नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ बरेली की कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच वरिष्ठ सपा नेत्री सुप्रिया ऐरन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्टरों ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी है। इन पोस्टरों में उन्हें “125 कैंट विधानसभा, बरेली से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी” बताते हुए बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी भी विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी नेताओं ने सुप्रिया ऐरन को स्वयंभू उम्मीदवार बताते हुए नाराजगी जाहिर की है जबकि ऐरन दंपति ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है।

वायरल पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि हाल के महीनों में टिकट की दावेदारी को लेकर अलग-अलग संकेतों और बयानों के कारण सुप्रिया ऐरन की स्थिति सबसे खराब मानी जा रही थी। विभिन्न सर्वेक्षणों में भी उनकी हालत बेहद खराब बताई जा रही थी। ऐसे में समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्टर जारी किए जाने को कुछ नेता राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि ये पोस्टर खुद सुप्रिया ऐरन या उनके पति प्रवीण सिंह ऐरन ने खुद वायरल करवाए हैं।

सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टर में सुप्रिया ऐरन को समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बताते हुए उन्हें अग्रिम बधाई दी गई है। पोस्टर तेजी से विभिन्न व्हाट्सएप समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा रहा है। इसके बाद कैंट विधानसभा क्षेत्र में टिकट की दावेदारी को लेकर चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले समर्थकों द्वारा इस तरह के पोस्टर जारी करना नया नहीं है, लेकिन जब पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं हुई हो, तब ऐसे पोस्टर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करते हैं।

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में संगठनात्मक कार्यक्रमों और सामाजिक सम्मेलन आयोजित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि एक अगस्त से 15 अगस्त के बीच टिकट के दावेदारों को अपनी-अपनी जाति के कम से कम चार ऐसे सम्मेलन आयोजित करवाने हैं जिनमें कम से कम 1000 लोग शामिल हों। उसी दावेदार को पार्टी उम्मीदवार घोषित करेगी। इसके विपरीत सुप्रिया ऐरन ने कथित तौर पर स्वयंभू उम्मीदवार बन बैठी हैं। ऐसे में किसी भी दावेदार को आधिकारिक घोषणा से पहले प्रत्याशी के रूप में प्रचारित करना पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकता है।

कुछ दावेदारों का यह भी कहना है कि यदि टिकट का फैसला अभी होना बाकी है, तो किसी एक नेता के समर्थन में इस तरह के पोस्टर जारी होने से संगठन में गलत संदेश जा सकता है। वहीं, कुछ नेताओं का कहना है कि ऐरन दंपति का राजनीतिक दौर अब खत्म हो चुका है। सुप्रिया ऐरन और प्रवीण सिंह ऐरन की सियासत का चिराग पूरी तरह बुझ चुका है और इस तरह के हथकंडों से यह चिराग फिर से रोशन नहीं होने वाला। ऐसा करके वह भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे की शिकायत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल से की जा चुकी है और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से करने की तैयारी की जा रही है।
कैंट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर नजर रखने वाले कुछ नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ समय तक सुप्रिया ऐरन क्षेत्रीय गतिविधियों में अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई दीं। उनका आरोप है कि न तो उन्होंने कैंट क्षेत्र में पीडीए पंचायतों का आयोजन किया और न ही महापंचायतें आयोजित कीं। एसआईआर के काम में भी उन्होंने संगठन की कोई मदद नहीं की। न ही स्थानीय मुद्दों पर व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने कोई आंदोलन किया या अपेक्षित सक्रियता दिखाई। एसआईआर के दौरान भी जब मुस्लिम मतदाता परेशान हो रहे थे तब भी सुप्रिया ऐरन उनकी मदद के लिए आगे नहीं आईं। संगठन के कार्यक्रमों में भी पिछले कुछ महीनों से ही वह सक्रिय दिखाई दी हैं। चुनाव हारने के बाद दोनों पति-पत्नी मैदान छोड़ चुके थे। सुप्रिया ऐरन के इस पब्लिसिटी स्टंट को लेकर टिकट के अन्य दावेदारों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि एक तरफ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कहते हैं कि एक अगस्त से 15 अगस्त के बीच विधानसभा के टिकट का जो भी दावेदार अपनी जाति के सर्वाधिक सम्मेलन आयोजित कराएगा उसके ही टिकट पर विचार किया जाएगा वहीं, दूसरी ओर सुप्रिया ऐरन कथित तौर पर खुद को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी हैं। ऐसे में या तो अखिलेश यादव झूठ बोल रहे हैं या फिर सुप्रिया ऐरन के ये पोस्टर। सूत्र बताते हैं कि यह सब सुप्रिया ऐरन और उनके पति प्रवीण सिंह ऐरन ने लाइमलाइट में आने के लिए किया है। क्योंकि टिकट की दावेदारी को लेकर बार-बार बदलते बयानों को लेकर सुप्रिया ऐरन इस दौड़ में काफी पिछड़ चुकी हैं। ऐसे में पब्लिसिटी स्टंट के तौर पर उन्होंने यह तरीका अपनाया है।

हालांकि सुप्रिया ऐरन के समर्थक इन आरोपों से सहमत नहीं हैं। उनका दावा है कि वह लगातार संगठन और जनता के बीच सक्रिय रही हैं तथा चुनाव नजदीक आने के साथ उनकी गतिविधियां और तेज हुई हैं।

वायरल पोस्टर के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे टिकट मिलने का भ्रम फैलाने की कोशिश करार दे रहा है। कई पोस्टों में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है तो फिर प्रत्याशी घोषित करने जैसे पोस्टर कैसे जारी किए गए।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रिया ऐरन और उनके पति प्रवीण सिंह ऐरन का पक्ष जानने के लिए उनके व्हाट्सएप नंबर पर लिखित प्रश्न भेजा गया। समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सुप्रिया ऐरन के कथित तौर पर खुद को स्वयंभू सपा उम्मीदवार घोषित करने के बाद सुप्रिया से नाराज मुस्लिम मतदाता भी सपा से दूरी बनाने लगे हैं। इसका लाभ बहुजन समाज पार्टी और हैदराबादी भाईजान असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएमको मिल सकता है। सोशल मीडिया पर भी सुप्रिया ऐरन का काफी विरोध शुरू हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट का अंतिम निर्णय समाजवादी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे पोस्टर और दावे अपनी जगह हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा होने तक किसी भी दावेदारी को अंतिम नहीं माना जा सकता। फिलहाल इतना तय है कि एक वायरल पोस्टर ने बरेली कैंट की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट की लड़ाई को लेकर चर्चाएं पहले से कहीं अधिक तेज हो गई हैं।




