नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर कई नेता सक्रिय हैं, लेकिन इन सबके बीच जिस नाम की चर्चा सबसे अधिक हो रही है, वह है वरिष्ठ समाजवादी नेता चंद्रसेन सागर। लगभग पांच दशक के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के बाद आज वह ऐसे मुकाम पर खड़े हैं, जहां उनकी सबसे बड़ी ताकत कोई पद या राजनीतिक सिफारिश नहीं, बल्कि जनता के बीच बनाई गई उनकी विश्वसनीय छवि है। यही कारण है कि जहां एक ओर वह अपने बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके विरोधी ऐसे नेताओं की तलाश में हैं जो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने उनकी पैरवी कर सकें।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चंद्रसेन सागर ने जनसेवा की ऐसी लकीर खींच दी है, जिसे पार करना उनके प्रतिद्वंद्वियों के लिए आसान नहीं है। यही वजह है कि फरीदपुर की राजनीति में उनकी सक्रियता ने विरोधी खेमे की बेचैनी भी बढ़ा दी है।
चंद्रसेन सागर का राजनीतिक सफर किसी चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू नहीं हुआ। 71 वर्षीय चंद्रसेन सागर ने 20 वर्ष की आयु से पहले ही सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया था। उन्होंने अपने बड़े भाई और फरीदपुर की राजनीति के चर्चित चेहरे रहे स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर के साथ कदम से कदम मिलाकर क्षेत्र की राजनीति में लंबा समय बिताया। डॉ. सियाराम सागर के निधन के बाद भी उन्होंने परिवार की राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी उसी समर्पण के साथ निभाई और क्षेत्र में अपनी सक्रियता कभी कम नहीं होने दी।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में चंद्रसेन सागर दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे। इसके अलावा उनके परिवार ने कई बार क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के रूप में भी जनता का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल चुनाव नहीं जीते, बल्कि लोगों का विश्वास भी जीता। गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

फरीदपुर क्षेत्र में सड़कों का निर्माण, गलियों का विकास, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार में उनकी सक्रिय भूमिका का उल्लेख उनके समर्थक आज भी करते हैं। हालांकि चंद्रसेन सागर केवल आधारभूत विकास तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना और विशेष रूप से दलित समाज के बच्चों और बेटियों की शिक्षा को लेकर लगातार लोगों को प्रेरित किया।
शिक्षा के प्रति उनकी सोच का प्रभाव उनके अपने परिवार में भी दिखाई देता है। उनके परिवार की दो बेटियां भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में और एक बेटी भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में सेवाएं दे रही हैं। उनके करीबी बताते हैं कि यही अनुभव उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि यदि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सही अवसर मिल जाएं तो वे भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंच सकते हैं। उनका सपना है कि फरीदपुर के संसाधनहीन बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले कि वे भविष्य में दूसरों पर निर्भर न रहें, बल्कि समाज का सहारा बनें।

सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। क्षेत्र के अनेक छोटे-बड़े मंदिरों के निर्माण में सहयोग देने के साथ-साथ कई मंदिरों में मूर्ति स्थापना में भी उन्होंने योगदान दिया। उनके समर्थकों का कहना है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा उनके सार्वजनिक जीवन के दो ऐसे पहलू हैं, जिन्हें उन्होंने हमेशा राजनीति से ऊपर रखा।
चुनावी दृष्टि से भी चंद्रसेन सागर ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। बताया जाता है कि उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के लगभग सभी बूथों पर व्यक्तिगत स्तर पर कार्यकर्ताओं की टीमें तैयार कर ली हैं। चंद्रसेन सागर के लिए यह काम इसलिए भी आसान था क्योंकि पांच दशक के करियर में उन्होंने यही काम किया है। जमीन पर तो उनकी टीमें हमेशा से ही तैयार थीं बस उन्हें कागजों पर अंकित करके लखनऊ स्थित पार्टी हाईकमान तक पहुंचाना था। इसके उलट उनके विरोधी आज तक अपनी बूथ स्तरीय टीमें तैयार नहीं कर पाए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी चुनाव में मजबूत बूथ प्रबंधन जीत की सबसे अहम कड़ी माना जाता है और इस मामले में चंद्रसेन सागर अन्य दावेदारों की तुलना में काफी आगे दिखाई देते हैं। वह अपनी सूची महीनों पहले ही न सिर्फ हाईकमान को सौंप चुके हैं बल्कि अपनी टीम के हर सदस्य के घर पर पार्टी और कार्यकर्ता की नेम प्लेट भी लगवा चुके हैं। यह काम फरीदपुर ही नहीं पूरे बरेली जिले में कोई भी नेता नहीं कर पाया है।
उनकी कार्यशैली का एक और पक्ष उन्हें अलग पहचान देता है। कुछ समय पहले क्षेत्र में एक मजदूर की दुर्घटना में मौत हो गई थी। पीछे दो वर्ष की मासूम बेटी और परिवार का सहारा छिन गया। उस कठिन समय में चंद्रसेन सागर ने परिवार की आर्थिक सहायता की, लेकिन न तो मीडिया को बुलाया और न ही सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर इसका प्रचार किया। उनके समर्थक इसे उनकी सादगी और संवेदनशीलता का उदाहरण बताते हैं।

आज के दौर में जब छोटी-छोटी सहायता को भी प्रचार का माध्यम बना दिया जाता है, तब चंद्रसेन सागर की यह शैली उन्हें अलग पहचान दिलाती है। उनके करीबी कहते हैं कि वे मानते हैं कि किसी जरूरतमंद की मदद का उद्देश्य उसका सम्मान बचाना होना चाहिए, न कि अपनी लोकप्रियता बढ़ाना। यही कारण है कि क्षेत्र में कई लोग उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो कैमरों से अधिक लोगों के बीच रहना पसंद करते हैं।
फिलहाल समाजवादी पार्टी ने फरीदपुर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन क्षेत्र में चल रही राजनीतिक चर्चाओं में चंद्रसेन सागर का नाम प्रमुख दावेदारों में लगातार बना हुआ है। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव, संगठन पर पकड़, सामाजिक स्वीकार्यता और वर्षों की जनसेवा उन्हें टिकट की दौड़ में मजबूत स्थिति में खड़ा करती है। अब सबकी निगाहें समाजवादी पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं कि फरीदपुर में पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है।




