यूपी

प्रेम विवाह की सजा रिश्तेदारों को दे रही बरेली जिले की फरीदपुर थाना पुलिस, छाया ने सोशल मीडिया पर जारी किया वीडियो, CM योगी से लगाई इंसाफ की गुहार, बोली- मैं बालिग हूं, अपनी मर्जी से शादी की है, मेरे ससुराल वालों को परेशान न करें, पढ़ें क्या है पूरा मामला और देखें छाया का पूरा वीडियो

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर थाना क्षेत्र में प्रेम विवाह करने वाली एक युवती ने अपने पति और ससुराल वालों के लिए इंसाफ की गुहार लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्राम सिमरा केशोपुर की रहने वाली छाया का आरोप है कि उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से राजेश सागर से शादी की है और शादी के बाद से वह अपने पति के साथ खुशहाल जीवन जी रही है, लेकिन उसके मायके वालों की शिकायत के बाद फरीदपुर थाना पुलिस उसके पति के रिश्तेदारों को परेशान कर रही है। छाया का कहना है कि वह बालिग है, अपना भला-बुरा समझने में सक्षम है और उसने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से विवाह किया है। अब उसे पुलिस की कार्रवाई के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी गुहार लगानी पड़ी है।
छाया ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को संबोधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया। वीडियो में उसने साफ शब्दों में कहा कि उसने अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के खिलाफ जाकर राजेश सागर से शादी की है। उसका कहना है कि वह अपने पति के साथ खुश है और उसने इस संबंध में पहले ही बरेली के एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दे दी थी। छाया के मुताबिक उसने 24 सितंबर 2026 को एसएसपी से मिलकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी, इसके बावजूद फरीदपुर थाना पुलिस उसके पति के रिश्तेदारों को परेशान कर रही है।
छाया ने मुख्यमंत्री से सीधे अपील करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी मैंने अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के खिलाफ जाकर राजेश सागर से शादी कर ली है। इसकी सूचना एसएसपी बरेली से मिलकर मैंने 24 सितंबर 2026 को दी थी। लेकिन थाना फरीदपुर पुलिस द्वारा मेरे पति के रिश्तेदारों को परेशान किया जा रहा है। मैं अपने पति के साथ खुश हूं, मैं बालिग हूं, मैं अपने सारे प्रमाणपत्र भेज रही हूं। थाना फरीदपुर, बरेली पुलिस मेरे पति के रिश्तेदारों को परेशान न करे।”
छाया ने वीडियो में अपने माता-पिता से भी सवाल किया है। उसका कहना है कि जब उसने उनसे राजेश से शादी करने की बात कही थी तो उसके साथ मारपीट की गई थी। ऐसे में उसका आरोप है कि अपनी मर्जी से शादी करने के बाद अब उसके पति के परिवार को परेशान किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि छाया ने मुख्यमंत्री को वीडियो जारी करने से पहले बरेली के एसएसपी से मुलाकात कर लिखित शिकायत भी दी थी। एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में उसने खुद को पढ़ी-लिखी और बालिग महिला बताते हुए कहा था कि उसे अपना भला-बुरा सोचने और समझने की पूरी समझ है। उसने अपनी जन्मतिथि 10 फरवरी 2007 बताई है। इस जन्मतिथि के आधार पर छाया की उम्र अब 19 वर्ष है।
अपने प्रार्थना पत्र में छाया ने बताया कि उसकी मुलाकात गांव के ही राजेश सागर पुत्र मुन्ना लाल निवासी ग्राम सिमरा केशोपुर, थाना फरीदपुर, जिला बरेली से वर्ष 2021 में पढ़ाई के दौरान हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। छाया के मुताबिक दोनों एक ही धर्म और एक ही जाति से हैं। उसने दावा किया कि दोनों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से 23 जुलाई 2026 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया।
यहीं से इस पूरे मामले में परिवार और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होते हैं। छाया का आरोप है कि उसके परिवार वालों को यह शादी मंजूर नहीं थी। इसलिए उसने परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर राजेश सागर से शादी की। उसका कहना है कि शादी के बाद वह अपने पति के साथ खुश है, लेकिन उसके पिता और परिवार के लोग इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
छाया ने एसएसपी को दिए पत्र में अपने पिता कैलाश बाबू का भी जिक्र किया है। उसने बताया है कि उसके पिता कुआं टांडा ब्लॉक में सफाई कर्मचारी हैं और दोनों की शादी के खिलाफ हैं। छाया का आरोप है कि उसके पिता और परिवार के लोग उसे और उसके पति को लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उसके मुताबिक उन्हें धमकी दी गई कि दोनों की हत्या करवाकर कहीं ठिकाने लगा दिया जाएगा और उनकी लाशों का भी पता नहीं चलेगा।

नीचे देखें छाया का पूरा वीडियो

👇👇👇👇👇👇

छाया ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि उसके पिता अपनी सरकारी नौकरी और पहुंच का हवाला देते हुए उन्हें धमकाते हैं। उसके मुताबिक शादी के कारण परिवार की बदनामी होने की बात कहते हुए उसे और उसके पति को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। छाया ने कहा कि उसे और उसके पति को अपने ही परिवार से जान का खतरा बना हुआ है और दोनों जैसे-तैसे छिपकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छाया ने अपने लिखित प्रार्थना पत्र में अपने वैवाहिक जीवन को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा है। उसने कहा कि वह और राजेश अपने वैवाहिक जीवन में खुश हैं। साथ ही उसने आशंका जताई कि उसके पिता और परिजन उसके या उसके पति के साथ कभी भी कोई घटना कर सकते हैं। इसी आधार पर उसने अपनी और अपने पति की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की थी।
अब इस पूरे मामले में एक दूसरा पक्ष सामने आया है। बताया जाता है कि छाया के पिता कैलाश बाबू ने पुलिस को दी गई शिकायत में अपनी बेटी को नाबालिग बताया है। इसी शिकायत के बाद फरीदपुर थाना पुलिस की सक्रियता बढ़ने और राजेश सागर के परिवार तथा रिश्तेदारों को कथित तौर पर परेशान किए जाने का आरोप छाया ने लगाया है। हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
यही वह बिंदु है जहां मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। अगर छाया की ओर से प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि 10 फरवरी 2007 है, तो 23 जुलाई 2026 को शादी के समय उसकी उम्र 19 वर्ष से अधिक थी। ऐसे में उसके बालिग होने के दावे और उसके पिता द्वारा उसे नाबालिग बताए जाने के बीच का विवाद दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट किया जाना चाहिए। किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य मानने के बजाय पुलिस के लिए जरूरी है कि वह जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षिक प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों की विधिवत जांच करे।
लेकिन इस जांच के दौरान एक और सवाल सामने आता है—यदि छाया वास्तव में बालिग है और उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से शादी की है तो उसके पति के रिश्तेदारों को किस आधार पर परेशान किया जा रहा है? और यदि पुलिस के पास कोई अलग कानूनी आधार या शिकायत है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया जा रहा? छाया का यही आरोप है कि उसके पति के रिश्तेदारों को पुलिस की ओर से परेशान किया जा रहा है और इसी कथित उत्पीड़न के कारण उसे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचानी पड़ी।

छाया का मुख्यमंत्री को वीडियो जारी करना केवल एक पारिवारिक विवाद की कहानी नहीं है। यह उस सवाल को भी सामने लाता है कि एक बालिग महिला अपने जीवनसाथी का चुनाव करने के बाद कितनी स्वतंत्रता के साथ अपना जीवन जी सकती है और यदि उसके परिवार को उसका फैसला पसंद नहीं है तो पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी बालिग महिला की इच्छा, उसकी सुरक्षा और उसके वैवाहिक निर्णय को भी कानून के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
इस मामले में छाया ने खुद अपनी पहचान, अपनी जन्मतिथि और अपनी शादी से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। उसने यह भी कहा है कि वह अपने प्रमाणपत्र भेज रही है। ऐसे में अब गेंद प्रशासन के पाले में है। जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, छाया के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए, उसके बयान को स्वतंत्र रूप से दर्ज किया जाए और उसके पति तथा परिवार के सदस्यों के खिलाफ यदि कोई कार्रवाई हो रही है तो उसका कानूनी आधार स्पष्ट किया जाए।
साथ ही यदि छाया के पिता की ओर से वास्तव में उसे नाबालिग बताते हुए शिकायत दी गई है तो पुलिस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायत के आधार पर कौन-कौन से कदम उठाए गए और किस कानूनी प्रावधान के तहत उठाए गए। यदि जांच में छाया के बालिग होने और अपनी इच्छा से विवाह करने की बात प्रमाणित होती है तो उसके पति के रिश्तेदारों को केवल पारिवारिक विवाद के चलते परेशान किए जाने की शिकायत की भी जांच होनी चाहिए।

छाया का हाईस्कूल परीक्षा की अंकतालिका।

दूसरी तरफ छाया द्वारा अपने पिता और परिवार पर लगाए गए जान से मारने की धमकी के आरोप भी कम गंभीर नहीं हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो पुलिस के सामने सबसे पहली जिम्मेदारी छाया और उसके पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बनती है। क्योंकि किसी भी विवाद में सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब परिवार की नाराजगी हिंसा में बदल जाए। छाया ने पहले ही लिखित रूप से अपनी और अपने पति की जान को खतरा बताया है। ऐसे में उसके इस आरोप को भी केवल पारिवारिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
छाया ने मुख्यमंत्री को संबोधित वीडियो के जरिए मूल रूप से एक ही मांग की है—उसे और उसके पति को उनकी मर्जी से जीवन जीने दिया जाए और पुलिस उसके पति के रिश्तेदारों को परेशान न करे। उसने अपने वीडियो में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने पति के साथ खुश है और बालिग है।
फरीदपुर के इस मामले में छाया को न्याय तभी मिलेगा जब उसके हर आरोप की निष्पक्ष जांच होगी और उसके दस्तावेजों को सामने रखकर सच्चाई तय की जाएगी। पुलिस को भी अपनी कार्रवाई का आधार स्पष्ट करना होगा। यदि कहीं कानून का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि मामला केवल एक बालिग लड़की के अपनी पसंद से शादी करने और परिवार की नाराजगी का है तो कानून की आड़ में किसी पक्ष को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप भी उतनी ही गंभीरता से जांचा जाना चाहिए।

छाया और राजेश की शादी का प्रमाणपत्र।

छाया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जो गुहार लगाई है, उसका सार यही है- “मैं बालिग हूं, मैंने अपनी मर्जी से शादी की है, मैं अपने पति के साथ खुश हूं और मेरे पति के रिश्तेदारों को परेशान न किया जाए।”
अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और बरेली पुलिस इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और दस्तावेजों व दोनों पक्षों के बयानों की निष्पक्ष जांच के बाद इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *