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सेवा, संवेदना और विश्वास की मिसाल बने राजेश अग्रवाल, मनोना धाम तक पहुंचाया एक अजनबी का भरोसा, जानिये क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

राजनीति अक्सर आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाजी और सत्ता की लड़ाई तक सीमित मानी जाती है, लेकिन जब कोई जननेता राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदना और सेवा को अपना धर्म बना ले, तो वह लोगों के दिलों में खास जगह बना लेता है। समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और बरेली कैंट विधानसभा सीट से सपा के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल ने ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है, जिसकी चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हो रही है।

राजेश अग्रवाल द्वारा अपने फेसबुक पेज पर साझा की गई एक भावुक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। यह पोस्ट अब तक एक लाख से अधिक लोगों तक पहुंच चुकी है और हजार से ज्यादा लोग इसे लाइक कर चुके हैं। लोग न सिर्फ इस सेवा कार्य की सराहना कर रहे हैं, बल्कि राजेश अग्रवाल के व्यवहार, सोच और संवेदनशील राजनीति की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल यह पूरा मामला हैदराबाद के जाने-माने व्यवसायी संजय मोर से जुड़ा है, जो पिछले कुछ समय से चलने-फिरने में असमर्थ हैं और व्हीलचेयर पर जीवन बिता रहे हैं। राजेश अग्रवाल और संजय मोर के बीच पहले से कोई परिचय नहीं था। लखनऊ में रहने वाले एक परिचित ने राजेश अग्रवाल से फोन पर अनुरोध किया कि क्या वह संजय मोर को बरेली स्थित मनोना धाम में महंत जी से मिलवा सकते हैं।

राजेश अग्रवाल ने साफ शब्दों में कहा कि उनका महंत जी से कोई व्यक्तिगत परिचय नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने कोशिश करने का भरोसा दिया। यही से उनकी संवेदनशीलता और मदद करने की प्रवृत्ति सामने आती है। बिना किसी निजी स्वार्थ या पहचान के, उन्होंने एक अजनबी के विश्वास को स्वीकार किया।

संजय मोर हैदराबाद से बरेली आने के लिए फ्लाइट से रवाना हुए, लेकिन खराब मौसम के कारण उनकी फ्लाइट को मुंबई में उतार दिया गया। इसके चलते उन्हें दो दिन तक मुंबई में रुकना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और रविवार को दोबारा बरेली पहुंचे। शाम करीब 6:15 बजे, राजेश अग्रवाल स्वयं अपने स्टाफ के साथ संजय मोर को लेकर मनोना धाम पहुंचे।

इस दौरान राजेश अग्रवाल ने कई लोगों से संपर्क किया ताकि संजय मोर की महंत जी से मुलाकात हो सके। हालांकि, कुछ लोगों ने मजबूरी या अपनी तथाकथित “होशियारी” के चलते सहयोग नहीं किया। इस अनुभव ने राजेश अग्रवाल को यह एहसास भी कराया कि राजनीति और समाज में रहते हुए हर कोई मदद के लिए आगे नहीं आता।

ऐसे समय में समाजवादी पार्टी के ही डॉ. जीराज सिंह यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजेश अग्रवाल ने खुले दिल से उनका आभार जताते हुए बताया कि उनके सहयोग से ही संजय मोर की महंत जी से मुलाकात संभव हो सकी। इस मुलाकात के बाद संजय मोर बेहद प्रसन्न नजर आए और रास्ते भर राजेश अग्रवाल से इसी विषय पर बातें करते रहे।

अगले दिन जब राजेश अग्रवाल संजय मोर को एयरपोर्ट छोड़कर आ रहे थे, तभी संजय मोर का फोन आया। वह खुशी से झूम रहे थे, क्योंकि संयोग से मनोना धाम के महंत भी उसी फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे। दोनों की फ्लाइट में लंबी बातचीत हुई और महंत जी ने संजय मोर को अपना व्यक्तिगत नंबर भी दिया। इस पूरे घटनाक्रम को राजेश अग्रवाल ने ईश्वर की कृपा और विश्वास की जीत बताया।

राजेश अग्रवाल ने लिखा कि शायद फ्लाइट का दो दिन देर से आना भी इसी कारण था, ताकि संजय मोर को महंत जी के साथ यात्रा करने का अवसर मिल सके। उन्होंने इस पूरे अनुभव को विश्वास, उम्मीद और निष्पक्ष सेवा का उदाहरण बताया।

अपनी पोस्ट में राजेश अग्रवाल ने राजनीति पर भी एक सटीक टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि वह राजनीति में रहते हुए कभी झूठे वादे नहीं करते और लोगों के काम पूरे करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों के काम आने से बचते हैं।

अंत में राजेश अग्रवाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि संजय मोर जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ हों और दोबारा बरेली आएं। उन्होंने भावुक होकर लिखा कि थोड़े समय साथ बिताने के बाद ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि यह उनकी पहली मुलाकात थी।

राजेश अग्रवाल का यह सेवा कार्य न सिर्फ एक व्यक्ति की मदद तक सीमित है, बल्कि यह उस राजनीति का उदाहरण है, जिसमें संवेदना, ईमानदारी और इंसानियत को सबसे ऊपर रखा जाता है। शायद यही कारण है कि उनकी यह पोस्ट लोगों के दिलों को छू रही है और तेजी से वायरल हो रही है।

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