नीरज सिसौदिया, बरेली
तकनीक के इस दौर में बरेली के कुछ नेता सिर्फ़ प्रचार नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए भी हाईटेक तरीके अपना रहे हैं। पहले लोगों को नाली, पानी, बिजली गुल, सीवर, स्ट्रीट लाइट या सफाई जैसी छोटी-मोटी समस्याओं के लिए नेताओं के घरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। नाली-सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति और बिजली गुल जैसी छोटी-छोटी समस्याओं के चलते अब लोगों को नेताओं के घर चक्कर नहीं लगाने पड़ते- एक WhatsApp मैसेज या फोन कॉल पर काम हो जाता है। हाईटेक सॉल्यूशन ने बरेली नगर निगम की राजनीति में एक नया मॉडल खड़ा कर दिया है। अब शिकायतें सिर्फ दर्ज नहीं होतीं, बल्कि उसी समय हल भी निकल जाता है। जनता महसूस कर रही है कि उनके नेता उनके साथ खड़े हैं और यही वजह है कि यह तरीका लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। इस मॉडल को अपनाने वाले नेताओं में समाजवादी पार्टी के शहर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ पार्षद और बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य राजेश अग्रवाल, नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य और बरेली शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा, पूर्व उपसभापति और शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार अतुल कपूर और पार्षद एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शमीम अहमद शामिल हैं।
बरेली के इन चारों प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने वार्ड के लिए हाईटेक सिस्टम खड़ा कर दिया है। इन सभी नेताओं ने वॉट्सऐप ग्रुप और फेसबुक अकाउंट बनाकर जनता से सीधा संपर्क जोड़ा है। जैसे ही वार्ड के लोग किसी समस्या की शिकायत करते हैं, ये नेता खुद सक्रिय हो जाते हैं। शिकायत पर तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेते हैं और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को फोन कर समाधान कराते हैं। गर्मी, सर्दी या बरसात – ये चारों नेता चौबीसों घंटे समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर रहते हैं।

राजेश अग्रवाल समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे शहर विधानसभा से पार्टी के प्रत्याशी भी रह चुके हैं और बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य हैं। रामपुर गार्डन से पार्षद चुने गए राजेश अग्रवाल सिर्फ ऑनलाइन नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर भी जनता के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं।
सतीश चंद्र सक्सेना ‘कातिब’ जिन्हें लोग मम्मा के नाम से जानते हैं, इंदिरा नगर से पार्षद हैं और नगर निगम की कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। भाजपा में उनकी गिनती शहर विधानसभा के टिकट के प्रबल दावेदारों में होती है।

मम्मा की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे सत्तारूढ़ दल में रहकर भी जनहित के मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाते हैं और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जनता के साथ खड़े होते हैं।
मॉडल टाउन वार्ड से पार्षद अतुल कपूर और उनकी पत्नी सोनिया कपूर ने अलग-अलग वार्डों से चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की है।

अतुल कपूर पूर्व उपसभापति रह चुके हैं और इस बार भाजपा टिकट की दौड़ में आगे माने जा रहे हैं। उनकी सक्रियता और सेवाभावना का ही नतीजा है कि वे और उनकी पत्नी लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।
बानखाना वार्ड के पार्षद शमीम अहमद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने अपने वार्ड में करोड़ों रुपये के विकास कार्य करवाए और जनता की हर समस्या का तुरंत समाधान कराया। यही कारण है कि लगातार दो बार पार्षद चुने गए और अब उनकी पकड़ और मज़बूत हो चुकी है।

लोगों का कहना है कि इन नेताओं की सबसे बड़ी ताक़त उनकी उपलब्धता और तत्परता है। कोई भी समस्या होने पर वे सिर्फ़ फोन कॉल या मैसेज की दूरी पर हैं। यही वजह है कि राजेश अग्रवाल और मम्मा जैसे नेता तीन दशक से ज़्यादा समय से वार्डों पर काबिज़ हैं, जबकि अतुल कपूर दंपति और शमीम अहमद भी लगातार दो कार्यकाल से जनता का भरोसा जीतते आ रहे हैं।
सबसे अहम बात यह है कि अन्य नेताओं की तरह इनमें से कोई भी नेता किसी भी प्रकार का सुविधा शुल्क या कमीशन नहीं लेता। चारों की छवि ईमानदार और सुलझे हुए नेता की है। ये वो नेता हैं जो किसी चुनाव में भी पार्टी उम्मीदवार से कोई पैसा नहीं लेते और खुद तन-मन-धन से पार्टी उम्मीदवार को चुनाव भी लड़वाते हैं। ये इनकी ईमानदारी का ही असर है कि बड़े से बड़े अधिकारी राजेश अग्रवाल और मम्मा जैसे नेताओं के काम को नकारने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।





