नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बरेली जिले की अनुसूचित जाति (आरक्षित) फरीदपुर विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम ( indiatime24.com ) की ओर से कराए गए एक विस्तृत सर्वे में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, दो बार के ब्लॉक प्रमुख और पांच बार विधायक रहे स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर के छोटे भाई चंद्रसेन सागर सबसे लोकप्रिय दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं और दूसरे नंबर पर महिला नेत्री पूनम सेन ने जगह बनाई है।
सर्वे के अनुसार, समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों में चंद्रसेन सागर को सबसे अधिक समर्थन मिला है। हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि भाजपा यदि दिवंगत विधायक स्वर्गीय श्याम बिहारी लाल के परिवार से किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। इसके विपरीत यदि भाजपा नया चेहरा उतारती है तो बड़ी संख्या में मतदाताओं का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस सीट पर बढ़त हासिल कर सकती है।
यह सर्वे विगत एक अप्रैल से 30 जून के बीच किया गया। इसमें फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के 10 हजार मतदाताओं से फोन पर बातचीत कर उनकी राय ली गई। सर्वे में फरीदपुर शहर, रजऊ परसपुर, भगवंतापुर, फतेहगंज पूर्वी, अठाना, धीरपुर, इटौआ, इमलिया, इनायतपुर, खजुरिया संपत, कुआं डांडा, महमूदपुर, मेहतरपुर, नगरिया कला, नवदिया, रमपुरा, खटेली सहित अनेक गांवों और कस्बों के लोगों को शामिल किया गया।
राय देने वालों में 20 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मतदाता शामिल रहे। सर्वे के सामाजिक स्वरूप को संतुलित रखने के लिए 35 प्रतिशत मुस्लिम, 55 प्रतिशत हिंदू तथा 10 प्रतिशत अन्य समुदायों के मतदाताओं को शामिल किया गया।

चंद्रसेन सागर सबसे लोकप्रिय दावेदार
सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि समाजवादी पार्टी की ओर से किसे उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए, तो 40 प्रतिशत लोगों ने चंद्रसेन सागर का नाम लिया। यह आंकड़ा अन्य सभी दावेदारों से काफी अधिक है। इसके बाद 20 प्रतिशत लोगों ने पूनम सेन को अपनी पहली पसंद बताया। 17 प्रतिशत मतदाताओं ने पूर्व विधायक विजयपाल सिंह का समर्थन किया। 12 प्रतिशत लोगों ने हरीश लाखा के पक्ष में राय दी। वहीं 5 प्रतिशत लोगों ने शालिनी सिंह को पसंद किया, जबकि शेष 5 प्रतिशत लोगों ने शालिनी सिंह एवं अन्य संभावित दावेदारों के नाम लिए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी के भीतर चंद्रसेन सागर को लेकर सबसे मजबूत जनसमर्थन दिखाई दे रहा है।
युवा मतदाताओं में भी सबसे आगे चंद्रसेन
सर्वे में आयु वर्ग के आधार पर भी मतदाताओं की पसंद जानने का प्रयास किया गया। 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में 45 प्रतिशत ने चंद्रसेन सागर को पहली पसंद बताया। 22 प्रतिशत युवाओं ने पूनम सेन का समर्थन किया। युवाओं की राय से संकेत मिलता है कि चंद्रसेन सागर की सक्रिय सामाजिक मौजूदगी और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का असर नई पीढ़ी पर भी दिखाई दे रहा है।
वहीं, 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं में भी चंद्रसेन सागर सबसे आगे रहे। इस वर्ग के 38 प्रतिशत लोगों ने उन्हें पहली पसंद बताया। 25 प्रतिशत लोगों ने पूर्व विधायक विजयपाल सिंह को उपयुक्त उम्मीदवार माना, जबकि 20 प्रतिशत मतदाताओं ने पूनम सेन के पक्ष में राय व्यक्त की। इससे संकेत मिलता है कि युवा और वरिष्ठ- दोनों आयु वर्गों में चंद्रसेन सागर की स्वीकार्यता बनी हुई है।
सामाजिक कार्यों की वजह से बढ़ी लोकप्रियता
सर्वे में मतदाताओं से यह भी पूछा गया कि वे किसी विशेष नेता को क्यों पसंद करते हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि चंद्रसेन सागर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। प्रशासन में मजबूत पकड़ और तीन आईएएस अधिकारियों के पिता होने की वजह से वह भाजपा सरकार में भी लोगों की खुलकर मदद करते रहे हैं। लोगों ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय नेता के रूप में भी पसंद किया है।
पिछले कई महीनों से चंद्रसेन सागर क्षेत्र में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों का सार्वजनिक सम्मान कर रहे हैं। वह खुद भी एक स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच उनकी सकारात्मक छवि बनी है। हाल ही में उन्होंने जंतर-मंतर के छात्र प्रदर्शन में शामिल होने के दौरान एक भाजपा नेता के हमले का शिकार हुए छात्र की पूरे वर्ष की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा भी की थी। सर्वे में शामिल कई लोगों ने इस पहल को संवेदनशील और सकारात्मक कदम बताते हुए उनकी सराहना की।

पूनम सेन की भी बनी अलग पहचान
सर्वे में दूसरे स्थान पर रहीं पूनम सेन को भी मतदाताओं ने जनता के बीच रहने वाली, व्यवहार कुशल और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय नेता बताया। खासकर महिला मतदाताओं और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पहचान सामने आई। संगठन में भी उनकी बेहतर पकड़ बताई जाती है।
पूर्व विधायक विजयपाल सिंह को उनके राजनीतिक अनुभव के कारण समर्थन मिला, जबकि हरीश लाखा और शालिनी सिंह का भी अपना सीमित लेकिन निश्चित समर्थक वर्ग दिखाई दिया।

भाजपा के उम्मीदवार पर टिकी चुनावी तस्वीर
सर्वे का सबसे दिलचस्प निष्कर्ष भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर सामने आया। 60 प्रतिशत लोगों का मानना था कि यदि भाजपा दिवंगत विधायक स्वर्गीय श्याम बिहारी लाल के परिवार से किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाती है, तभी इस सीट पर मुकाबला कड़ा होगा।
इसके विपरीत अधिकांश मतदाताओं का कहना था कि यदि भाजपा किसी अन्य चेहरे पर दांव लगाती है तो समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिल सकती है। यह राय बताती है कि फरीदपुर में व्यक्तिगत जनाधार और पारिवारिक राजनीतिक विरासत अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फरीदपुर का चुनावी गणित
फरीदपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, लेकिन यहां मुस्लिम, पिछड़े वर्ग और सवर्ण मतदाताओं की भी उल्लेखनीय संख्या है। यही कारण है कि किसी भी दल की जीत केवल एक वर्ग के वोटों से तय नहीं होती। उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, संगठन की मजबूती, सामाजिक सक्रियता और सभी वर्गों में स्वीकार्यता चुनाव परिणाम को प्रभावित करती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतारती है जिसकी पहुंच दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ-साथ सामान्य मतदाताओं तक भी हो, तो पार्टी मजबूत स्थिति में आ सकती है।

टिकट चयन पर रहेगी सबकी नजर
इंडिया टाइम 24 का यह सर्वे संकेत देता है कि समाजवादी पार्टी में टिकट की दौड़ फिलहाल चंद्रसेन सागर के पक्ष में दिखाई दे रही है। उनकी सामाजिक सक्रियता, शिक्षा के क्षेत्र में पहल और लंबे समय से क्षेत्र में मौजूदगी उन्हें अन्य दावेदारों पर बढ़त दिलाती नजर आती है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक समीकरण, जातीय संतुलन, चुनावी रणनीति और जीत की संभावना को ध्यान में रखकर करना होगा। दूसरी ओर भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है, यह भी फरीदपुर विधानसभा सीट के चुनावी समीकरण को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।
(नोट: यह रिपोर्ट इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम द्वारा 1 अप्रैल से 30 जून के बीच 10,000 मतदाताओं से फोन पर बातचीत के आधार पर किए गए स्वतंत्र सर्वे के निष्कर्षों पर आधारित है। यह सर्वे जनमत को दर्शाता है, इसे चुनाव परिणाम का पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।)




