नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में गुड फ्राइडे के पावन अवसर पर संभवतया पहली बार एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और सोच व्यापक हो, तो धर्म कभी दीवार नहीं बनता, बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम बन जाता है। शहर के क्राइस्ट मैथोडिस्ट चर्च में आयोजित रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम ने न सिर्फ दो धर्मों को एक मंच पर लाया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है। इस पूरे आयोजन की अगुवाई कैंट विधानसभा क्षेत्र से जुड़े डॉ. अनीस बेग ने की, जिन्होंने एक बार फिर अपने काम से यह दिखाया कि वह केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की सोच रखते हैं।

गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का एक बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने मानवता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। ऐसे पवित्र दिन पर चर्च के भीतर रोज़ा इफ्तार का आयोजन होना अपने आप में एक अनोखी और भावनात्मक पहल थी। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि दो धर्मों के बीच विश्वास, सम्मान और अपनत्व का जीवंत उदाहरण था।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। चर्च परिसर में जब रोज़ा खोला गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग तरह की संतुष्टि और अपनापन दिखाई दे रहा था। माहौल में न तो किसी तरह की दूरी थी और न ही कोई भेदभाव—सिर्फ भाईचारा और एकता की भावना थी।

कार्यक्रम की शुरुआत चर्च के सीनियर पास्टर रेवरेंड सुनील के. मसीह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने डॉ. अनीस बेग और सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके बाद एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला, जब डॉ. अनीस बेग चर्च में बैठकर दुआ करते नजर आए और वहीं मौजूद पादरियों ने भी उनके लिए प्रार्थना की। यह पल केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानवीय एकता का प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पादरी डॉ. विंसेंट बेंजामिन मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में गुड फ्राइडे के महत्व को विस्तार से समझाया और प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हुए कहा कि सच्ची आस्था वही है, जिसमें इंसानियत और प्रेम हो। उन्होंने क्रूस पर कहे गए यीशु के सात वचनों का जिक्र करते हुए बताया कि उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—क्षमा, करुणा और सेवा ही असली धर्म है।

डॉ. अनीस बेग ने अपने संबोधन में बहुत सादगी लेकिन गहराई के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल धार्मिक रस्में नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं। “गुड फ्राइडे के दिन चर्च में इफ्तार का आयोजन करना हमारी साझा संस्कृति की खूबसूरती को दर्शाता है। यह बताता है कि हम अलग-अलग धर्मों से जरूर आते हैं, लेकिन हमारी भावनाएं और हमारी इंसानियत एक ही है,” उन्होंने कहा।
डॉ. अनीस बेग की यह पहल अचानक नहीं है, बल्कि उनकी सोच और जीवनशैली का हिस्सा है। वह हमेशा से ऐसे आयोजनों के जरिए समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है—एक ऐसा प्रयास, जो लोगों के दिलों को जोड़ता है।
इस कार्यक्रम में शामिल ईसाई समाज के लोगों ने भी खुले दिल से इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने डॉ. अनीस बेग का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश फैलाते हैं और लोगों के बीच की दूरियों को कम करते हैं। यह सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक सोच है, जिसे समाज में आगे बढ़ाने की जरूरत है।

कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर रोज़ा इफ्तार किया और गुड फ्राइडे के अवसर पर प्रभु यीशु के बलिदान को याद किया। इसके साथ ही देश में शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ की गई। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि जब लोग एक साथ बैठते हैं, तो उनके बीच की सारी दूरियां अपने आप खत्म हो जाती हैं।

आज के समय में जब समाज में अक्सर धार्मिक आधार पर विभाजन की खबरें सामने आती हैं, ऐसे में डॉ. अनीस बेग का यह कदम उम्मीद की एक नई किरण की तरह है। यह पहल बताती है कि अगर नेतृत्व सकारात्मक हो, तो समाज में बदलाव लाना मुश्किल नहीं है। एक छोटा सा प्रयास भी बड़ा असर डाल सकता है, बशर्ते उसके पीछे सच्ची नीयत और मजबूत सोच हो।
डॉ. अनीस बेग की यह छवि अब धीरे-धीरे एक ऐसे जनप्रतिनिधि की बन रही है, जो केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। कैंट विधानसभा क्षेत्र में उनकी सक्रियता और ऐसे आयोजनों के जरिए लोगों से उनका जुड़ाव उन्हें एक अलग पहचान दे रहा है।

अंततः, यह आयोजन केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक संदेश है—एक ऐसा संदेश जो बताता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी एकता है। जब एक ही जगह पर इफ्तार भी होता है और गुड फ्राइडे की प्रार्थना भी, तो यह सिर्फ धार्मिक सहिष्णुता नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की तस्वीर बन जाती है।
डॉ. अनीस बेग की यह पहल आने वाले समय में ऐसे और प्रयासों के लिए प्रेरणा बन सकती है। क्योंकि जब समाज में प्यार और भाईचारे की नींव मजबूत होती है, तभी एक बेहतर और शांतिपूर्ण भविष्य की उम्मीद की जा सकती है।





