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बरेली में ऐतिहासिक भव्यता: श्री अगस्त्य मुनि आश्रम से 179वीं शोभायात्रा निकली, सपा के पूर्व प्रत्याशी राजेश अग्रवाल, आरके शर्मा और पंडित दीपक शर्मा सहित कई नेता जुटे, उतारी आरती, पढ़ें क्या-क्या खास रहा शोभायात्रा में?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से सराबोर शहर बरेली गुरुवार की शाम भक्ति रस में डूब गया। छोटी बमनपुरी स्थित प्राचीन श्री अगस्त्य मुनि आश्रम से 179वीं वार्षिकोत्सव की भव्य शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा का वातावरण इतना दिव्य और भावनात्मक था कि जगह-जगह श्रद्धालु उमड़ पड़े और फूलों की वर्षा के बीच भगवान अगस्त्य मुनि के स्वरूप की आरती उतारी।
शाम 6 बजे जैसे ही शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ, माहौल ‘जय श्री अगस्त्य मुनि महाराज’ के नारों से गूंज उठा। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक पंडित आर.के. शर्मा, भाजपा और सपा के पूर्व प्रत्याशी तथा पार्षद राजेश अग्रवाल, समाजसेवी सुरेंद्र मिश्रा ने श्री अगस्त्य मुनि जी के स्वरूप की आरती उतारी। इसी क्षण शोभायात्रा का प्रस्थान हुआ और श्रद्धालुओं का हुजूम इसे देखने उमड़ पड़ा।
आश्रम सभा के अध्यक्ष पंडित दीपक शर्मा और महामंत्री गौरव रस्तोगी ने मुख्य अतिथियों का स्वागत रामनामी पटका पहनाकर और भगवान के चित्र भेंट कर किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि 179 वर्षों से लगातार निकलने वाली यह शोभायात्रा बरेली की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
छोटी बमनपुरी से निकलकर शोभायात्रा गढ़ैया, बड़ा बाजार, कूँचा सीताराम, बड़ी बमनपुरी होती हुई वापस श्री अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंची। यात्रा के दौरान गलियां फूलों की बारिश से भर उठीं। हर घर से श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर नमन किया और स्वरूप की आरती उतारी। भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल हुए। इनमें श्री अगस्त्य मुनि आश्रम सभा के अध्यक्ष पंडित दीपक शर्मा, पूर्व महामंत्री विवेक शर्मा, महामंत्री गौरव रस्तोगी, पूर्व अध्यक्ष विनोद रस्तोगी, पूर्व अध्यक्ष राजेश रस्तोगी, एडवोकेट पंकज मिश्रा, पूर्व पार्षद रंजीत रस्तोगी, विजय शंकर पांडे, पूर्व पार्षद महेश पंडित, नवीन शर्मा, सुनील मिश्रा, हिमांशु शर्मा, धीरज दीक्षित, सुनील पाठक, दिव्यांश पाठक, आशीष शर्मा, राज आनंद शर्मा, राज रस्तोगी, शानू रस्तोगी, निमिष पाठक, शशांक रस्तोगी, शेखर रस्तोगी, बिक्रम रस्तोगी, शुशांक रस्तोगी, शोभित रस्तोगी, मिथुन रस्तोगी, देव आनंद शर्मा, समोद उपाध्याय, अनुज उपाध्याय, राहुल रस्तोगी, हरीओम शर्मा, मुकेश शर्मा, पंडित वासू देव, अमित शर्मा, रवि वर्मा, विशाल कश्यप, उत्कर्ष रस्तोगी, अनमोल रस्तोगी, विक्की सैनी, जितेंद्र सैनी, प्रदीप रोहला, सोनू पाठक शामिल रहे।


इसके अलावा पंडित बंटी महाराज और गोपाल जी महाराज की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होकर न सिर्फ पुण्यलाभ प्राप्त कर रहे थे, बल्कि पूरे वातावरण को दिव्यता से भर रहे थे।
शोभायात्रा का स्वागत करने वालों में पूर्व पार्षद रंजीत रस्तोगी, सरदार गुरदीप सिंह, सरदार विक्की, महेंद्र पाल राही, मुकेश शर्मा, कमल रस्तोगी, आशीष मिश्रा, सी.एल. मिश्रा और स्थानीय क्षेत्रवासी प्रमुख रहे। इन सभी ने श्री अगस्त्य मुनि स्वरूप का जगह-जगह स्वागत किया, पुष्पवर्षा की और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया।
पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु नाचते-गाते चलते रहे। महिलाओं ने घरों की छतों और दरवाजों से पुष्पवर्षा की। छोटे-छोटे बच्चों ने भी यात्रा का स्वागत करते हुए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। शोभायात्रा में ढोल-नगाड़े और शंखनाद से वातावरण गुंजायमान होता रहा।


श्री अगस्त्य मुनि आश्रम की शोभायात्रा 179 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस यात्रा में सम्मिलित होना सौभाग्य की बात है।
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि समाज के हर वर्ग और हर आयु वर्ग के लोग इसमें शामिल हुए। कोई श्रद्धालु शोभायात्रा को खींचते हुए ले जा रहा था तो कोई पूरे जोश से भजन गा रहा था। कई जगहों पर भक्तों ने प्रसाद और शरबत की व्यवस्था भी की, ताकि राहगीरों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।
यात्रा पूरी तरह अनुशासित ढंग से संपन्न हुई। भक्तगण कतारबद्ध होकर शोभायात्रा के साथ चले और सुरक्षा की दृष्टि से स्वयंसेवक लगातार सक्रिय रहे। पुलिस और प्रशासन ने भी यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने में सहयोग दिया।
करीब तीन घंटे चली यह भव्य शोभायात्रा वापस श्री अगस्त्य मुनि आश्रम परिसर में पहुंचकर संपन्न हुई। वहां अंतिम आरती और पुष्प अर्पण के साथ श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और गणमान्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।


179वीं शोभायात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बरेली की यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की आत्मा और संस्कृति का अहम हिस्सा है। भक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का यह अद्भुत संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत रहेगा।

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