पंजाब

जेल से रिहा हुआ जालंधर नगर निगम का सिंघम, सैकड़ों अवैध निर्माणों और नशा तस्करों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की वजह से फंसाया गया झूठे मुकदमे में, सिंघम की गैर मौजूदगी में उन जगहों पर भी हो गए अवैध निर्माण जहां सुखदेव वशिष्ठ ने चलाई थी डिच

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नीरज सिसौदिया, जालंधर
जालंधर में अवैध निर्माणों के खिलाफ ताबड़तोड़ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने वाले नगर निगम के सिंघम के नाम से मशहूर हेड ड्राफ्टमैन सुखदेव वशिष्ठ अब जेल से रिहा हो गए हैं। माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है। सुखदेव वशिष्ठ वही अधिकारी हैं जिन्होंने न तो सत्ता पक्ष के विधायकों के करीबियों के अवैध निर्माणों को छोड़ा और न ही विपक्ष के विधायकों के करीबियों के अवैध निर्माणों को। यहां तक कि नशे के सौदागरों द्वारा इस काले कारोबार के जरिये जुटाई गई संपत्ति पर भी बुलडोजर चलाने से भी वह पीछे नहीं हटे। फिर चाहे वो कांग्रेस विधायक हैनरी की करीबी रही निशा सागर खान रही हो या फिर वेस्ट हलके के पूर्व विधायक के करीबी माने जाने वाले नशा तस्कर। सुखदेव वशिष्ठ ने जिस तत्परता से इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की उसका ईमान मिलने की बजाय उन्हें सजा दी गई। लगभग सौ दिन से भी अधिक समय उन्हें सलाखों के पीछे बिताना पड़ा। आखिरकार माननीय हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई और वो सलाखों से बाहर आ गए हैं।
सुखदेव की रिहाई ने उन्हें इस झूठे मामले में साजिशन फंसाने वाले लोगों के होश उड़ा दिए हैं। कहते हैं कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। सिंघम की रिहाई ने इस बात को साबित कर दिखाया है।
सुखदेव के खिलाफ साजिश का यह पहला मौका नहीं था। इससे पहले भी जब-जब उन्होंने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की तो उन्हें साजिशन दूसरे विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया या फिर उनका तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया।
गिरफ्तारी से पहले सुखदेव ने बस्तियात क्षेत्र, अशोक विहार सहित कई इलाकों में नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की थी जिनमें मोला नाम का नशा तस्कर भी शामिल था।
बहरहाल, सिंघम अब सलाखों से बाहर आ गया है। अब धीरे-धीरे कई राज भी खुलेंगे। क्योंकि सिंघम ने जिन अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था उनमें से कई उनकी जेल यात्रा के दौरान फिर से बना दिये गए।

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