठ जाएंगे। मम्मा की यह दबंग पहल रंग लाई और शुक्रवार की सुबह खुद नगर आयुक्त पूरी टीम के साथ इंदिरा नगर पहुंचे।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने सीवर लाइन के कई ढक्कन खुलवाकर सफाई कार्य की प्रगति देखी। पार्षद मम्मा उनके साथ मौजूद रहे और उन्होंने साफ कहा कि “जनता की समस्या ही मेरी समस्या है। जब तक सीवर की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं होती, मैं चैन से बैठने वाला नहीं हूं। जरूरत पड़ी तो जनता के साथ सड़क पर भी उतरूंगा।”

सतीश कातिब मम्मा की यह जुझारू छवि और जनता के लिए हर समय खड़े रहने का स्वभाव उन्हें अन्य पार्षदों से अलग बनाता है। क्षेत्र के लोग कहते हैं कि मम्मा से संपर्क करना बेहद आसान है—चाहे फोन पर, व्हाट्सएप ग्रुप पर या उनके घर जाकर। शिकायत सुनना ही नहीं बल्कि तुरंत कार्रवाई कराना उनकी पहचान बन चुकी है।

विधानसभा की दौड़ में मम्मा सबसे आगे

वार्ड स्तर से आगे बढ़कर अब मम्मा का कद बरेली शहर विधानसभा सीट तक पहुंच चुका है। लगातार संघर्ष, जनता के बीच गहरी पैठ और समस्याओं के समाधान में उनकी सक्रियता को देखते हुए राजनीतिक हलकों में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की टिकट का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
चर्चा है कि जिस तरह से मम्मा ने क्षेत्र की जमीनी समस्याओं पर निगम को झुकने पर मजबूर किया, उसी तरह वे विधानसभा में भी जनता की असली आवाज़ बन सकते हैं। वह बरेली शहर विधानसभा सीट पर कायस्थ समाज के सबसे बड़े जमीनी नेता हैं और यह सीट कायस्थ बहुल सीट है।

जनता की सेवा ही लक्ष्य

मम्मा कहते हैं कि उनका लक्ष्य केवल और केवल जनता की सेवा है। “जनता ने मुझे पार्षद बनाया है, और मैं जनता के लिए हर समय उपलब्ध हूं। यह जिम्मेदारी तब तक निभाता रहूंगा जब तक क्षेत्र की हर समस्या पूरी तरह हल न हो जाए।”
साफ है कि मम्मा अब बरेली शहर की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। उनकी दबंग और संघर्षशील शैली ने उन्हें जनता के बीच “अपना नेता” बना दिया है।

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