यूपी

फरीदपुर में सपा का नया चेहरा बन रहीं पूनम सेन, क्या 2027 में पहली बार किसी महिला पर दांव लगाएगी पार्टी?, जाटव समाज में मजबूत पकड़, लगातार सक्रिय जनसंपर्क और संगठन के प्रति निष्ठा ने मजबूत की दावेदारी, पुरुष दावेदारों को भी दे रही हैं कड़ी टक्कर

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी कुछ महीने दूर हों, लेकिन बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बार महिला दावेदारों में सबसे अधिक जिस नाम की चर्चा हो रही है, वह है समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता पूनम सेन। जाटव समाज से आने वाली पूनम सेन न केवल महिला दावेदारों में सबसे मजबूत मानी जा रही हैं, बल्कि पार्टी के कई पुराने और प्रभावशाली पुरुष नेताओं को भी चुनौती देती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि समाजवादी पार्टी इस बार फरीदपुर से कोई नया चेहरा और महिला नेतृत्व सामने लाना चाहती है, तो पूनम सेन एक बेहतर विकल्प बन सकती हैं।
फरीदपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट है और यहां दलित मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही है। विशेष रूप से जाटव समाज का राजनीतिक प्रभाव हमेशा चुनावी परिणामों को प्रभावित करता रहा है। इसके अलावा कुर्मी, लोधी, ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, मुस्लिम, यादव, मौर्य, कश्यप और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। यही कारण है कि कोई भी राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन के समय जातीय संतुलन और सामाजिक स्वीकार्यता को सबसे अधिक महत्व देता है।
समाजवादी पार्टी का रिकॉर्ड भी इस सीट पर जाटव समाज के प्रति विशेष झुकाव दिखाता है। पार्टी ने अब तक सबसे अधिक बार जाटव समाज के नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन आज तक किसी महिला को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका कारण यह था कि पहले पार्टी के पास ऐसा कोई महिला चेहरा नहीं था, जो संगठनात्मक मजबूती, जनसंपर्क और चुनाव लड़ने की क्षमता तीनों कसौटियों पर खरा उतरता हो। अब पूनम सेन के रूप में पार्टी के सामने ऐसा विकल्प मौजूद दिखाई दे रहा है।
पूनम सेन का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार उनकी मैदान पर लगातार सक्रियता मानी जा रही है। क्षेत्र के लोग उन्हें केवल चुनावी मौसम में दिखाई देने वाली नेता नहीं, बल्कि पूरे वर्ष जनता के बीच रहने वाली जनप्रतिनिधि के रूप में देखते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए कोचिंग की व्यवस्था कराने से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर लगवाने, जरूरतमंद परिवारों की सहायता करने, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने और महिलाओं की समस्याओं को उठाने तक, उन्होंने अनेक ऐसे कार्य किए हैं जिनसे उनकी पहचान लगातार मजबूत हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूनम सेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्याओं के समाधान का प्रयास करती हैं। यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और महिलाओं के साथ-साथ युवाओं तथा दलित समाज में भी उनकी मजबूत पकड़ बनती दिखाई दे रही है।
पूनम सेन का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। एक समय वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी थीं, लेकिन बाद में उन्होंने समाजवादी विचारधारा पर भरोसा जताते हुए समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। पार्टी में आने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया और लगातार जमीनी स्तर पर काम करती रहीं। पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और जनसंपर्क अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें संगठन में अलग पहचान दिलाई।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पूनम सेन ने समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदारी पेश की थी। हालांकि उस समय पार्टी नेतृत्व ने किसी अन्य उम्मीदवार पर भरोसा जताया। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई और न ही किसी प्रकार का असंतोष सार्वजनिक किया। इसके विपरीत उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम जारी रखा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
इसी चुनाव में टिकट की दावेदार रहीं शालिनी सिंह ने टिकट न मिलने पर समाजवादी पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। दूसरी ओर पूनम सेन ने संगठन के साथ बने रहकर यह संदेश दिया कि उनके लिए पार्टी केवल टिकट प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिबद्धता का मंच है। यही कारण है कि संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।
बता दें कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार की लोकप्रियता के साथ-साथ संगठन के प्रति निष्ठा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समाजवादी पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में कई सीटों पर ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। पूनम सेन का नाम भी इसी श्रेणी में देखा जा रहा है।
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों और पंचायत स्तर पर महिलाओं की सक्रियता पहले की तुलना में कहीं अधिक है। ऐसे में यदि समाजवादी पार्टी महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहती है, तो पूनम सेन का नाम उसके लिए राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है।
हालांकि टिकट का अंतिम फैसला समाजवादी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पूनम सेन की दावेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, जमीनी सक्रियता, सामाजिक कार्यों में निरंतर भागीदारी और जाटव समाज में प्रभाव उन्हें अन्य दावेदारों से अलग पहचान दिला रहा है।
फरीदपुर की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से इतिहास रचते हुए पहली बार किसी महिला को उम्मीदवार बनाएगी। यदि पार्टी ऐसा करती है, तो मौजूदा परिस्थितियों में पूनम सेन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *